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24 घण्टे में कभी भी ‘बंद’ हो सकते हैं देश के 90 करोड़ लोगों के डेबिट-क्रेडिट कार्ड!

15 Oct 2018
डेबिट-क्रेडिट कार्ड बंद होने से करोड़ों लोग हो सकते हैं ‘परेशान’, आरबीआई और सरकार पर टिकी ‘निगाहें’

OCT 15 (WTN) – देश के क़रीब 90 करोड़ लोगों के डेबिट-क्रेडिट कार्ड पर ख़तरा मण्डरा रहा है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि आज यानि 15 अक्टूबर के बाद से वे सभी डेबिट-क्रेडिट कार्ड बंद हो जाएंगे जो कि मास्टर कार्ड, अमेरिकन एक्सप्रेस और वीजा कार्ड की सेवाओं से संचालित होते हैं। इन कार्डों के बंद होने की बात इसलिए सामने आ रही है क्योंकि इन कम्पनियों की ओर से आरबीआई की लोकल डाटा स्‍टोरेज की नीति को मानने से इनकार कर दिया गया है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारतीय रिज़र्व बैंक ने डेबिट-क्रेडिट कार्ड और पेमेंट ऑप्शन देने वाली कम्पनियों को 6 महीने की छूट दी थी कि ये भारत में ही डाटा स्‍टोरेज का सर्वर लगाएं और सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें। आरबीआई के नए दिशा-निर्देश के मुताबिक़, हर पेमेंट कम्पनी को पेमेंट सिस्‍टम से जुड़े डाटा का लोकल स्‍टोरेज करना अनिवार्य है और यह नियम कल यानि 16 अक्‍टूबर से प्रभावी हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार भारत में इस समय 78 पेमेंट कम्पनियां काम कर रही हैं, इनमें से 62 ने आरबीआई के दिशा-निर्देश को मान लिया है।
 
इधर अमेरिका के राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रम्न ने वीजा, मास्‍टर कार्ड जैसी पेमेंट कम्पनियों के भारत में लोकल डाटा स्‍टोरेज के मुद्दे पर हस्‍तक्षेप करने की बात कही थी। वहीं जिन 16 कम्पनियों ने नए नियम को नहीं माना है, उनका तर्क है कि भारत में डाटा स्‍टोरेज सिस्‍टम से न सिर्फ़ लागत खर्च बढ़ेगा बल्कि डाटा की सुरक्षा भी एक बड़ी समस्या आगे जाकर आएगी। इन कम्पनियों के मुताबिक उनको डेटा स्टोर करने के लिए और भारत में खुद के डेटा सेंटर बनाने में कम से कम 18 से 24 महीने लग जाएंगे इसलिए आरबीआई इसका समय बढ़ाए।
 
इतना ही नहीं, विदेशी पेमेंट कम्पनियों ने वित्‍त मंत्रालय से इस मामले में हस्‍तक्षेप करने को भी कहा था। लेकिन लगता है कि आरबीआई अपने निर्देर्शों के बाद पीछे हटने के मूड में नहीं है, और उसने साफ़ कर दिया है कि पेमेंट कम्पनियों को नए दिशा-निर्देश मानने ही होंगे क्योंकि इन्हें पहले ही 6 महीने का समय दिया जा चुका है।
 
इस मामले में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, ब्राडबैंड इंडिया फोरम का इस बारे में कहना है कि स्थानीय स्तर पर डाटा स्टोरेज का सर्वर लगाए जाने से इसका लागत बोझ बढ़ेगा जिससे देश की आर्थिक विकास दर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। चूंकि यह सरकार के लिए ही नुकसानदायक होगा इसलिए सरकार को इसमें सुधार करना चाहिए।
 
अगर मास्टरकार्ड, अमेक्स और वीजा के डेबिट-क्रेडिट कार्ड बंद होते हैं तो फिर लोगों के पास कैश के अलावा यूपीआई, नेटबैंकिंग और मोबाइल वॉलेट जैसे भुगतान करने के विकल्प ही बचेंगे। स्वाभाविक है कि एटीएम कार्ड के बंद होने से लोगों के पास कैश की किल्लत भी हो जाएगी। ज्यादातर लोग अभी भी अपने डेबिट कार्ड का इस्तेमाल एटीएम से पैसा निकालने के लिए करते हैं। लगता है कि यदि आरबीआई ने इन कम्पनियों को कुछ समय की छूट नहीं दी तो उसका यह फ़ैसला देश के क़रीब 90 करोड़ लोगों पर भारी पड़ने वाला है।