एसबीआई के ‘एक आदेश’ से मचा कर्मचारियों में ‘हड़कम्प’
JULY 17 (WTN) – भारत की सबसे बड़ी बैंक एसबीआई के करीब 70,000 कर्मचारी आश्चर्यचकित हैं और सकते में हैं कि क्या ऐसा आदेश भी कोई बैंक मैनेजमेन्ट दे सकता है। मामला बड़ा दिलचस्प है, यदि आप सुनेंगे तो आपकी हंसी भी आएगी, दुख भी होगा और गुस्सा भी आएगा। चलिये पूरा मामला क्या है हम आपको विस्तार से बताते हैं।
नोटबन्दी तो आप सभी को याद ही होगी। नोटबन्दी के दौरान देश के बैंकों के कर्मचारियों ने दिन-रात काफ़ी मेहनत से काम किया था जिसकी तारीफ़ खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी की थी। बात करें एसबीआई की तो एसबीआई ने नोटबन्दी के समय ओवरटाइम करने करने वाले अपने कर्मचारियों को ओवरटाइम का अतिरिक्त पैसा देने का ऐलान किया था।
इसी बीच एक अप्रैल 2017 को स्टेट बैंक की पांच सहयोगी बैंकों, स्टेट बैंक ऑफ़ पटियाला, स्टेट बैंक ऑफ़ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ़ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ़ त्रावणकोर और स्टेट बैंक ऑफ़ बीकानेर और जयपुर का एसबीआई में विलय हो गया। इन बैंकों के कर्मचारियों ने भी नोटबन्दी के दौरान ओवरटाइम किया था तो इस कारण इन्हें भी ओवरटाइम करने का अतिरिक्त पैसा मिला।
यहां तक तो सब ठीक है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक मामले ने तब नया मोड़ ले लिया जब एसबीआई ने एसबीआई में विलय हुए इन पांच बैंकों के करीब 70,000 कर्मचारियों से नोटबन्दी के दौरान किये गये ओवरटाइम के लिए मिले अतिरिक्त पैसों को मांग लिया। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, एसबीआई ने इस बारे में सभी ज़ोनल हेडक्वार्टर को पत्र में लिखा है कि ओवरटाइम का रुपया सिर्फ एसबीआई के कर्मचारियों के लिए था ना कि विलय किए गए सहयोगी पांच बैंकों के कर्मचारियों के लिए।
इतना ही नहीं, मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक एसबीआई ने कहा है कि विलय हुए पांच बैंकों के कर्मचारियों को ओवरटाइम की दी गई रकम वसूली जाए। एसबीआई ने साफ़ कर दिया है कि इन कर्मचारियों को ओवरटाइम का पैसा देने की ज़िम्मेदारी एसबीआई की नहीं है बल्कि उस समय विलय नहीं हुए पांच बैंकों की है।
जानकारी के मुताबिक एसबीआई अब इस मामले की जांच कर रहा है कि विलय हुए पांच सहयोगी बैंकों के कर्मचारियों को नोटबन्दी के समय ओवरटाइम का पैसा देने की मन्जूरी कैसे दी गई। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नोटबन्दी के दौरान 16 नवम्बर से 30 दिसम्बर तक बैंकों के हज़ारों कर्मचारियों ने ओवरटाइम किया था। इसके बदले में एक साल बाद इन्हें ओवरटाइम के रूप में करीब 30 हज़ार रुपये तक मिले थे।
एसबीआई के इस आदेश का विरोध होना शुरू हो गया है। बैंक यूनियनों ने पैसों की रिकवरी के आदेश का विरोध करते हुए इस आदेश को वापस लेने की मांग की है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक इस मामले में एसबीआई की तरफ से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई है।