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मध्य प्रदेश की राजनीति में ‘पैर पसारने’ की कोशिश में जेडीयू

05 Jul 2018
मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जेडीयू

JULY 05 (WTN) - जैसा कि आप जानते हैं कि बिहार में भाजपा और जनता दल यूनाइटेड दोनों ही पार्टियों में लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के बंटवारे पर ‘मतभेद’ की खबरें सामने आ रही हैँ। एनडीए गठबंधन में रहते हुए जेडीयू, बिहार की 40 में से 25 सीटों पर खुद चुनाव लड़ना चाहती है और बाकी बची 15 सीटें भाजपा और बाकी सहयोगियों को देना चाहती है। बिहार में भाजपा और जेडीयू ‘गठबंधन में दरार’ की खबरों के बीच, मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए जनता दल यूनाइटेड ने ऐलान कर दिया है कि वह मध्य प्रदेश विधानसभा की सभी 230 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

राजनीतिक रुप से जेडीयू का मध्य प्रदेश की राजनीति में अभी कोई ‘जनाधार’ नहीं है, लेकिन मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक पार्टी मध्य प्रदेश की सभी 230 सीटों पर अपना प्रत्याशी उतारेगी, जिसमें से 80 प्रतिशत टिकट युवाओं को देने की बात पार्टी कर रही है।

मध्य प्रदेश में अपनी ‘पैठ’ बनाने की कोशिश कर रही जेडीयू की ‘नजरें’ बुंदेलखंड, महाकौशल और आदिवासी क्षेत्रों पर ज्यादा है। पार्टी का मानना है कि यह समाजवादियों की ‘पुरानी कर्मभूमि’ रही है ऐसे में जेडीयू अपने संगठन को ‘मजबूत’ करते हुए मध्य प्रदेश की सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेगी।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दिल्ली में 7-8 जुलाई को जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक होने जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कुछ फैसले लिये जा सकते हैं।

इतना ही नहीं जानकारी के मुताबिक, जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार इसी महीने मध्य प्रदेश के दौरे पर आ सकते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार के जबलपुर, भोपाल और रीवा संभाग में सम्मेलन आयोजित किये जाएंगे।

बिहार में भाजपा और जेडीयू दोनों के बीच सीटों को लेकर जिस तरह से ‘मतभेद’ सामने आ रहे हैं उससे लगता है कि मध्य प्रदेश विधानसभा में अपने प्रत्याशी खड़े करके जेडीयू भाजपा को ‘संदेश’ देना चाहती है कि बिहार ही नहीं अन्य राज्यों में भी वो भाजपा को ‘टक्कर’ देगी। लेकिन बिहार की राजनीति और मध्य प्रदेश की राजनीति में काफी अंतर है।

मध्यप्रदेश में सालों से भाजपा और कांग्रेस इन दोनों ही पार्टियों का वर्चस्व रहा है। काफी समय से मध्य प्रदेश की राजनीति में ‘पैर जमाने’ की कोशिश कर रही बसपा और सपा जैसी पार्टियां भी दो से तीन सीटें जीतने में कभी-कभी ही सफल रही हैं। ऐसे में जेडीयू का मध्य प्रदेश में चुनाव लड़ना बस ‘खानापूर्ति’ ही लग रहा है।