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मोदी सरकार के ‘मास्टर प्लान’ से महंगाई पर लगेगा नियंत्रण !

18 Jul 2018
केन्द्र सरकार ने वाहनों की ढुलाई क्षमता 20 से 25 प्रतिशत बढ़ाने की दी अनुमति

JULY 18 (WTN) – आने वाले समय में भारत में भारी वाहनों और ट्रकों के जरिये होने वाली परिवहन लागत कम हो सकती है। यदि ऐसा रहा तो इनके जरिये जिन सामानों की ढुलाई होती है उनकी ढुलाई की लागत भी कम होगी और महंगाई पर नियंत्रण होगा। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि केन्द्र की मोदी सरकार ने भारी वाहनों और ट्रकों की माल ढुलाई की क्षमता को 20 से 25 प्रतिशत बढ़ा दिया है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि विदेशों के मुकाबले भारत में लॉजिस्टिक कॉस्ट बहुत ज्यादा है। विकसित देशों में जहां यह 8 प्रतिशत है वहीं भारत में यह 13 से 14 प्रतिशत तक है। माना जा रहा है कि सरकार के नए नियम से लॉजिस्टिक कॉस्ट में करीब दो प्रतिशत की कमी आएगी।

मोदी सरकार ने अब भारी वाहनों और ट्रकों की माल ढुलाई क्षमता को वैश्विक मानकों के मुताबिक कर दिया है। माना जा रहा है कि ऐसा करने से लॉजिस्टिक लागत कम होगी। इतना ही नहीं केन्द्र सररकार ने फैसला लिया है कि ट्रकों का सालाना फिटनेस प्रमाणपत्र भी नहीं लेना होगा। अब ट्रकों का एक साल की जगह दो साल में फिटनेस सर्टिफिकेट लेना होगा।

बात करें एक्सेल लोड नियम की तो इसमें पिछली बार साल 1983 में संशोधन किया गया था। अब 35 सालों बाद इस नियम में संशोधन किया गया है। माना जा रहा कि देश में सड़कों की क्वालिटी और वाहनों की क्षमता में काफी इजाफा हुआ है जिसके कारण वाहनों की लोडिंग क्षमता को बढ़ाना तर्कतंगत है। 

सरकार के इस नए नियम के बाद से 16 टन के वाहन 19 टन तक वजन ले जा सकेंगे। वहीं, 25 टन के वाहन 28.5 टन तक और 37 टन वजन ले जाने वाले वाहन 42 टन तक वजन ले जा सकेंगे। माना जा रहा है कि सरकार के इस फैसले से भ्रष्ट्राचार रोकने में मदद मिलेगी।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक केन्द्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का कहना है कि भारत को अपने एक्सेल लोड को इंटरनेशनल मानकों के हिसाब से करने की जरुरत है। यदि ऐसा किया जाता है तो इससे वाहनों की वजन ढोने की क्षमता 20 से 25 प्रतिशत बढ़ जाएगी और लोडिंग कॉस्ट कम होगी। जानकारी के मुताबिक राज्यों को इस फैसले को लागू करने की एडवाइजरी जारी की जाएगी। इन नियमों को तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।