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मध्य प्रदेश में अब उत्तर प्रदेश की राजनीति !

18 Jul 2018
कमलनाथ और अखिलेश यादव की मुलाकात पर सभी की नज़रें
  
JULY 18 (WTN) – यूपी में 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। वो बात अलग है कि दोनों के गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन यूपी में गोरखपुर, फूलपुर और कैराना में विपक्ष के साझा उम्मीदवार ने भाजपा के प्रत्याशी को लोकसभा उपचुनाव में हराया था, जिसके बाद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बसपा को भाजपा को हराने के लिए फार्मूला मिल गया कि साथ रहो और भाजपा विरोधी वोटों का एक रखो।

मध्य प्रदेश में पिछले 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस इस बार भाजपा को हराने के लिए कोई भी कसर छोड़ना नहीं चाहती है। जैसा कि आप जानते हैं कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के लिए बसपा से गठबंधन किया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक केन्द्रीय स्तर पर चर्चा हुई है कि बसपा के साथ मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए 26 सीटों पर गठबंधन किया जाए। लेकिन राज्य के नेताओं का मानना है कि बसपा को 14 से 16 सीटें ही देना काफी है।

बसपा से गठबंधन के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस समाजवादी पार्टी से भी हाथ मिला सकती है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ 19 जुलाई यानि कल समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से भोपाल में मुलाकात करने वाले हैं। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि कांग्रेस, बसपा के साथ-साथ समाजवादी पार्टी से भी राज्य में गठबंधन कर सकती है ताकि भाजपा विरोधी वोटों को एकजुट रखा जा सके।

मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग के करीब 52 प्रतिशत वोट हैं, और राज्य में यादव समाज के वोटर्स की तादात भी काफी ज्यादा है। ऐसे में बसपा के साथ गठबंधन करने से दलित वोट और समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन करने से पिछड़ा वर्ग के वोट को अपने पक्ष में करने की कवायद में कांग्रेस है।

बसपा की तरह समाजवादी पार्टी का जनाधार मध्य प्रदेश में नहीं हैं, लेकिन कई सीटों पर वोट काटने का काम समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी कर चुके हैं। ऐसे में कांग्रेस की पूरी कोशिश है कि समाजवादी पार्टी को भी गठबंधन में शामिल किया जाए जिससे भाजपा विरोधी वोटों का धुव्रीकरण होने से रोका जा सके।

बसपा के बाद समाजवादी पार्टी के साथ कांग्रेस के गठबंधन से भाजपा में चिंता बढ़ सकती है। क्योंकि यूपी में कांग्रेस, सपा और बसपा इन तीनों ही पार्टियों ने एक होकर गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा उपचुनाव में भाजपा को बुरी तरह से हराया था। यदि उत्तर प्रदेश की तरह मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस, सपा और बसपा साथ आते हैं, तो भाजपा को चुनाव जीतने के लिए मोदी-शाह के भरोसे रहना पड़ेगा।