HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

विश्लेषण: जानिए मनमोहन या मोदी, किसके शासन में ज़्यादा गिरा रुपया

10 Sep 2018
मनमोहन सिंह के कार्यकाल में क़रीब 24, तो नरेन्द्र मोदी के शासन में अभी तक रुपये में क़रीब 14 रुपये का आया है अंतर

SEP 10 (WTN) – आजकल हर कहीं यही शोर है कि डॉलर के मुकाबले रुपया लगातार कमज़ोर होता जा रहा है। कमज़ोर होते रुपये का ख़ामियाज़ा आम आदमी को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि इसके कारण पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें आए दिन बढ़ रहीं हैं। जबकि रुपया कमज़ोर हो रहा है, ऐसे में कई लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह अर्थशास्त्र के जानकार थे, इसलिए उनके समय रुपया, डॉलर के मुकाबले इतना कमज़ोर नहीं हुआ था। चलिए जानते हैं कि मनमोहन सिंह के आख़िरी पांच सालों के कार्यकाल में रुपया कितना कमज़ोर हुआ, और नरेन्द्र मोदी के करीब चार साल और चार महीने के कार्यकाल में रुपया, डॉलर के मुक़ाबले कितना गिरा।
 
यूपीए टू सरकार के गठन के बाद 22 मई 2009 को मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। 22 मई 2009 को एक डॉलर के मुकाबले रुपया 46.830 के स्तर पर था। 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपीए की करारी हार हुई और केन्द्र में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी।
 
देश के नये प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी ने 26 मई 2014 को शपथ ली थी। इससे पहले 24 मई को शनिवार, और 25 मई को रविवार होने के कारण मनी मार्केट बंद था, इसलिए मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते आख़िरी दिन जब मनी मार्केट का काम हुआ, वो दिन था 23 मई 2014 का, और उस दिन शुक्रवार था। इस दिन डॉलर के मुकाबले रुपया 58.525 के स्तर पर था।
 
यानि कि मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते आख़िरी पांच सालों में रुपया एक डॉलर के मुक़ाबले 68.805 के उच्चतम स्तर पर पहुंचा, तो उसका सबसे निम्न स्तर 43.830 का था।
 
यानि कि यदि हिसाब लगाया जाए तो इन पांच सालों में रुपये में 11.695 की वृद्धि हुई। वहीं यदि उच्चतम स्तर और निम्नतम स्तर की गणना की जाए, तो इन पांच सालों के दौरान रुपये में 24.975 का अंतर रहा।
 
अब बात करते हैं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल की। 26 मई 2014 को नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी और इस दिन एक डॉलर के मुकाबले रुपया 58.715 के स्तर पर था। वहीं आज यानि कि 10 सितम्बर 2018 को एक डॉलर के मुकाबले रुपया 72.445 के स्तर पर है।
 
इन दौरान रुपया 72.505 के सबसे उच्च स्तर पर गया, तो वहीं 58.410 के निम्नतम स्तर पर रुपया गिरा।

अब यदि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन में रुपये कि स्थिति की गणना की जाए, तो रुपये में 13.730 की वृद्धि हुई है। वहीं उच्चतम और निम्नतम स्तर की गणना की जाए तो इसमें 14.095 का अंतर आया है।
 
चलिए अब दोनों के कार्यकाल में रुपये की गिरावट का तुलनात्मक अध्ययन करते हैं। मनमोहन सिंह जो कि बड़े अर्थशास्त्री माने जाते हैं, उनके पांच साल के कार्यकाल में रुपये में 24.975 का अंतर रहा, तो नरेन्द्र मोदी के शासन में अभी तक रुपये में 14.095 का अंतर आया है। वहीं यदि पहले और आखिर दिन की तुलना की जाए तो मनमोहन सिंह के कार्यकाल में यह अंतर 11.695 का रहा तो नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में आज की तारीख़ तक यह अंतर 13.730 का है।
 
आंकड़े साफ़ बताते हैं कि मनमोहन सिंह के दूसरे शासनकाल में रुपये के उच्चतम और निम्नतम स्तर में ज़्यादा अंतर था। यह अंतर 24.975 का था, जबकि नरेन्द्र मोदी के अभी तक के शासनकाल में यह अंतर 14.095 का है। लेकिन पूरे कार्यकाल की तुलना की जाए तो मनमोहन सिंह के शासन में यह अंतर 11.695 का रहा तो नरेन्द्र मोदी के शासन में यह अंतर आज की तारीख़ तक 13.730 का है।
 
 
नोट – समस्त आंकड़े इंटरनेट से प्राप्त जानकारी के अनुसार हैं।