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आखिर दिग्विजय सिंह क्यों हुए ‘नाराज़’?

18 Sep 2018
‘दिग्विजय फॉर सीएम’ कैम्पेन से जताई दिग्विजय सिंह ने ‘नाराज़गी’, खुद को सीएम पद की रेस से बताया ‘दूर’

SEP 18 (WTN) – कांग्रेस के दिग्गज नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह हमेशा सुर्खियों में बने रहते हैं। अपने तीखे बयानों के लिए पहचाने जाने वाले दिग्विजय सिंह भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधने से कभी पीछे नहीं हटते हैं। दिग्विजय सिंह एक बार फिर से अपने बयान या फिर कहें ट्वीट को लेकर चर्चा में हैं। इस बार उनका ट्वीट आया है अपने ही शुभचिंतकों के ख़िलाफ़।
 
अपने बयानों से भारतीय राजनीति में नये समीकरण पैदा करने वाले दिग्विजय सिंह इस बार अपने शुभचिंतकों से नाराज़ हैं। एक ट्वीट कर दिग्विजय सिंह ने अपनी नाराज़गी जताई है। पूरा मामला क्या है हम आपको बताते हैं।
 
दरअसल दिग्विजय सिंह के समर्थकों ने एक कैम्पेन चलाया हुआ है जिसे 'दिग्विजय फॉर सीएम'  नाम दिया गया है। कहा जाता है कि मध्य प्रदेश कांग्रेस में दिग्विजय सिंह ऐसे नेता हैं जिनके सैकड़ों की तादात में समर्थक हर विधानसभा में मौजूद हैं। दस सालों तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे दिग्विजय सिंह की कांग्रेस कार्यकर्ताओं में गहरी पैठ है।
 
ऐसे में उनके हज़ारों समर्थकों ने दिग्विजय फॉर सीएम नाम का जो कैम्पेन चलाया है, उससे दिग्विजय सिंह नाराज़ बताए जाते हैं। अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए दिग्विजय ने ट्वीट किया है, “जिन्होंने भी दिग्विजय फॉर सीएम कैम्पेन शुरू किया है वे मेरे शुभचिंतक नहीं हैं। मैं दस सालों तक मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री रहा हूं, और मैं अपने बयान से पीछे नहीं हटूंगा कि मैं मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार नहीं हूं। मैं उन लोगों में नहीं हूं जो कहते कुछ हैं और करते कुछ हैं.”
 
दरअसल मध्य प्रदेश कांग्रेस अपनी गुटबाजी के लिए देश की राजनीति में बदनाम है। मध्य प्रदेश कांग्रेस में जितने नेता हैं उतने ही गुट हैं। मध्य प्रदेश में लगातार 15 सालों से सस्ता से दूर कांग्रेस ने इस बार जीत के लिए अनुभव और युवा जोश दोनों को तरजीह देते हुए, कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया के हाथों में जीत की कमान सौंपी है। राहुल गांधी ने जहां कमलनाथ को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया है वहीं ज्योतिरादित्य सिंधिया को चुनाव अभियान समिति की कमान सौंप कर जीत की ज़िम्मेदारी दोनों को दी है।
 
अब जबकि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया दोनों को ही सीएम पद का दावेदार माना जा रहा है। ऐसे में दिग्विजय सिंह के समर्थकों ने दिग्विजय फॉर सीएम कैम्पेन चलाकर कांग्रेस के राजनीति में गुटबाजी को फिर से हवा दे दी है। हालांकि अपनी नर्मदा यात्रा के बाद दिग्विजय सिंह ने ऐलान किया था कि वे मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की रेस से बाहर हैं और उनकी सीएम बनने की कोई इच्छा नहीं है।
 
वहीं राहुल गांधी के भोपाल रोड शो के दौरान जब दिग्विजय सिंह का कटआउट नहीं लगा था तो उनके समर्थकों ने नाराज़गी जताई थी, हालांकि बाद में दिग्विजय सिंह ने खुद साफ़ किया था कि उन्होंने खुद ही कटआउट नहीं लगाने के लिए बोला था। कांग्रेस में फैली गुटबाज़ी दूर करने के लिए दिग्विजय सिंह इन दिनों एकता यात्रा कर रहे हैं जिसका उद्देश्य कांग्रेस में एकुजटता लाना है।
 
खैर, राजनीति में कोई कितने भी दावे करे कि उसे सत्ता का लालच नहीं है, सत्ता मिलने पर सभी दावे रखे रह जाते हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि दिग्विजय सिंह पर्दे के पीछे कोई राजनीति कर रहे हों, क्योंकि ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उनके मनमुटाव जगजाहिर है। खैर यह तो अब समय ही बताएगा कि दिग्विजय सिंह की रणनीति क्या है। क्योंकि हो सकता है कि अभी शांत रहकर दिग्विजय सिंह अपनी किसी रणनीति पर काम कर रहे हों और यदि कांग्रेस जीतती है तो उनके समर्थक दिग्विजय सिंह को सीएम बनाने के लिए आलाकमान पर दबाव बनाएं। क्योंकि यह राजनीति है, यहां पर कुछ भी हो सकता है।