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विश्लेषण: समाजवादी पार्टी में ‘किनारे’ होते बुजुर्ग नेता

27 Aug 2018
शिवपाल यादव ने लगाया पार्टी में उपेक्षा का आरोप, मुलायम सिंह ने कहा था, नहीं मिलता सम्मान
 
AUG 27 (WTN) – कभी उत्तर प्रदेश में एकछत्र राज करने वाली समाजवादी पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। राजनीतिक पण्डितों का मानना है कि अब सपा में बुज़ुर्ग पुराने नेताओं को धीरे-धीरे किनारे किया जा रहा है। कुछ दिनों पहले समाजवादी पार्टी के पूर्व अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि उनको अब सम्मान नहीं दिया जाता है। मुलायम सिंह यादव के बाद अब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा शिवपाल यादव ने पार्टी में अपनी उपेक्षा का बड़ा आरोप लगाया।
 
मुलायम सिंह यादव के करीबी शिवपाल यादव ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा, “मुझे पार्टी में कोई जिम्मेदार पद नहीं दिया गया और डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी मैं इंतजार ही कर रहा हूं। अब कोई दूसरा रास्ता खोजना पड़ेगा।“ आगे शिवपाल यादव ने कहा, “मुझे पार्टी में ज़िम्मेदारी नहीं मिल रही है, इंतजार करते-करते डेढ़ साल हो चुका है। आखिर कितनी उपेक्षा बर्दाश्त की जाये। सहने की भी सीमा होती है। फिर भी मैं चाहता हूं कि सब मिल कर लड़ें।“
 
शिवपाल यादव के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि समाजवादी पार्टी में चाचा-भतीजे यानी अखिलेश यादव और शिवपाल यादव के बीच ‘शीत युद्ध’ जारी है और दोनों के बीच ‘मनमुटाव’ और भी बढ़ने की बात सामने आ रही है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने भी बड़ा बयान दिया था जिससे उनका दर्द सामने आया था। मुलायम सिंह यादव ने कहा था, “आज हमारा कोई सम्मान नहीं करता है। शायद मेरे मरने के बाद मेरा सम्मान हो। लोहिया जी भी यही कहते थे कि इस देश में जिंदा रहते हुए कोई सम्मान नहीं करता है।“
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कुछ दिनों पहले तक चर्चा थी कि शिवपाल यादव को समाजवादी पार्टी में राष्ट्रीय महासचिव का पद दिया जा सकता है। पिछले साल 2017 में यूपी के विधानसभा चुनावों से पहले मुलायम सिंह यादव, शिवपाल यादव और अखिलेश के बीच ‘पारिवारिक मतभेद’ हो गए थे जिसका परिणाम हार के रूप में समाजवादी पार्टी को उठाना पड़ा था।
 
कहा जाता है कि शिवपाल यादव की तरफ से अखिलेश यादव के साथ ‘रिश्ते सुधारने’ की कोशिश की गई, लेकिन इसका कोई भी फायदा शिवपाल यादव को मिलना दिख नहीं रहा है।
 
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक राजनीतिक हल्कों में चर्चा थी कि शिवपाल यादव कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों के सम्पर्क में हैं। शिवराल यादव के क़रीबियों के अनुसार शिवपाल यादव 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ने के मूड में हैं। लेकिन वे किस पार्टी से चुनाव लड़ेंगे यह तय नहीं है। जिस तरह से उनके अखिलेश यादव से सम्बन्ध हैं उससे तो लगता नहीं है कि सपा से उन्हें टिकट मिलेगा।
 
यदि शिवपाल यादव सपा के अलावा किसी अन्य पार्टी से चुनाव लड़ते हैं तो समाजवादी पार्टी के लिए यह बहुत ‘बड़ा नुकसान’ होगा। कहा जाता है कि मुलायम सिंह यादव के साथ मिलकर शिवपाल यादव ने सपा को यूपी के गांव-गांव तक पहुंचाया था। अब यदि शिवपाल यादव जैसे कद्दावर नेता को सपा छोड़कर कांग्रेस या भाजपा से चुनाव लड़ना पड़ता है तो ज़मीनी कार्यकर्ताओं पर ‘असर’ पड़ना स्वाभाविक है।
 
अब देखना होगा कि आखिर क्या ‘चाल’ शिवपाल यादव लोकसभा चुनाव के पहले चलते हैं। कहा जाता है कि शिवपाल यादव जो भी ‘राजनीतिक फैसला’ करेंगे उसमें मुलायम सिंह यादव की ‘सहमति’ जरूर होगी। यानि कि यदि शिवपाल यादव सपा के अलावा किसी अन्य पार्टी से चुनाव लड़ते हैं तो इसे मुलायम सिंह यादव के एक ‘मास्टर स्ट्रोक’ के रूप मे देखा जा सकता है जोकि वे अपने बेटे अखिलेश यादव के खिलाफ चलेंगे।