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आरबीआई ने फिर दिखाई सख्ती, बैंकों से SWIFT सिस्टम की कमियों को दूर करने कहा

07 Sep 2018
SWIFT सिस्टम के ज़रिये ही हुआ था पीएनबी में 13,600 करोड़ रुपये का घोटाला

SEP 07 (WTN) – पंजाब नेशनल बैंक में नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के किये हुए फ्राड से तो आप सभी वाकिफ़ ही हैं। मोदी-चौकसी की 13,600 करोड़ रुपये की इस धोखाधड़ी के बाद से भारतीय बैंकिंग व्यवस्था पर से लोगों का विश्वास उठने लगा था। देश की जनता ने आरोप लगाया था कि बैंकों के बड़े अधिकारियों की मिलीभगत के बिना इतना बड़ा फ्राड नहीं हो सकता है। इस पूरे प्रकरण के बाद आरबीआई पर भी लोगों ने सवाल उठाए थे कि आख़िर क्यों आरबीआई बैंकिंग सिस्टम की कमियों को दूर नहीं करता है।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, पंजाब नेशनल बैंक फ्राड के आठ महीने बीत जाने के बाद, भारतीय रिज़र्व बैंक ने एक गुप्त मैसेज के जरिए सभी बैंकों को SWIFT सिस्टम की कमियों को दूर करने के लिए कहा है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नीरव मोदी और मेहुल चौकसी ने इसी SWIFT सिस्टम का सहारा लेकर 13,600 करोड़ रुपए का पीएनबी घोटाला किया था।
 
जानकारी के मुताबिक, रिज़र्व बैंक की बार-बार चेतावनी के बाद भी बैंक इस सिस्टम में बदलाव नहीं कर रहे हैं। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार रिज़र्व बैंक ने सभी बैंकों को एक गोपनीय संदेश भेजा है। जिसमें केंद्रीय बैंक ने सभी बैंकों से SWIFT सिस्टम की कमियों को दूर करने के लिए कहा है ताकि किसी भी तरह के फ्राड पर लगाम लगाई जा सके।
 
SWIFT का पूरा नाम Society for Worldwide Interbank Financial Telecommunications System है। यह एक मैसेजिंग नेटवर्क है। पेमेंट पूरा करने के लिए इसका उपयोग वित्तीय संस्थान गुप्त तरीके से जानकारी भेजने के लिए करते हैं। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, रिज़र्व बैंक ने बैंकों को एक और कारण बताओ नोटिस भेजा है। इस नोटिस में कहा गया है कि बैंकों ने अभी भी पूरी तरह से उसके आदेश पर अमल नहीं किया है। आरबीआई ने ऐसे बैंकों और वित्तीय संस्थानों से पूछा है कि आखिर इसमें देरी का कारण क्या है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसी SWIFT का दुरूपयोग करके पंजाब नेशनल बैंक की मुम्बई स्थित ब्रेडी हाउस शाखा के कर्मचारियों ने नीरव मोदी को कथित तौर पर लाभ पहुंचाया था। जानकारी के मुताबिक इसके ज़रिए फ़र्जी लेटर ऑफ़ अंडरटेकिंग जारी किए थे। आरबीआई ने बैंकों को कहा है कि जब तक CBS सिस्टम में ट्रांजैक्शन न दिखे, तब तक SWIFT मैसेज न भेजा जाए। इसके अलावा 30 अप्रैल 2018 तक CBS और SWIFT मैसेजिंग में बदलाव के लिए भी कहा गया था।
 
भारतीय बैंकिंग प्रणाली वैसे ही एनपीए के महाजंजाल के जूझ रही है। ऐसे में आरबीआई को चाहिए कि भारतीय जनमानस का विश्वास बैंकिंग प्रणाली पर बना रहे, इसके लिए बैंकों की कार्यप्रणाली की समय-समय पर समीक्षा की जाए। यदि ऐसा करने में आरबीआई असफल रहती है तो फिर से किसी बड़े घोटाले के लिए तैयार रहिये।