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...तो क्या WHO की लापरवाही से पूरी दुनिया में फैला कोरोना वायरस संक्रमण?

15 Apr 2020

कोरोना वायरस संकट में चीन की ग़लतियों पर पर्दा डालता रहा WHO 

APRIL15 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण महामारी से पूरी दुनिया परेशान है। चीन के वुहान शहर से उपजा और फैला कोरोना वायरस संक्रमण 200 से ज़्यादा देशों के नागरिकों को संक्रमित कर चुका है। इस लेख को लिखे जाने तक, कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक पूरी दुनिया में 1,27,595 लोगों की मौत हो चुकी है। लेकिन इस सबके बीच, कोरोना वायरस संकट के लिए दुनिया के कई देश WHO (World Health Organization) यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन को काफ़ी हद तक ज़िम्मेदार मान रहे हैं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दुनियां के ज़्यादातर देशों का मानना है कि WHO ने कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की संक्रामकता को लेकर लापरवाही दिखाई और इसके बारे में देर से आगाह किया। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इससे पहले साल 2002-03 में जब SARS की बीमारी फैली थी तब उस दौरान WHO ने तुरंत ही ट्रैवल रेस्ट्रिक्शन और गाइडलाइन जारी की थी और साथ ही चीन को इस बात के लिए लताड़ा भी था कि उसने बीमारी की जानकारी जल्दी नहीं दी और सार्स फैलने लगा।

SARS के बाद WHO ने चेतावनी भी दी थी कि कोरोना वायरस का क़हर दोबारा लौटकर आ सकता है। तब WHO के तत्कालीन डायरेक्टर जनरल Dr Gro Harlem Brundtland ने चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि चीन के पशु बाज़ारों से किसी न किसी किस्म का वायरल संक्रमण हो सकता है, और इसलिए यहां पर नज़र रखी जानी चाहिए।

लेकिन अब जबकि विज्ञान ने काफ़ी प्रगति कर ली है, और पहले की तुलना में संचार साधन भी उन्नत हो गए हैं। तब भी WHO द्वारा सही समय पर कोरोना वायरस संक्रमण के बारे में दुनिया के अन्य देशों को समय पर चेतावनी जारी न करना उसकी भूमिका को संदिग्धहास्पद बनाता है। WHO पर लगातार आरोप लग रहे हैं कि उसने अपनी भूमिका समय पर नहीं निभाई।

वैसे WHO का कहना है कि चीन के वुहान शहर में कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के बाद उसने लगातार हेल्थ अपडेट लिए और जारी किए। वो रोज़ इसे जांचता था कि वायरस कितना संक्रामक है और कितनी तेज़ी से फैल सकता है और इसे लेकर तमाम देशों की सरकारों को गाइडलाइन भी दी जा रही थी। लेकिन इस दौरान कई हफ्तों तक WHO इस बात को नकारता रहा कि ये वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है, जबकि चीन के पड़ोसी देश ताइवान ने शुरुआत में ही बता दिया था कि कोरोना वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल रहा है। ताइवान का आरोप है कि चूंकि वो WHO का सदस्य देश नहीं है, इसलिए संगठन ने उसकी बात को गंभीरता से नहीं लिया और चीन पर ही पूरी तरह से भरोसा किया।

आरोप है कि कोरोना वायरस के मामले में WHO लगातार चीन का साथ देता रहा और संक्रमण की सच्चाई को पूरी दुनिया से छिपाता रहा। 17 फरवरी को WHO ने बताया कि कोरोना वायरस का क़हर कम होने लगा है और ज़्यादातर मामले चीन के वुहान में ही हैं, तो ऐसे में घबराने की ज़रूरत नहीं है। यहां तक कि कुछ ही दिनों बाद WHO के डायरेक्टर जनरल Tedros Adhanom Ghebreyesus ने कहा था कि हमें नहीं लग रहा है कि वायरस दुनिया में फैलेगा या मौतें होंगी। WHO के डायरेक्टर जनरल यह बात तब कह रहे थे जबकि चीन में ही कोरोना वायरस संक्रमण के 75 हज़ार से ज़्यादा मरीज़ हो चुके थे और संक्रमण कई दूसरे देशों में भी फैलने लगा था।

इतना ही नहीं, 29 फरवरी को WHO ने देशों को हवाई यात्राएं न रोकने की सलाह देते हुए कहा था कि पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी के ज़्यादातर हालातों में भी यात्रा पर प्रतिबंध लगाने से कोई फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि सीमाएं सील करने पर देश एक-दूसरे को मेडिकल मदद नहीं दे पाएंगे। माना जा रहा है कि अपनी सीमाएं बंद नहीं करने से ही इटली में दुनियाभर के सैलानी पहुंचते रहे और वहां हालात इतने बिगड़ गए।

इधर, वुहान में हुए लॉकडाउन के पूरे 48 दिनों के बाद WHO ने कहा कि सभी देशों को कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए और हालात को क़ाबू में रखने के लिए आपातकालीन तरीक़े आजमाने की ज़रूरत है। वहीं काफ़ी समय निकल जाने के बाद 11 मार्च को आखिरकार WHO ने कोरोना वायरस संक्रमण को महामारी घोषित किया, लेकिन तब तक इस वायरस का संक्रमण काफ़ी देशों में फैल चुका था। इन्ही सब कारणों से साफ़ ज़ाहिर है कि कोरोना वायरस संक्रमण पर अभी तक की WHO की कार्यप्रणाली संदेहास्पद रही है।