कष्टों का होगा नाश, यदि राशि अनुसार करेंगे ‘चालीसा’ का पाठ
JULY 11 (WTN) - ज्योतिष शास्त्र में राशि के अनुसार किए गए उपायों को शीघ्र लाभ देने वाला माना गया है। ईश्वर की पूजा हर व्यक्ति की श्रद्धा और भक्ति पर निर्भर है, लेकिन मान्यता है कि यदि ‘ग्रहीय स्थितियों’ के अनुसार अगर कोई अपनी राशि के अनुसार भगवान की पूजा और उनसे जुड़े मन्त्रों का जाप करता है, तो इससे उसके ‘कष्टों का नाश’ होता है।
शास्त्रों में लिखा गया है कि मंत्रों का ‘सही’ प्रकार से जाप और उच्चारण करना चाहिए, नहीं तो इससे लाभ की जगह हानि भी हो सकती है। यदि आप मंत्रों का सही तरह से जाप और उच्चारण करने में सक्षम नहीं हैं, तो ऐसे में आप अपनी राशि के अनुसार ‘चालीसा’ का पाठ भी कर सकते हैं जिससे आपके कष्ट दूर हों, और आपके जीवन में सुख समृद्धि आए।
हम आपको बताते हैं कि राशि के अनुसार कौन सी ‘चालीसा’ का पाठ करना चाहिए, जिससे लाभ मिले। आज हम आपको बताते हैं कि मेष, वृषभ और मिथुन राशि के जातकों को कौन सी चालीसा का पाठ करना चाहिए।
मेष
ज्योतिष के अनुसार मान्यता है कि मेष राशि के लोग बहुत ‘चंचल’ होते हैं। चंचल स्वभाव के कारण मेष राशि के लोगों को कई बार परेशानियां का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मेष राशि के जातकों को हनुमान जी की पूजा, और इसके साथ ही ‘हनुमान चालीसा’ का पाठ करना लाभदायक होता है। ‘हनुमान चालीसा’ पढ़ने से पहले हनुमान जी को ‘लाल पुष्प’ अर्पित करना चाहिए।
वृषभ
मान्यता है कि वृषभ राशि के जातक काफी ‘जिद्दी स्वभाव’ के होते हैं। जिद्दी स्वभाव वृषभ राशि के जातकों के लिए कई बार लाभकारी तो कई बार हानिकारक होता है। ज्योतिष शास्त्र में मान्यता है कि वृषभ राशि के जातकों को देवाधिदेव महादेव शिव शंकर की पूजा और ‘शिव चालीसा’ का पाठ करना चाहिए। भगवान शिव की पूजा और चालीसा पाठ के समय ‘सफेद चंदन’ का प्रयोग लाभदायक रहता है।
मिथुन
मिथुन राशि के जातकों में काफी ‘व्याकुलता और भ्रम’ रहता है जिसके कारण इन्हें कई बार काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र में मान्यता है कि मिथुन राशि के जातकों को देवी सरस्वती की पूजा करने के साथ ही ‘सरस्वती चालीसा’ का पाठ करना चाहिए। सरस्वती चालीसा का पाठ करने से पहले ‘गुग्गुल’ और ‘धूप’ से विधि पूर्वक मां सरस्वती की पूजा और ध्यान अवश्य करना चाहिए।
आगे हम आपको बताएंगे आगे कि कर्क, सिंह और कन्या राशि के जातकों को कौन सी ‘चालीसा’ का पाठ करना चाहिए।