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भाजपा को हराने विपक्षी पार्टियां हुईं ‘एक’

01 Aug 2018
मोदी को घेरने यूपी में बनेगा ‘महागठबंधन’!

AUG 01 (WTN) – 2014 के लोकसभा चुनाव में बुरी तरह से हारा विपक्ष, 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा को घेरने के लिए ‘रणनीति’ बनाने में जुटा हुआ है। सीटों के लिहाज़ से सबसे बड़े राज्य यूपी पर विपक्ष की नज़रें टिकी हुई हैं। गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा उपचुनाव में विपक्ष के साझा उम्मीदवार की जीत के बाद विपक्षी पार्टियों को समझ आ गया है कि अकेले ख़ुद के दम पर भाजपा को 2019 के लोकसभा चुनाव में हराना मुश्किल है।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, भाजपा विरोधी वोटों का ध्रुवीकरण रोकने के लिए विपक्ष ने एकजुट होकर यूपी में ‘महागठबंधन’ बनाने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है। कहा जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा, बसपा, कांग्रेस और आरएलडी मिलकर लोकसभा चुनाव में साझा उम्मीदवार खड़ा करने वाली हैं।

चार पर्टियों के इस सम्भावित महागठबंधन में सीटों के बंटवारों पर अभी फ़ैसला नहीं हुआ है। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, इस सम्भावित महागठबंधन में बसपा को सबसे ज्यादा 40 सीटें मिलने की बात कही जा रही है। जबकि समाजवादी पार्टी को 30 सीटें मिल सकती हैं, समाजवादी पार्टी के कोटे से ही आरएलडी को सीटें मिल सकती हैं। वहीं कभी यूपी में अपने दम पर आधे से ज़्यादा सीटें जीतने वाली कांग्रेस के हिस्से में सिर्फ़ 8 सीटें आने की बात कही जा रही है।

2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा या फ़िर कहें नरेन्द्र मोदी की आंधी के आगे यूपी में विपक्ष का सूपड़ा साफ़ हो गया था। भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में यूपी की 80 में से 71 सीटों पर जीत हासिल की थी, जबकि उसकी सहयोगी पार्टी अपना दल को दो सीटों पर जीत हासिल हुई थी। इस तरह 80 में से 73 सीटें जीतकर एनडीए ने पूरे विपक्ष को ‘साफ़’ कर दिया था। हालत ये थी कि 2014 के लोकसभा चुनाव में बसपा का यूपी में ख़ाता भी नहीं खुल पाया था।

यदि यह सम्भावित महागठबंधन बनता है, तो भाजपा के लिए काफ़ी ‘परेशानी’ खड़ी हो सकती है। 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी में भाजपा को 42.30 प्रतिशत वोट मिले थे और वो 71 सीटे जीतने में सफ़ल रही थी। वहीं समाजवादी पार्टी को 22.20 प्रतिशत वोट मिले थे और उसने 5 सीटों पर जीत हासिल की थी। बसपा को 19.60 प्रतिशत वोट मिले थे, लेकिन एक भी सीट जीतने में वो सफ़ल नहीं रही थी। वहीं बात करें कांग्रेस की तो उसे 7.50 प्रतिशत वोट मिले थे और सिर्फ़ दो ही सीटों पर जीत हासिल कर सकी थी। 

यदि इन तीनों पार्टियों के मत प्रतिशत को जोड़ा जाए तो कुल 49.30 प्रतिशत मत इन तीनों पार्टियों को पिछले लोकसभा चुनाव में मिले थे, जो कि भाजपा को मिले 42.30 प्रतिशत मतों से कहीं ज़्यादा है। यदि विपक्षी दलों का सम्भावित महागठबंधन बन गया, तो भाजपा विरोधी वोटों का ध्रुवीकरण रुक जाएगा जो कि भाजपा के लिए नुकसानदायक साबित होगा। अब देखना होगा कि इस सम्भावित महागठबंधन के ख़िलाफ़ क्या रणनीति मोदी-शाह की जोड़ी बनाती है।