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हर कष्ट दूर करेगा विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ

01 Aug 2018
सुख-सम्पत्ति और धन-धान्य की नहीं होगी कमी, यदि नियमित करेंगे विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ

AUG 01 (WTN) – भगवान विष्णु को वेदों और पुराणों में संसार का पालनहार कहा गया है। हिन्दू धर्म में मान्यता है कि मानव जीवन से सम्बन्धित सभी उचित और अनुचित कर्मों का फल भगवान विष्णु देते हैं। त्रिदेवों में एक भगवान विष्णु की उपासना में विष्णु सहस्त्रनाम के पाठ का बहुत महत्व है। इस स्तोत्र में श्रीहरि के एक हज़ार नाम दिए गये हैँ।

वेदर्षि व्यास रचित महाभारत के ‘अनुशासन पर्व’ अध्याय में भगवान विष्णु के एक हज़ार नामों का उल्लेख है। महाभारत के अनुसार जब भीष्म पितामह बाणों की शैय्या पर लेटे अपनी इच्छा मृत्यु के लिए सही समय की प्रतीक्षा कर रहे थे, तब उन्होंने भगवान विष्णु के एक हज़ार नाम पाण्डवों के सबसे बड़े भाई युधिष्ठिर को बताए थे।

जिज्ञासावश जब युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से यह पूछा, “कौन ऐसा है,  जो सर्व व्याप्त है और सर्व शक्तिमान है?” तो भीष्म पितामह ने भगवान विष्णु के ये एक हज़ार नाम युधिष्ठिर को बताए थे। अपनी प्रतिज्ञा के लिए प्रसिद्ध भीष्म पितामह ने भगवान विष्णु के एक हज़ार नाम बताने के साथ ही युधिष्ठिर से कहा, “हर युग में मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इन एक हज़ार नामों को सुनना और पढ़ना सबसे श्रेयस्कर करेगा।“

मान्यता है कि विष्णु सहस्त्रनाम का नियमित पाठ करने से हर संकट से मुक्ति मिलती है। विष्णु सहस्रनाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह हिंदू धर्म के दो प्रमुख सम्प्रदायों, शैव और वैष्णव को जोड़ने का काम करता है। विष्णु सहस्त्रनाम मनुष्य को कर्म करने की प्रेरणा देता है, यानि की यह कर्म प्रधान है।

मान्यता है कि जो भी प्रतिदिन विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करता है, या फिर सुनता है, उसके जीवन में कष्टों का अंत होता है। विष्णु सहस्त्रनाम में प्रत्येक नाम के सौ से भी ज़्यादा अर्थ हैं। इसलिए यह एक बहुत शक्तिशाली और सिद्ध स्तोत्र है। आदि गुरू शंकराचार्य और पारसर भट्ट जैसे प्रसिद्ध आचार्यों ने इस पर भाष्य लिखे हैं।