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मध्य प्रदेश में लगातार चौथी बार विधानसभा चुनाव जीतने भाजपा का ‘नया’ बूथ मैनेजमेंट

13 Aug 2018
तीन श्रेणियों में बांटा बूथों को, ‘जातीय समीकरण’ पर पूरा ध्यान 

AUG 13 (WTN) – लगातार तीन विधानसभा चुनाव जीत चुकी भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश में लगातार चौथी बार विधानसभा चुनाव जीतने के लिए कोई भी कसर छोड़ना नहीं चाहती है। जीत के लिए भाजपा, बूथ से लेकर भोपाल तक की रणनीति बनाने में लगी हुई है। जैसा कि आप सभी जानते हैं कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ‘बूथ मैनेजमेंट’ पर काफी जोर देते हैं। इसी के चलते इस बार मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने प्रदेश के करीब 65 हज़ार बूथों पर अपनी नई रणनीति पर काम करने का फैसला लिया है।

मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, भाजपा ने मध्य प्रदेश के करीब 65 हजार पोलिंग बूथों को तीन भागों में बांटकर रणनीति बनाई है। अपनी रणनीति के लिए भाजपा ने बाकायदा पूरी जानकारी जुटाई है। 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव और 2014 के लोकसभा चुनाव के मतदान को ध्यान में रखते हुए पोलिंग बूथों को ए, बी और सी कैटेगरी में विभाजित किया गया है। जानकारी के मुताबिक, पोलिंग बूथों तो तीन भागों में बांटने की योजना का प्रयोग भाजपा मध्य प्रदेश में पहली बार कर रही है।

अपनी रणनीति के तहत भाजपा मध्य प्रदेश के 65 हज़ार बूथों पर सीधे लाभ देने वाली सरकारी योजनाओं के माध्यम से लोगों को जोड़ने की तैयारी कर रही है। कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया गया है कि सरकार कि जिन योजनाओं से लोगों को व्यक्तिगत लाभ मिला है, उन तक पहुंच कर उन्हें उसके फायदे गिनाए जाएं और भाजपा के पक्ष में जोड़ा जाए। कहा जा रहा है कि भाजपा के इस बूथ प्रबंधन में जातीय समीकरण पर काफी ध्यान दिया गया है। जिस बूथ पर जिस जाति-वर्ग के मतदाता हैं, उनका बूथ टोली में पर्याप्त प्रतिनिधित्व रखा गया है।

चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने बूथों को ए, बी और सी श्रेणी में बांटा है। ए क्षेणी के बूथ वे हैं जहां भाजपा 2008 और 2013 के विधानसभा चुनाव के साथ-साथ 2014 के लोकसभा चुनाव में भी जीती है। ऐसे बूथों के लिए भाजपा ने रणनीति बनाई है कि इन पर पूरा ध्यान देना है और इन्हें जीतने में कोई भी लापरवाही नहीं बरतना है।

अब बात करते हैं बी श्रेणी की बूथ की, तो ये वे बूथ हैं जहां पर भाजपा को कभी जीत को कभी हार मिली है। इन बूथों पर भाजपा की रणनीति है कि जीतने और हारने के कारणों का विश्लेषण किया जाए और कमजोरियों को दूर किया जाए।

अब तीसरे और सबसे आख़िरी श्रेणी के बूथ हैं सी श्रेणी की बूथ। यह ऐसे बूथ हैं जहां पर ज्यादातर हार मिली है। इन बूथों पर भाजपा की रणनीति है कि सामाजिक और राजनीतिक रणनीति के माध्यम से मतदाताओं को टारगेट किया जाए।

अब देखना होगा कि भाजपा का बूथ मैनेजमेंट कितना सफल हो पाता है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक एससी-एसटी एक्ट में संशोधन के बाद सवर्ण और ओबीसी वर्ग के मतदाता भाजपा से नाराज चल रहे हैं। कहा जा रहा है कि यही नाराजगी भाजपा को चुनावों में भारी पड़ने वाली है। इसलिए भाजपा जातीय समीकरणों के जरिये इस बार चुनाव जीतने के जुगाड़ में है।