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SARS की तरह ही जल्द ख़त्म हो सकता है कोरोना वायरस; अमेरिकी वैज्ञनिकों ने किया दावा

06 May 2020

रिसर्च में हुआ खुलासा; SARS की तरह कोरोना वायरस में भी ग़ायब हो रहा है जेनेटिक मैटेरियल

MAY 06 (WTN) - चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस बीमारी (COVID-19) अभी तक पूरी दुनिया को काफ़ी नुकसान पहुंचा चुकी है। चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती, लापरवाही और ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैये के कारण 200 से ज़्यादा देशों के क़रीब 37 लाख 27 हज़ार से ज़्यादा लोग कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं। जहां तक कोरोना वायरस संक्रमण से मौतों की बात है, तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण महामारी से अभी तक क़रीब 2,58,344 लोगों की जान जा चुकी है।

जैसा कि आप जानते ही हैं कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के इलाज की अभी तक कोई भी ठोस प्रामाणिक वैक्सीन या दवा नहीं बन पाई है। लेकिन दुनियाभर के डॉक्टर्स अपने-अपने स्तर पर कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी का इलाज कर रहे हैं। वहीं, कोरोना वायरस की वैक्सीन और दवा की खोज में चिकित्सक और वैज्ञानिक दिन-रात मेहनत भी कर रहे हैं। इसी कड़ी में कोरोना वायरस संक्रमण महामारी पर कई तरह के रिसर्च भी हो रहे हैं।

 

अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण पर जो भी रिसर्च हुए हैं, उन अभी रिसर्च में अलग-अलग बात सामने निकलकर आई है। लेकिन काफ़ी सारे रिसर्च के मुताबिक़, कोरोना वायरस जल्द ही ख़त्म हो जाएगा। इसी कड़ी में अमेरिका के एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी में हुए एक रिसर्च में वैज्ञानिकों को काफ़ी सकारात्मक परिणाम मिले हैं जो कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के दौर में आशा की एक किरण है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रिसर्च कर रहे अमेरिकी वैज्ञानिकों के मुताबिक़, पहली बार कोरोना वायरस में एक ख़ास तरह का म्यूटेशन देखने को मिला है। दरअसल, अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एरिजोना में एक मरीज़ के कोरोना वायरस सैंपल की जांच में पाया कि कोरोना वायरस के जेनेटिक मैटेरियल का एक हिस्सा ग़ायब है। इसके बाद वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि हो सकता है कि जल्द ही कोरोना वायरस भी साल 2003 में फैले SARS (Severe Acute Respiratory Syndrome) की तरह ख़त्म हो सकता है। लेकिन आख़िर वैज्ञानिक ऐसा क्यों कह रहे हैं? आइये इसके बारे में आपको बताते हैं

 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोरोना वायरस भी SARS फैमिली का ही एक वायरस है। अमेरिकी वैज्ञानिकों के अनुसार, वायरस के जेनेटिक मैटेरियल के ग़ायब होने की ऐसी ही घटना साल 2003 में SARS महामारी के फैलने के बाद देखने को मिली थी। SARS वायरस के जेनेटिक मैटेरियल ग़ायब होने के बाद धीरे-धीरे SARS महामारी ख़त्म होने लगी थी।

वहीं, लगातार शोध के बाद अमेरिकी वैज्ञानिकों के अनुसार कोरोना वायरस में जो बदलाव देखने को मिला है, उससे यह भी संकेत मिलता है कि मनुष्यों में वायरस का संक्रमण धीरे-धीरे कमज़ोर पड़ रहा है। हालांकि, वैज्ञानिकों का मानना है कि सिर्फ़ एक जगह के सैम्पल पर किए गए किसी भी रिसर्च के निष्कर्ष को फाइनल मान लेना सही नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार, कुछ अन्य जगहों के सैंपल के वायरस में भी यदि जेनेटिक मैटेरियल ग़ायब हो रहा है, तो इस निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है कि कोरोना वायरस भी SARS की तरह जल्द ही अपने आप ख़त्म हो जाएगा।

 

दरअसल, वैज्ञानिकों के मुताबिक़, साल 2003 में SARS बीमारी के दौरान जब वायरस का इसी तरह का म्यूटेशन बढ़ने लगा था, तो कुछ ही समय बाद महामारी ख़त्म होने लगी थी। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि SARS और COVID-19 महामारी में काफ़ी अंतर है क्योंकि COVID-19 की तरह SARS इतने बड़े पैमाने पर दुनियाभर में नहीं फैला था।

वैसे रिसर्च करने वालों का मानना है कि यदि बड़े स्तर पर वायरस की जीनोम सिक्वेंसिंग की जाए, और वायरस के जेनेटिक मैटेरियल ग़ायब होने के परिणाम कुछ और भी जगहों से मिलते हैं, तो फ़िर विश्वास के साथ कहा जा सकता है कि कोरोना वायरस भी SARS की ही तरह अपने आप जल्द ख़त्म हो जाएगा।