HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

जानिए यदि FATF ने पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टेड किया तो क्या होगा?

19 Oct 2019
यदि FATF ने किया ब्लैक लिस्टेड तो बर्बाद हो जाएगी पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था!

OCT 19 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि पाकिस्तान की जनता ग़रीबी में जीने को मज़बूर हैं, लेकिन पाकिस्तान की सरकार और वहां की सेना आतंकियों को संरक्षण और प्रशिक्षण देने से पीछे नहीं हट रही है। वैसे पाकिस्तान फ़िलहाल FATF (Financial Action Task Force) की ब्लैक लिस्ट में आने से बच गया है। लेकिन, ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान, FATF की लिस्ट में ब्लैक लिस्टेड होने से भविष्य में बच जाएगा।

पाकिस्तान इस समय FATF की निगरानी में है और यदि पाकिस्तान FATF की शर्तों पर ख़रा नहीं उतर पता है, तो हो सकता है कि अगले साल फरवरी में FATF, पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टेड कर दे। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि यदि पाकिस्तान FATF द्वारा ब्लैक लिस्टेड हुआ तो पाकिस्तान का इस पर क्या प्रभाव पड़ेगा? आइये इसके बारे में आपको विस्तार से बताते हैं।
 
सबसे पहले तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि FATF ने पाकिस्तान को चेतावनी जारी की है। FATF ने पाकिस्तान को साफ़ कह दिया है कि यदि फरवरी 2020 तक के दिये गये समय में अपनी ज़मीन पर टेरर फण्डिंग, मनी लॉण्ड्रिंग और आतंकियों को संरक्षण देने और उनके प्रशिक्षण पर रोक लगाने में वो नाकामयाब रहता है तो उसके ख़िलाफ़ गम्भीर कार्रवाई की जाएगी।
 
यानी कि यदि पाकिस्तान ने FATF द्वारा सुझाए गये उपायों पर कार्रवाई नहीं कि तो पाकिस्तान का ब्लैक लिस्टेड होना तय है। FATF के अध्यक्ष जिंयाग्मिन लिउ का कहना है कि पाकिस्तान को जल्दी से जल्दी टेरर फण्डिंग, मनी लॉण्ड्रिंग और आतंकियों के संरक्षण-प्रशिक्षण के ख़िलाफ़ कड़े क़दम उठाने होंगे। यदि पाकिस्तान ऐसा करने में नाकामयाब रहता है, तो फरवरी 2020 के बाद पाकिस्तान के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उसे FATF द्वारा ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाएगा। आपको बता दें कि FATF के टेरर फण्डिंग और मनी लॉण्ड्रिंग के 27 मानकों में से 22 पर पाकिस्तान ख़रा नहीं उतर पाया है।
 
दरअसल, 36 देशों वाले FATF चार्टर के अनुसार, किसी भी देश को ब्लैक लिस्ट नहीं करने के लिए कम से कम 3 देशों के समर्थन की ज़रूरत होती है। पाकिस्तान फिलहाल 'ग्रे लिस्ट' (वॉच लिस्ट) में है और वो इससे बाहर आने की कोशिश में जुटा है। इससे पहले चीन, तुर्की और मलेशिया ने पाकिस्तान के ज़रिए उठाए गए क़दमों की प्रशंसा की थी। वहीं भारत ने पाकिस्तान को ब्लैक लिस्ट करने की सिफ़ारिश की थी। पाकिस्तान के बारे में भारत का कहना था कि पाकिस्तान ने हाफिज़ सईद को अपने फ्रीज खातों से धन निकालने की अनुमति दी है।

यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि यदि फरवरी 2020 तक आतंक और आतंकियों के ख़िलाफ़ पाकिस्तान की ओर से कोई सुधारात्मक और सकारात्मक क़दम नहीं उठाए जाते हैं, तो पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टेड कर दिया जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि FATF के नियमों के अनुसार, ग्रे और ब्लैक लिस्ट के बीच 'डार्क ग्रे' की भी एक क्षेणी होती है। इस 'डार्क ग्रे' क्षेणी का अर्थ होता है ‘सख़्त चेतावनी’। FATF द्वारा किसी देश को 'डार्क ग्रे' क्षेणी में डालने का मतलब है कि सम्बन्धित देश को सुधार का एक अन्तिम मौक़ा मिल सके।
 
FATF का मुख्य उद्देश्य मनी लॉण्ड्रिंग और आतंकी फण्डिंग पर लगाम लगाने में नाकाम देशों की रेटिंग तैयार करना है। FATF ऐसे देशों की दो लिस्ट तैयार करता है। पहली लिस्ट ग्रे लिस्ट होती है और दूसरी लिस्ट ब्लैक लिस्ट होती है। आपको बता दें कि FATF द्वारा जिन देशों को ग्रे लिस्ट में शामिल किया जाता है, उन देशों को अंतर्राष्ट्रीय वित्त संस्थाओं और अन्य देशों से आर्थिक मदद मिलने में मुश्किल होती है।
 
वहीं यदि किसी देश को FATF ब्लैक लिस्ट में डाल देता है, तो उस देश को अंतर्राष्ट्रीय वित्त संस्थाओं और अन्य देशों से मिलने वाली आर्थिक सहायता का रास्ता पूरी तरह से बंद हो जाता है। यदि पाकिस्तान ब्लैक लिस्टेड हो जाता है, तो फ़िलहाल उसकी आर्थिक मदद कर रहे चीन और सऊदी अरब जैसे देशों से भी फण्ड मिलने में मुश्किल हो जाएगी। यदि ऐसा होता है, तो पाकिस्तान की अर्थव्यवस्ता को बर्बाद होने में ज़्यादा वक़्त नहीं लगेगा।
 
ऐसा इसलिए, क्योंकि पाकिस्तान ने आईएमएफ से काफ़ी कड़ी शर्तों पर बैलआउट पैकेज लिया है। आईएमएफ की शर्तों के कारण पाकिस्तान में टैक्स की दर और महंगाई काफ़ी बढ़ गई है। वहीं भारत से व्यापार बंद होने के कारण पाकिस्तान में आम ज़रूरत का सामान काफ़ी महंगा हो गया है। ऐसे में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को चीन और सऊदी अरब जैसे देशों से मिलने वाली वित्तीय सहायता का काफ़ी सहारा है। लेकिन यदि FATF ने पाकिस्तान को ब्लैक लिस्टेड कर दिया, तो पाकिस्तान को मिलने वाली विदेशी सहायता पर रोक लग जाएगी और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था तबाह हो जाएगी।
 
वैसे पाकिस्तान के इतिहास को देखकर लगता नहीं है कि वो आतंकियों का साथ देना छोड़ेगा। और यदि ऐसा होता है तो FATF, पाकिस्तान को फरवरी 2020 के बाद ब्लैक लिस्ट में डाल सकता है। पाकिस्तान यदि FATF की ब्लैक लिस्ट में डाल दिया जाता है, तो अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व बैंक(World Bank) और यूरोपीय संघ (EU) जैसे संस्थान पाकिस्तान को डाउनग्रेड करेंगे। इन संस्थाओं द्वारा ऐसा करने से पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और भी ख़राब हो जाएगी।

FATF द्वारा ब्लैक लिस्टेड होने पर पाकिस्तान की ना ही किसी संस्था की ओर से राहत कार्यों में मदद की जाएगी और न ही पाकिस्तान को क़र्ज़ मिल पाएगा। यानी कि साफ़ ज़ाहिर है कि यदि पाकिस्तान ने समय रहते आतंकियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई नहीं की तो पाकिस्तान का दिवालिया होना तय है। अब देखते हैं कि पाकिस्तान की सरकार और वहां की सेना को अपने देश के लोगों की ज़्यादा चिंता है या फ़िर वे आतंकियों का साथ देते रहते हैं?