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सफल ASAT परीक्षण के बाद और भी ‘शक्तिशाली’ हुआ भारत

29 Mar 2019
ASAT परीक्षण बाद भारत से ‘डरे’ चीन और पाकिस्तान

MAR 29 (WTN) – अंतरिक्ष में भारत ने ASAT परीक्षण के दौरान उपग्रह को मार गिराने में जो सफलता हासिल की है, इसके बाद पूरी दुनिया में भारत की इस कामयाबी के चर्चे हो रहे हैं। भारत से पहले इस कामयाबी को सिर्फ़ रूस, अमेरिका और चीन ही हासिल कर सके थे। यानि कि अब इन देशों के अलावा भारत भी अंतरिक्ष में अपने दुश्मन को निशाना बना सकता है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत ने लो ऑर्बिट में ASAT से सेटेलाइट को मार गिराया है, और यह वही क्षेत्र होता है जहां पर अधिकतर जासूसी करने वाले उपग्रह घूमते रहते हैं। भारत के इस सफल परीक्षण से भारत के पड़ोसी देश चीन को एक सख्त संदेश दिया है कि भारत अब अंतरिक्ष में भी चीन का मुकाबला करने में सक्षम है। जानकारों का मानना है कि भारत द्वारा अंतरिक्ष में सेटेलाइट को मार गिराने की उपलब्धि भारत के पहले परमाणु परीक्षण के बराबर है।
 
वैज्ञानिकों के मुताबिक़, अंतरिक्ष में किसी उपग्रह को मार गिराना आसान काम नहीं है। भारत ने जिस उपग्रह को अंतरिक्ष में मार गिराया है, वह 17,000 मील प्रति घण्टे की रफ़्तार से पृथ्वी के निकट चक्कर लगा रहा था। भारत ने अपने परीक्षण में टारगेट पर सही निशाना लगाया और सेटेलाइट के 270 टुकड़े हो गए।

कहा जा रहा है कि भारत द्वारा यह उपलब्धि हासिल किये जाने के बाद अंतरिक्ष में भी अब भारत और चीन के बीच मुक़ाबले की आशंका बढ़ गई है। जब चीन ने 12 साल पहले 2007 में एंटीसेटेलाइट मिसाइल का परीक्षण किया था, तो उसके बाद पूरी दुनिया को अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ शुरू होने की चिंता सताने लगी थी।
 
चीन धीरे-धीरे अब अंतरिक्ष में भी अपनी पकड़ बनाने की कोशिश में है। एक जानकारी के मुताबिक़, दिसम्बर 2018 में चीन ने हॉन्गयुन प्रोजेक्ट के तहत लो ऑर्बिट अर्थ सेटेलाइट लॉन्च किया था, इस प्रोजेक्ट के तहत चीन की 2025 तक 156 सेटेलाइट भेजने की योजना है। कहा जा रहा है कि चीन के इस परीक्षण का उद्देश्य पाकिस्तान समेत कई देशों को कम्युनिकेशन, नैविगेशन और इंटरनेट सुविधा अपलब्ध कराना है।
 
भारत के इस परीक्षण के बाद चीन का चिंतित होना स्वाभाविक है, क्योंकि इस परीक्षण के बाद भारत, चीन के सेटेलाइट को जरूरत पड़ने पर मार गिरा सकता है। इधर चीन ने लो अर्थ ऑर्बिट सेटेलाइट भेजने की योजना ASAT परीक्षण करने के बाद ही बनाई थी। वहीं अमेरिका की तमाम आपत्तियों को दरकिनार करते हुए चीन अंतरिक्ष में ASAT हथियारों को जमा करने में लगा हुआ है।
 
इधर साल 2014 में यूएन कॉन्फ्रेंस में चीन ने रूस के साथ मिलकर अंतरिक्ष में हथियारों की दौड़ शुरू होने से रोकने के लिए PPWT (Treaty on the Prevention of the Placement of Weapons in Outer Space) को लागू कराने की पहल की थी, लेकिन अमेरिका ने इसका यह कहकर विरोध किया था कि इसमें ASAT परीक्षण को शामिल नहीं किया गया है।
 
विस्तारवादी चीन अपनी जरूरत खत्म होने के बाद किसी भी समय ASAT परीक्षण पर बैन लगाने के लिए राजी हो सकता है। वहीं जानकारों का कहना है कि अगर भारत ASAT परीक्षण नहीं करता, तो चीन बिना किसी चुनौती के लो ऑर्बिट सेटेलाइट लॉन्च करके उसका व्यावसायिक लाभ उठाता।
 
चीन के साथ-साथ भारत ने इस परीक्षण के जरिये पाकिस्तान को भी कड़ा संदेश दिया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले साल चीन ने पाकिस्तान की रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट लॉन्च करने में मदद की थी। ऐसे में भारत ने पाकिस्तान को संकेत दे दिया है कि वह अंतरिक्ष में पाकिस्तान के सेटेलाइट को मार गिराने में सक्षम है।
 
कहा जा रहा है कि ASAT परीक्षण के बाद भारत परमाणु हमले को रोकने की क्षमता हासिल कर सकता है।जैसा कि आप जानते हैं कि भारत का हमेशा से ही रुख रहा है कि वो कभी भी किसी देश के ख़िलाफ़ पहले परमाणु हमला नहीं करेगा, लेकिन यदि भारत अपनी नई एंटी सेटेलाइट तकनीक को एंटीमिसाइल डिफेंस में इस्तेमाल करने में सक्षम हो गया, तो भारत सामरिक रूप से काफ़ी शक्तिशाली हो जाएगा और युद्ध के स्थिति में परमाणु हथियारों से लैस मिसाइल को मार गिराने में सफल हो सकेगा।
 
जाहिर है कि सेटेलाइट को मार गिराने की क्षमता हासिल करने के बाद भारत की साख पूरी दुनिया में बढ़ी है, और इस परीक्षण को करने की इजाजत देने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के साहस की हर कहीं तारीफ हो रही है। जैसा कि कहा जा रहा है कि डीआरडीओ के पास ऐसा करने की क्षमता पहले भी थी, लेकिन तत्कालीन राजनीतिक नेतृत्व इस परीक्षण को करने के लिए जरूरी साधन, सहायता और सहमति देने में अक्षम रहा था, जिसके कारण भारत यह उपलब्धि हासिल करने में 7 साल पीछे रह गया।