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चर्चा: भारतीय लोगों से भेदभाव करता है संविधान का आर्टिकल 35-ए

06 Aug 2018
आर्टिकल 35-ए की संवैधानिकता पर सवाल 

AUG 06 (WTN) - इन दिनों भारतीय संविधान का आर्टिकल 35-ए काफी चर्चा में है। इस पर काफी बयान इन दिनों सुनने और पढ़ने को मिल रहे हैं। आर्टिकल 35-ए का सम्बन्ध भारत के जम्मू-कश्मीर राज्य से है। इस विवादित आर्टिकल को समाप्त करने की मांग काफी समय से चल रही है। भाजपा के घोषणा पत्र में हमेशा से आर्टिकल 35-ए की समीक्षा की बात कही गई है। आज से करीब चार साल पहले 2014 में एक एनजीओ ने अर्जी दाखिल कर इस आर्टिकल को समाप्त करने की मांग की थी। 

आइये आपको बताते हैं कि संविधान का आर्टिकल 35-ए आखिर क्या है? आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आर्टिकल 35-ए संविधान का वह आर्टिकल है जो जम्मू-कश्मीर विधानसभा को लेकर प्रावधान करता है कि वह राज्य में स्थायी निवासियों को परिभाषित कर सके। 14 मई 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था। इस आदेश के जरिए संविधान में एक नया अनुच्छेद 35-ए जोड़ दिया गया। आर्टिकल 370 के तहत यह अधिकार दिया गया है।

साल 1956 में जम्मू कश्मीर का संविधान बना था उसमें स्थायी नागरिकता को परिभाषित किया गया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जम्मू कश्मीर के संविधान के अनुसार, स्थायी नागरिक वह व्यक्ति है जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या फिर उससे पहले के दस सालों से राज्य में रह रहा हो, और उसने वहां पर सम्पत्ति हासिल की हो।

संविधान का आर्टिकल 35-ए जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष राज्य का दर्जा देता है। इसी आर्टिकल के तहत जम्मू कश्मीर राज्य के स्थायी निवासियों की पहचान की गई है। इस आर्टिकल का विवादित पक्ष यह है कि इसके तहत जम्मू कश्मीर में बाहरी लोग सम्पत्ति नहीं खरीद सकते हैं। वहीं बाहरी लोग राज्य सरकार की नौकरी भी नहीं कर सकते हैं।

आर्टिकल 35-ए की संवैधानिकता पर भी लम्बे समय से देश में बहस चल रही है। इस अनुच्छेद को हटाने के लिए तर्क दिया जा रहा है कि इसे संसद के माध्यम से लागू नहीं किया गया है। कहा जाता है कि यह आर्टिकल तब लागू किया जब देश विभाजन के समय काफी तादात में शरणार्थी जम्मू कश्मीर में आए थे। इसी आर्टिकल 35-ए के तहत इन सभी भारतीय नागरिकों को जम्मू कश्मीर के स्थायी निवासी प्रमाणपत्र से वंचित कर दिया गया था। इन वंचितों में 80 प्रतिशत लोग पिछड़े और दलित हिन्दू समुदाय से हैं।