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ममता बनर्जी का ‘नया दांव’!

28 Jul 2018
भाजपा को 2019 में रोकने के लिए ममता बनर्जी बना रहीं हैं ‘रणनीति’

JULY 28 (WTN) – 2014 के लोकसभा में बुरी तरह से हारा विपक्ष, अब 2019 के लोकसभा चुनाव में किसी भी हालत में नरेन्द्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए जुटा हुआ है। हाल में कुछ लोकसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में विपक्ष के साक्षा उम्मीदवार की जीत के बाद उत्साहित विपक्ष समझ गया है कि भाजपा और नरेन्द्र मोदी को यदि 2019 में रोकना है, तो भाजपा विरोधी वोटों का ध्रवीकरण रोकना होगा और मिलकर सामना करना होगा।

जहां तक गठबंधन की बात है तो विपक्षी दलों के बीच लगभग ‘सहमति’ है, लेकिन साक्षा विपक्ष का प्रधानमंत्री पद का चेहरा कौन होगा? इस पर पूरा मामला अड़ा हुआ है। अभी तक के घटनाक्रम में राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल सेक्यूलर राहुल गांधी के नाम पर सहमत हैं।

लेकिन इस बीच तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का कुछ और ही तर्क है। 2014 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल की 42 में से 34 सीटें तृणमूल कांग्रेस को जिताने वाले ममता बनर्जी का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री पद के तौर पर किसी का भी नाम नहीं चुना जाना चाहिए।

अपने तेजतर्रार स्वभाव के लिए पहचाने जाने वाली ममता बनर्जी भाजपा को ‘चुनौती’ देने के लिए ‘फ्रेडरल फ्रंट’ की रणनीति में जुटी हुईं हैं। इसी क्रम में ममता बनर्जी ने कोलकाता में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला से मुलाकात की। इसी दौरान ममता बनर्जी ने कहा कि अगले लोकसभा चुनावों के लिए संभावित विपक्षी मोर्चा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर किसी का भी नाम नहीं चुना जाना चाहिए।

ममता बनर्जी का मानना है कि यदि विपक्ष की तरफ से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित होता है, तो इससे क्षेत्रीय पार्टियों की ‘एकजुटता’ विभाजित होगी। ममता बनर्जी की ‘रणनीति’ है कि भाजपा विरोधी वोटों का ध्रुवीकरण नहीं होना चाहिए।

2019 के लोकसभा चुनाव के लिए ममता बनर्जी, भाजपा से मुकाबले के लिए ‘फेडरल फ्रंट’ बनाना चाहती हैं। ममता बनर्जी की ‘रणनीति’ है कि कांग्रेस विपक्षी दलों के गठबंधन में शामिल हो, न की विपक्षी दल कांग्रेस के नेतृत्व में चुनाव लड़ें। लेकिन वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस इसी कोशिश में है कि विपक्षी दलों को एकजुट कर 2019 लोकसभा का चुनाव लड़ा जाए।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस पार्टी के सूत्रों से जानकारी मिली है कि भाजपा को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए कोई भी ऐसा नेता प्रधानमंत्री पद के लिए स्वीकार है जिसे आरएसएस का समर्थन ना हो। माना जा रहा है कि कांग्रेस, ममता बनर्जी या मायावती को प्रधानमंत्री बनाने की रणनीति पर भी विचार कर रही है। लेकिन ममता बनर्जी का मानना है कि फ्रेडरल फ्रंट में कोई भी प्रधानमंत्री पद का चेहरा नहीं हो।