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पीएफ के नियमों में होंगे ऐतिहासिक बदलाव, बढ़ेगी Take Home Salary

29 Aug 2019
अब नौकरों और ड्राइवरों के भी खुलेगे पीएफ अकाउंट; वेतनभोगी घर से जा सकेंगे ज़्यादा वेतन

AUG 29 (WTN) – लोकसभा चुनाव में प्रचण्ड बहुत से जीत हासिल करने वाली मोदी सरकार अब कर्मचारियों और स्वरोज़गार करने वालों के लिए बड़ी सौगात देने जा रही है। यदि हम आपसे कहें कि आने वाले समय में कर्मचारियों ज़्यादा Take Home Salary घर ले जा सकेंगे। वहीं यदि हम आपसे कहें कि घरेलू नौकर, ड्राइवर जैसे काम करने वाले और स्वरोज़गार करने वालों के भी पीएफ अकाउंट होंगे, तो यह पढ़कर आप चौक गये होंगे।

दरअसल, मोदी सरकार की नई नीतियों के तहत ऐसा होने जा रहा है। क्या है यह पूरा मामला? आइये आपको विस्तार से बताते हैं। जैसा कि आप जानते हैं कि नौकरी करने वालों के लिए पीएफ की रक़म काफ़ी मायने रखती है। सेवानिवृत्ति के बाद या फ़िर नौकरी के समय ही किसी आकस्मिक काम के लिए पीएफ की राशि आर्थिक ज़रूरतों को पूरा करती है।

पीएफ की हर महीने जमा होने वाली राशि में कर्मचारी और नियोक्ता दोनों का अंशदान होता है। चूंकि पीएफ की राशि में कर्मचारी का भी अंशदान शामिल होता है, ऐसे में उसकी Take Home Salary कम होती है। लेकिन यदि पीएफ की हर महीने जमा होने वाले राशि में कर्मचारी का अंशदान कम हो, तो उसकी Take Home Salary ज़्यादा हो सकती है।

दरअसल, श्रम और रोज़गार मंत्रालय ने सलाह दी है कि EPF में कर्मचारियों का अंशदान कम कर दिया जाए। कर्मचारियों की ओर से EPF में उनके अंशदान को घटाने की सिफ़ारिश एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फण्ड एण्ड मिस्लेनियस बिल, 2019 में की गई है।

अगर श्रम और रोज़गार मंत्रालय की इस सिफ़ारिश को मान लिया गया, तो इससे कर्मचारियों की Take Home Salary बढ़ जाएगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ़िलहाल EPF में कर्मचारी की बेसिक सैलरी का 24 प्रतिशत हिस्सा जमा होता है। इसमें 12 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारी के वेतन से जमा होता है, और बाकी के 12 प्रतिशत हिस्से की राशि नियोक्ता कम्पनी जमा करती है।

वर्तमान नियमों के अनुसार, जिस कर्मचारी का मासिक वेतन 15,000 रुपए होता है, उसका PF कटना ज़रूरी है। ठीक इसी तरह जिन कम्पनियों के पास कम से कम 20 कर्मचारी हैं, ऐसी कम्पनियों को अपने कर्मचारियों की बेसिक सेलरी का 12 प्रतिशत अंशदान PF में जमा करना ज़रूरी है।

श्रम और रोज़गार मंत्रालय की सिफ़ारिश के मुताबिक़, कर्मचारियों के वेतन का कितना हिस्सा EPF में जमा किया जाएगा, इसका निर्णय कर्मचारी की उम्र, लिंग और पेग्रेड के हिसाब के किया जाएगा। हालांकि, EPF में कम्पनी का अंशदान पहले की तरह ही रहेगा। यदि श्रम और रोज़गार मंत्रालय की सिफ़ारिश लागू होती हैं, तो इससे पीएफ में कर्मचारियों का अंशदान कम हो सकता है जिससे उनकी Take Home Salary में वृद्धि होगी।

वहीं मोदी सरकार अब नौकर, ड्राइवर और इसी तरह के काम करने वालों और स्वरोज़गार करने वालों को भी पीएफ योजना का लाभ देने की योजना लागू कर सकती है। जानकारी के मुताबिक़, श्रम मंत्रालय जल्द ही कर्मचारी भविष्य निधि संगठन से जुड़े क़ानून में बदलाव करने के लिए एक प्रस्ताव को तैयार कर रहा है। इस क़ानून में संशोधन के बाद इसको पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईपीएफ की अभी जो व्यवस्था है, उसके अनुसार कम्पनियों और सरकारी कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों को ही पीएफ योजना का लाभ मिलता है। इसके दायरे में नौकर, ड्राइवर और स्व-रोजगार करने वाले लोग शामिल नहीं होते हैं।

मोदी सरकार ने पीएम श्रम योगी मान धन पेंशन योजना को शुरू किया है। कहा जा रहा है कि सरकार नौकर, ड्राइवर और इस तरह के काम करने वालों समेत स्वरोज़गार करने वालों के पीएफ खाते खोलकर उनसे अंशदान भी कराना चाहती है। हालांकि, इन लोगों के पीएफ के लिए 12 प्रतिशत के अंशदान की सीमा को नहीं रखा जाएगा। इस तरह के खाते में ऐसे लोगों को अंशदान की सीमा तय नहीं की जाएगी। ये लोग अपनी सहमति से अपना अंशदान कर सकेंगे।

कहा जा सकता है कि मोदी सरकार द्वारा पीएफ में नये नियमों का लागू करने के बाद एक तो इससे कर्मचारियों की Take Home Salary में वृद्धि होगी; वहीं नौकर, ड्राइवर और स्वरोज़गार करने वालों के भी पीएफ अकाउंट खुल सकेंगे जिससे भविष्य में ज़रूरत पड़ने वाले पीएफ की रक़म उनके काम आ सकेगी।