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WHO ने जारी की चेतावनी; ठीक होने के बाद फिर से संक्रमित हो सकते हैं कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हुए मरीज़

29 Apr 2020

इम्यूनिटी पासपोर्ट या सर्टिफिकेट ना जारी करने की WHO ने दुनिया भर के देशों को दी सलाह

APRIL 29 (WTN) - चीन के वुहान शहर से उपजी और फैली कोरोना वायरस संक्रमण की बीमारी 200 से ज़्यादा देशों के लाखों नागरिकों को संक्रमित कर चुकी है। इस लेख को लिखे जाते वक़्त तक, कोरोना वायरस संक्रमण से अभी तक पूरी दुनिया में क़रीब 2,18,000 लोगों की मौत हो चुकी है। चीन की वामपंथी सरकार की ग़लती, लापरवाही और ग़ैर ज़िम्मेदारी के कारण इस समय मानव सभ्यता एक वायरस के ख़िलाफ़ अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है।

जैसा कि आप जानते ही हैं कि अभी तक कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी की कोई भी प्रामाणिक दवा ईज़ाद नहीं हो सकी है। ऐसे में चिकित्सक अपने स्तर पर ही कोरोना वायरस संक्रमण के मरीज़ों को ठीक कर रहे हैं। हालांकि, कोरोना वायरस से संक्रमित होने के बाद काफ़ी तादात में मरीज़ ठीक भी हो रहे हैं। वहीं, जो लोग कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से ठीक हो चुके हैं, उनके बारे में अब यह माना जा रहा है कि जो लोग अब ठीक हो चुके हैं, उनमें कोरोना वायरस के खिलाफ एंटीबॉडी (Antibody) बन गई है, और उन लोगों को अब फिर से कोरोना वायरस संक्रमण नहीं होगा।

लेकिन अब WHO (World Health Organization) यानी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से ठीक हो चुके मरीज़ों में एंटीबॉडीज़ बन जाने के कारण एक बार फिर से संक्रमित नहीं होने का कोई सबूत नहीं मिला है। WHO का कहना है कि जो लोग कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से ठीक हो चुके हैं, उनके कुछ समय बाद फिर से बीमार होने की ख़बरें सामने आ रही हैं। इसी को देखते हुए WHO ने चेतावनी जारी की है कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से संक्रमित व्‍यक्ति ठीक हो जाने के बाद भी कई बार कोरोना वायरस की चपेट में आ सकता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संक्रमण के बारे में WHO का कहना है कि SARS (Severe Acute Respiratory Syndrome) के मरीज़ों के ठीक होने के बाद फिर से बीमार होने के कई मामले सामने आए थे। WHO के मुताबिक़ SARS के मरीजों के शरीर में एंटीबॉडी तो बनी, लेकिन कुछ समय के बाद यह बेअसर हो गई। ऐसे में अभी इस बात की जानकारी नहीं है कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी (COVID-19) से ठीक हुए मरीज़ों को दोबारा संक्रमण नहीं होगा।

इस सबके बीच, WHO कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी पर एंटीबॉडी की प्रतिक्रिया के सबूतों की समीक्षा कर रहा है। वैसे कई अध्ययनों में यह दावा किया गया है कि कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में वायरस के प्रति एंटीबॉडी विकसित हो गई है। इस बारे में WHO का कहना है कि उनमें से कुछ लोगों के खून में निष्क्रिय करने वाली एंटीबॉडी का स्तर बहुत कम है। यानी कि WHO को डर है कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से ठीक हुए मरीज़ों में फिर से कोरोना वायरस संक्रमण होने की आशंका है।

ऐसे में अब WHO ने दुनिया भर के देशों की सरकारों को सलाह दी है कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से ठीक हो चुके लोगों को इम्‍यूनिटी पासपोर्ट (Immunity Passports) का सर्टिफिकेट जारी करने में किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए। आपकी जानकरी के लिए बता दें कि कुछ देशों की सरकारों ने कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से ठीक हो चुके लोगों को इम्‍यूनिटी पासपोर्ट या सर्टिफिकेटइस जारी किया है, जिससे यह लोग नौकरी का अन्य कारणों से यात्रा कर पाएं।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस बारे में दक्षिण अमेरिकी देश चिली की सरकार का कहना है कि वह कोरोना वायरस संक्रमण से उबर चुके लोगों को हेल्थ पासपोर्ट देना शुरू करेगी, जिससे वे लोग काम पर लौट सकेंगे। वहीं, ब्रिटेन के हेल्‍थ सेक्रेटरी का कहना है कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से ठीक हो चुके लोग अब वायरस के लिए काफी हद तक इम्यून हो चुके होंगे। ऐसे में उन लोगों के लिए इम्युनिटी सर्टिफिकेट जारी किया जाना चाहिए।

दरअसल, कई देशों की सरकारों का मानना है कि इम्‍यूनिटी पासपोर्ट या सर्टिफिकेट से इस बात का पता चल सकेगा कि कोरोना वायरस संक्रमण बीमारी से ठीक हो चुके मरीज़ में कोरोना वायरस संक्रमण का कोई ख़तरा नहीं है। वहीं, इस पासपोर्ट या सर्टिफिकेट से संबंधित व्यक्ति को बाहर घूमने या काम करने की अनुमति मिल सकती है। लेकिन अब देखना होगा कि WHO की सलाह पर दुनिया भर के देशों की क्या प्रतिक्रिया रहती है। और क्या वे कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक हो चुके मरीज़ों को इम्यूनिटी पासपोर्ट या सर्टिफिकेट जारी करते हैं या नहीं?