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जानिए WHO के मुद्दे पर अपने ही राष्ट्रपति के फैसले से क्यों नाराज़ हैं अमेरिकी?

01 Jun 2020

अमेरिका के WHO से अलग होने के फैसले का अमेरिका में विरोध शुरू

JUNE 01 (WTN) - कोरोना वायरस संक्रमण फैलने के मामले में WHO (World Health Organization) पर चीन के साथ मिलीभगत का आरोप लगाने के बाद अमेरिका ने अब WHO से नाता तोड़ने का फैसला ले लिया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कोरोना वायरस संक्रमण के मामले में WHO पर काफ़ी गंभीर आरोप लगाते आए हैं। जिसके बाद ट्रम्प प्रशासन ने WHO से नाता तोड़ने का फैसला लिया है।

लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उनके प्रशासन की इस फैसले पर अब आलोचना होने लगी है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अमेरिका में चिकित्सकों का प्रतिनिधित्व करने वाले समूहों ने राष्ट्रपति ट्रम्प के फैसले का विरोध करना शुरू कर दिया है। ट्रम्प प्रशासन के फैसले पर चिकित्सकों के समूह का कहना है कि ऐसा करने से कोरोना वायरस संक्रमण के ख़िलाफ़ जारी जंग और भी ज्यादा मुश्किल होगी।

इधर, अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स का कहना है कि  ट्रम्प प्रशासन के ऐसे फैसले से बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरा साबित हो सकता है। उनका मानना है कि कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के इस दौर में अमेरिका का WHO से नाता तोड़ने का फैसला मासूम बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़ है।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स का कहना है कि WHO से यदि अमेरिका रिश्ता खत्म करता है, तो इससे अमेरिका में पोलियो का खतरा भी बढ़ सकता है। इतना ही नहीं, WHO से नाता तोड़ने पर अमेरिका में मलेरिया से होने वाली मौतों में वृद्धि भी हो सकती है।

इधर, अमेरिका के कई लोगों का मानना है कि WHO से समर्थन वापस लेने से अमेरिका की न केवल COVID-19 के खिलाफ वैश्विक तैयारियों को नुकसान होगा, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी लापरवाही के बढ़ने से बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा असर भी पड़ सकता है। कई अमेरिकी लोगों का मानना है कि ट्रम्प प्रशासन को WHO के साथ काम करना जारी रखना चाहिए।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि WHO को सबसे ज्यादा फंड अमेरिका ही देता रहा है। पिछले कुछ दशकों से अमेरिका WHO को हर साल क़रीब 800 करोड़ रुपए से ज्यादा की आर्थिक मदद करता आ रहा है।

लेकिन कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के मामले में डोनाल्ड ट्रम्प WHO से नाराज़ बताए जाते हैं। कुछ दिनों पहले डोनाल्ड ट्रम्प ने WHO को चेतावनी देते हुए अमेरिका से मिलने वाली आर्थिक सहायता पर रोक लगाने की बात कही थी। जिसके बाद अब UN स्वास्थ्य शाखा WHO से अमेरिका ने पारंपरिक नेतृत्व की भूमिका को समाप्त कर दिया है।

अब अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन भी ट्रंप प्रशासन के WHO पर लिए गए फैसले के विरोध में आ गया है। एसोसिएशन का कहना है कि ट्रम्प प्रशासन द्वारा की गई ऐसी तर्कहीन कार्रवाई के नतीजे भयानक हो सकते हैं। क्योंकि इस समय WHO के नेतृत्व में कोरोना वायरस की वैक्सीन को लेकर बड़े पैमाने पर ट्रायल का काम चल रहा है। अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से आग्रह किया कि कोरोना वायरस से जंग के बीच अमेरिका को अपनी लीडरशिप पोजिशन का त्याग नहीं करना चाहिए।

अमेरिकी जनता का मानना है कि WHO को बनाने में अमेरिका का बड़ा योगदान रहा है। यदि अमेरिका WHO को इस तरह से छोड़कर जाएगा, तो पूरी दुनिया कमजोर और असुरक्षित महसूस करने लगेगी। यदि WHO से अमेरिका अलग होता है, तो चीन समेत दुनिया के कई दूसरे देशों के पास WHO की वीटो पावर होगी, और ऐसा होने से अमेरिका और भी ज़्यादा असुरक्षित हो जाएगा।