सीटें ‘सीमित’, लेकिन मध्य प्रदेश कांग्रेस में टिकट के दावेदार ‘ज़्यादा’
JULY 16 (WTN) – मध्य प्रदेश में 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस इस बार भाजपा को 'मात' देने के लिए कोई भी ‘कसर’ नहीं छोड़ना चाहती है। भाजपा के ‘विजय रथ’ को रोकने के लिए कांग्रेस ने बसपा से 'गठबंधन' करने का फ़ैसला लिया है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बसपा को 230 में से ‘26’ सीटें गठबंधन के तहत दे सकती है।
यदि कांग्रेस बसपा को 26 सीटें गठबंधन के चलते दे देती है, तो बाकी बचीं 204 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस के पास टिकट 'मांगने' वालों की कमी नहीं है। जानकारी के मुताबिक कांग्रेस से जुड़ी महिलाओं, युवाओं और किसानों ने कांग्रेस पार्टी से 'काफ़ी तादात' में टिकट की मांग की है। माना जा रहा है कि क़रीब 180 सीटों पर कांग्रेस के ‘अनुषांगिक संगठनों’ ने चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मधुसूदन मिस्त्री की अध्यक्षता में बनी छानबीन समिति ने 13 और 14 जुलाई को भोपाल में कई कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की थी। जानकारी के मुताबिक, इनमें युवक कांग्रेस के कुणाल चौधरी, महिला कांग्रेस की माण्डवी चौहान, खेत मज़दूर किसान कांग्रेस के दिनेश गुर्जर और कांग्रेस सेवादल के योगेश यादव ने अपने-अपने संगठनों के लिए टिकट के लिए दावे पेश किए हैँ।
इस बार महिला कांग्रेस की सदस्यों ने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए 'ज़ोर' लगाया है। चुनाव लड़ने के लिए इच्छुक सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से महिला कांग्रेस ने बायोडाटा मंगाए हैं। माना जा रहा है कि हर ज़िले से कम से कम 'एक प्रत्याशी' के लिए टिकट की मांग महिला कांग्रेस कर सकती है।
वहीं युवक कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी विधानसभा चुनाव के लिए टिकट की मांग की है। जानकारी के मुताबिक युवक कांग्रेस में दस सालों से जुड़े नेताओं को विधानसभा चुनाव में मौका देने की मांग युवक कांग्रेस कर सकती है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, करीब 100 सीटों पर युवक कांग्रेस ने अपनी दावेदारी जताई है।
वहीं, कांग्रेस सेवादल ने भी प्रदेश के हर सम्भाग से एक-एक प्रत्याशी को टिकट देने की गुहार पार्टी आलाकमान से लगाई है। वहीं किसान कांग्रेस के नेता भी चुनाव लड़ने के मूड़ में हैं। माना जा रहा है कि ग्रामीण जनसंख्या वाले ज़िलों की कम से कम एक सीट पर किसान कांग्रेस टिकट की मांग कर सकती है।
2013 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के जो प्रत्याशी जीते थे उन्हें टिकट मिलना 'लगभग पक्का' है। ऐसे में महिला कांग्रेस, युवक कांग्रेस, कांग्रेस सेवादल और किसान कांग्रेस ने जिस तादात में टिकटों की मांगे हैं, उससे तो लगता नहीं है कि टिकट वितरण में सभी को 'खुश' रखने का काम आलाकमान कर पाएगा। बसपा के साथ गठबंधन के बाद माना जा रहा है कि कांग्रेस में टिकट वितरण के लिए 'घमासान' हो सकता है और 'भीतरघात' और 'विद्रोह' भी देखने को मिल सकता है।