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कमलनाथ के संसदीय क्षेत्र ने मारी बाजी, मध्य प्रदेश में छिन्दवाड़ा की हवा ‘सबसे साफ़’

24 Aug 2018
सतना की हवा ‘सबसे ख़राब’, ग्वालियर में भी हवा पर ‘ख़तरा’
 
AUG 24 (WTN) – मध्य प्रदेश के इन्दौर और भोपाल जैसे शहर स्वच्छता के मामले में जरूर देश के पहले और दूसरे नम्बर पर हैं। लेकिन वायु प्रदूषण के मामले में इनकी रेटिंग काफी खराब है। छिन्दवाड़ा की सड़कों को अमेरिका की सड़कों से भी बेहतर होने का दावा करने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलनाथ के शहर छिन्दवाड़ा ने कम वायु प्रदूषण वाले शहरों में टॉप कर बाज़ी मार ली है।
 
मध्य प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक मध्य प्रदेश में जिन शहरों की हवा सबसे ज़्यादा शुद्ध है उसमें छिन्दवाड़ा नम्बर वन पर क़ाबिज़ है। रिपोर्ट के मुताबिक, वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण ख़राब सड़कों के कारण उड़ने वाली धूल है। आपकी जानकारी के लिए बता दें पूर्व केन्द्रीय मंत्री मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ कई बार कह चुके हैं कि छिन्दवाड़ा की सड़कें अमेरिका से भी बेहतर हैं। कहा जा रहा है कि अच्छी सड़कों के कारण है छिन्दवाड़ा में वायु प्रदूषण कम है।
 
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश के 43 शहरों का एअर क्वालिटी इण्डेक्स 50 से ज़्यादा है। वहीं हवा में पीएम यानि पर्टिकुलेट मैटर की मात्रा 10 प्रतिशत बढ़ी हुई है। बोर्ड के मुताबिक इसकी बड़ी वज़ह है वाहनों से निकलने वाला कार्बनयुक्त धुंआ और ख़राब सड़कों के कारण उड़ने वाले बारीक धूल के कण।
 
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट की माने तो फिलहाल मध्य प्रदेश में सबसे ज़्यादा शुद्ध हवा छिन्दवाड़ा की है। छिन्दवाड़ा का एअर क्वालिटी इण्डेक्स लगभग 35.13 है। वहीं सबसे ख़राब हवा सतना शहर की है। यहां पर एअर क्वालिटी इण्डेक्स क़रीब 177 है। जानकारी के मुताबिक बारिश के साथ हवा में मौजूद धूल-मिट्टी के कण घुल जाते हैं जिससे हवा साफ़ हो जाती है, लेकिन मध्य प्रदेश के शहरों में वायु प्रदूषण इतना अधिक है कि भरी बारिश में भी हवा शुद्ध नहीं है।
 
रिपोर्ट के मुताबिक इन्दौर और भोपाल जैसे शहरों की हवा भी सांस लेने के लायक नहीं है। सतना के बाद सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहरों में नम्बर आता है ग्वालियर का उसके बाद भिण्ड और श्योपुर सबसे ज़्यादा प्रदूषित शहरों में है।
 
जबकि छिन्दवाड़ा के साथ कम प्रदूषित शहरों में दमोह, बुरहानपुर, अलीराजपुर छतरपुर, बड़वानी, टीकमढ़ और झाबुआ का नम्बर आता है। रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के 51 ज़िलों में से चार ज़िले मॉडरेट श्रेणी में आए हैं, जबकि 39 ज़िले सेटीस्फेक्ट्री श्रेणी में तो सिर्फ 8 ज़िले ही गुड की श्रेणी में आए हैं।