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मध्य प्रदेश में कांग्रेस करेगी बसपा के साथ ‘गठबंधन’, भाजपा विरोधी वोटों को एकजुट करने ‘रणनीति’

14 Jul 2018
मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के लिए बसपा के साथ कांग्रेस की ‘रणनीति’

JULY 14 (WTN) - मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए बस कुछ ही महीने बचे हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने अपनी-अपनी रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। भाजपा की इन तीनों ही राज्यों में सरकार है और यहां पर भाजपा ‘अपने दम’ पर ही चुनाव लड़ेगी इस पर किसी को ‘संदेह’ नहीं है।

लेकिन बुरे दौर से गुजर रही कांग्रेस इन तीनों ही राज्यों में फूंक फूंक कर कदम रखने की ‘रणनीति’ अपना रही है। लगातार विधानसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस अब ‘गठबंधन की राजनीति’ पर निकल पड़ी है। कर्नाटक में भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस ने जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाई है। माना जा रहा है कि मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ‘चुनाव पूर्व गठबंधन’ के तैयारी में है।

इन तीनों ही राज्यों में बसपा या फिर अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन करें या नहीं, इस पर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने इन तीनों राज्यों के प्रभारियों के साथ बैठक कर विचार विमर्श किया। मध्य प्रदेश के प्रभारी दीपक बाबरिया, राजस्थान के प्रभारी अविनाश पाण्डे और छत्तीसगढ़ के प्रभारी पीएल पुनिया से राहुल गांधी ने दिल्ली में मुलाकात की।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने बसपा के साथ गठबंधन कर लिया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी दीपक बावरिया के मुताबिक, “मध्य प्रदेश में बसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ने को लेकर चल रही बातचीत संतोषजनक तरीके से आगे बढ़ रही है। सीटों के बंटवारे का फॉर्मूला गोपनीय है जिस पर मीडिया के सामने कुछ नहीं कहा जाएगा।“

माना जा रहा है कि कांग्रेस का यह कदम उसकी एक ‘महत्वपूर्ण रणनीति’ के तहत है। भाजपा विरोधी वोटों को एकजुट रखने के लिए कांग्रेस ने बसपा के साथ गठबंधन करने का फैसला किया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2013 के विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में बसपा ने चार सीटों पर जीत हासिल की थी, और करीब एक दर्जन सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी। यही कारण है कि कांग्रेस ने बसपा की ताकत को कम नहीं आंका और उससे गठबंधन करने में ही ‘समझदारी’ दिखाई।

वहीं राजस्थान में कांग्रेस के नेता किसी भी पार्टी से गठबंधन के मूड़ में नहीं दिख रहे हैं। राजस्थान कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन पायलट के मुताबिक राजस्थान में कांग्रेस भाजपा को हराने में सक्षम है।

बात करें छत्तीसगढ़ की तो यहां पर पिछले दिनों कांग्रेस से बगावत कर अलग पार्टी बनाने वाले छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ मुलाकात की थी। 2013 के विधानसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ में बसपा एक ही सीट जीत पाई थी, जबकि दो सीटों पर दूसरे नम्बर पर रही थी। माना जा रहा है कि कांग्रेस छत्तीसगढ़ में किसी भी कीमत पर बसपा को अपने साथ रखना चाहती है।