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आर्टिकल 370 पर लेबर पार्टी का भारत विरोधी रूख उसे पड़ा भारी, नाराज़ भारतीय समुदाय ने चुनाव में सिखाया सबक़

16 Dec 2019
भारत विरोधी लेबर पार्टी की चुनाव में हार से ब्रिटेन में बढ़ा भारतीय समुदाय का राजनीतिक वर्चस्व
 
DEC 16 (WTN) – ब्रिटेन में हुए आम चुनाव के परिणाम आ चुके हैं और कंज़र्वेटिव पार्टी को इस चुनाव में जहां ऐतिहासिक जीत हासिल हुई है, वहीं लेबर पार्टी को इस चुनाव में क़रारी हार का सामना करना पड़ा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 1935 के बाद ब्रिटेन के आम चुनाव में यह लेबर पार्टी की सबसे बड़ी हार है, वहीं मार्गेट थ्रेचर के बाद कंज़र्वेटिव पार्टी की यह जीत सबसे बड़ी जीत है। ब्रिटेन की 650 सदस्यीय हॉउस ऑफ़ कॉमन में कंज़र्वेटिव पार्टी ने 365 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि लेबर पार्टी को सिर्फ़ 203 सीटों पर ही जीत हासिल हो सकी है।

ब्रेक्ज़िट समेत कई मुद्दे इस बार ब्रिटेन चुनाव में काफ़ी अहम थे, लेकिन भारत से जुड़े एक बड़े मुद्दे ने भी ब्रिटेन के चुनाव में सुर्खियां बटोरीं और इसी कारण से लेबर पार्टी को अधिकांश भारतीय लोगों के वोट नहीं मिले और उसे कम से कम 10 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है। दरअसल, वामपंथी विचारधारा से प्रेरित लेबर पार्टी को चुनाव के दौरान अपने घोषणापत्र में कश्मीर मुद्दे का जिक्र करना भारी पड़ गया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन को भारत विरोधी माना जाता है। कॉर्बिन और उनकी पार्टी ने जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाये जाने का भारी विरोध किया था। वहीं लेबर पार्टी ने इस मुद्दे पर एक आपात प्रस्ताव लाकर भारत सरकार के इस क़दम का विरोध तक किया था।

लेबर पार्टी के नेता कॉर्बिन ने आर्टिकल 370 के मुद्दे पर ट्वीट कर बताया था कि उन्होंने भारत के प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस के प्रतिनिधियों से ब्रिटेन में मुलाकात कर कश्मीर में मानवाधिकारों की स्थिति पर चर्चा की थी। कॉर्बिन के इस ट्वीट के बाद भारत में काफ़ी हंगामा हुआ था और भाजपा ने कांग्रेस पर आरोप लगाया था कि कांग्रेस देश के आंतरिक मुद्दों का अंतरराष्ट्रीकरण कर रही है, जिसके बाद कांग्रेस को इस मामले पर अपनी सफ़ाई तक देनी पड़ी थी।
 
लेबर पार्टी और उनके नेता कॉर्बिन के भारत विरोधी रुख के कारण ही पाकिस्तान सरकार ने अपने आधिकारिक बयान में कहा था कि वे चाहते हैं कि ब्रिटेन के आम चुनाव में लेबर पार्टी को ही चुनाव में जीत मिले। लेकिन ब्रिटेन के आम चुनाव में लेबर पार्टी की क़रारी हार के बाद पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। कहा जाता है कि जम्मू कश्मीर मुद्दे पर कॉर्बिन की भारत विरोधी बयानबाजी और पाकिस्तान के साथ बढ़ती नज़दीकी के कारण ही कॉर्बिन को भारतीय समुदाय के एक बहुत बड़े हिस्से का समर्थन हासिल नहीं हो सका।
 
लेबर पार्टी और उनके नेताओं के आर्टिकल 370 के ख़िलाफ़ बयानबाजी और प्रस्ताव से नाराज़ भारतीय समुदाय से जुड़े 130 संगठनों ने लेबर पार्टी के ख़िलाफ़ विरोध जताया था। इन संगठनों ने कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के ख़िलाफ़ जारी प्रस्ताव को लेकर लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कॉर्बिन को बक़ायदा एक पत्र लिखकर अपनी नाराज़गी जताई थी। भारतीय समुदाय से जुड़े संगठनों का इस बारे में कहना था कि जेरेमी कॉर्बिन की लेबर पार्टी ने कश्मीर पर ब्रिटिश राजनीतिक पार्टियों के उस स्टैण्ड का उल्लंघन किया है जिसमें कश्मीर मुद्दे को भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मुद्दा माना गया है।
 
वहीं आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लेबर पार्टी की सहयोगी लेबर फ्रेण्ड्स ऑफ़ इण्डिया ने लेबर पार्टी पर भारतीय मूल के कम उम्मीदवारों को चुनने पर खेद जताया था। लेबर फ्रेण्ड्स ऑफ़ इण्डिया ने अपने पत्र में खेद व्यक्त करते हुए लिखा था कि लेबर पार्टी ने 39 सुरक्षित सीटों में से भारतीय मूल के सिर्फ एक उम्मीदवार का चयन किया है। वहीं 100 अन्य सीटों पर एक भी भारतीय मूल के उम्मीदवार को नहीं चुना। भारतीय समुदाय और लेबर पार्टी के बीच पहले से ही तनावपूर्ण सम्बन्धों का जिक्र करते हुए लेबर फ्रेण्ड्स ऑफ़ इण्डिया ने पत्र में बाक़यदा चेतावनी दी थी भारतीय समुदाय, लेबर पार्टी को बड़ा झटका दे सकता है।

लेबर पार्टी और उनके नेता जेरेमी कॉर्बिन के कश्मीर विरोधी रूख के चलते ही भारतीय समुदाय के लोगों ने प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की कंज़र्वेटिव पार्टी को समर्थन देना शुरू कर दिया था। यह पहली बार था कि ब्रिटेन के आम चुनाव में भारतीय समुदाय एक राजनीतिक ताक़त के रूप में उभर कर सामने आया और भारतीय समुदाय ने खुलकर किसी पार्टी का विरोध किया और किसी पार्टी की समर्थन की रणनीति अपनाई। कश्मीर मुद्दे पर भारतीय समुदाय की एकजुटता का ही परिणाम रहा है कि लेबर पार्टी को भारतीय समुदाय के वोटों से हाथ धोना पड़ा। ब्रिटिश मीडिया के मुताबिक़, भारतीय समुदाय के कारण ही कंज़र्वेटिव पार्टी को कम से कम 10 सीटों पर जीत हासिल हो सकी है।
 
इस बार ब्रिटेन के आम चुनाव में ब्रिटेन में रह रहे भारतीय समुदाय के भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों ने लेबर पार्टी के ख़िलाफ़ जमकर मतदान किया। भाजपा से जुड़े एक विदेशी लॉबिंग समूह, समुद्रपार बीजेपी मित्र (ओएफबीजेपी) ने ब्रिटेन में भारतीयों से लेबर पार्टी को वोट ना देने की अपील की थी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ब्रिटेन में 48 ऐसी सीटे हैं जहा पर भारतीय मूल के मतदाताओं की संख्या काफ़ी तादात में है और यह मतादाता चुनाव परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।
 
जैसा कि हमने आपको बताया कि ब्रिटेन में लाखों की तादात में भारतीय समुदाय रहता है। धीरे-धीरे अब यही भारतीय समुदाय राजनीतिक तौर पर एकजुटता दिखा रहा है। कहा जा रहा है कि आने वाले समय में भारतीय समुदाय की राजनीतिक ताक़त में काफ़ी इज़ाफ़ा हो सकता है, जिससे ब्रिटेन के आम चुनाव में शिरकत करने वाली राजनीतिक पार्टियां भारत और भारतीय समुदाय को नज़रअंदाज़ नहीं कर पाएंगी। साफ़ ज़ाहिर है कि आर्टिकल 370 के मुद्दे पर भारत विरोधी क़दम से लेबर पार्टी को कई सीटों पर जो हार का सामना करना पड़ा है, उससे विदेशी ज़मीन पर भारतीय समुदाय की राजनीतिक ताक़त का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।