HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

लगातार म्यूटेशन होने पर धीरे-धीरे कमजोर हो सकता है COVID-19 का वायरस : डॉक्टर मंजूनाथ

18 May 2020

कोरोना वायरस संक्रमण की वैक्सीन बनने में अभी लग सकता है वक़्त

MAY 18 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) की वैक्सीन और दवा बनाने पर पूरी दुनिया में रिसर्च चल रहा है। लेकिन तमाम कोशिशों के बाद भी अभी तक वैज्ञानिकों को सफलता हासिल नहीं हो पाई है। इन दिनों सभी के मन में यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या कारण है कि COVID-19 की दवा या वैक्सीन बनने में इतना वक़्त लग रहा है। 

इस बारे में People's College of Medical Science & Research Centre के एनाटॉमी विभाग के एचओडी प्रोफेसर डॉक्टर मंजूनाथ वी एम के अनुसार किसी भी बीमारी की दवा या वैक्सीन बनने में काफ़ी वक़्त लगता है। दवा या वैक्सीन की फाइनल क्लीनिकल ट्रायल के पहले कम से कम तीन चरणों के ट्रायल होते हैं। सबसे पहले इसका प्री-क्लीनिकल ट्रायल जानवरों पर किया जाता है। यहां पर सफल रहने के बाद इसका ट्रायल अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों पर अलग-अलग चरण में किया जाता है।

ट्रायल के हर चरण में यह परखा जाता है कि दवा या वैक्सीन का किसी भी तरह का कोई भी साइड इफ़ेक्ट तो नहीं हो रहा है और वहीं ट्रायल के दौरान दी गई एंटीजन की एंटीबाडी बन रही है कि नहीं। इस सबके बाद ही दवा या वैक्सीन बनाने का लाइसेंस मिलता है। साथ ही बाद में यह भी देखा जाता है कि इसके लॉन्गटर्म इफ़ेक्ट क्या हैं।

डॉक्टर मंजूनाथ के मुताबिक़, COVID-19 का वायरस भी SARS और MARS फैमिली का ही वायरस है और SARS और MARS के वायरस की ही तरह COVID-19 के वायरस का RNA स्ट्रक्चर बदलता रहता है। लेकिन SARS की तुलना में COVID-19 इसलिए ज़्यादा ख़तरनाक रूप से फैल रहा है क्योंकि SARS लोअर रेस्पेरेटरि सिस्टम (फेफड़े) को प्रभावित करता था और इसके लक्षण तुरंत ही सामने आ जाते थे।

लेकिन COVID-19 में रेस्पेरेटरि सिस्टम का ऊपरी सिस्टम प्रभावित होता है और इसके बाद लोअर सिस्टम। इसी कारण से COVID-19 के लक्षण देर से पता चल पाते हैं। और चूंकि यह वायरस शुरू में अपर रेस्पेरेटरि सिस्टम को प्रभावित करता है इसलिए यह वायरस छींक, खांसी और अन्य तरीके से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल रहा है।

डॉक्टर मंजूनाथ के अनुसार, अन्य वायरस की ही तरह COVID-19 वायरस भी लगातार अपना जेनेटिक स्ट्रक्चर बदल रहा है यानी इसका म्यूटेशन होता रहता है और अभी तक यह क़रीब 200 बार अपना स्ट्रक्चर बदल चुका है। सम्भावना है कि अन्य वायरस की तरह COVID-19 का वायरस भी म्यूटेशन के बाद धीरे-धीरे एक समय के बाद कमजोर हो जाएगा या फिर हो सकता है कि यह और भी ज़्यादा खतरनाक हो जाए।