HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

पितृपक्ष में भूलकर भी ना करें ‘ये’ काम, वरना पुरखे होंगे ‘नाराज़’

24 Sep 2018
पितृपक्ष में शारीरिक सम्बन्धों से रहें दूर, तामसिक भोजन से करें परहेज़

SEP 24 (WTN) – भाद्र कृष्ण प्रतिपदा से पितृपक्ष प्रारम्भ हो रहा है। पितृपक्ष यानि की श्राद्धपक्ष पितरों से आशीर्वाद लेने के लिए होता है। मान्यता है कि इस दौरान पितर सूक्ष्म रूप में हमारे घर में उपस्थित होते हैं। शास्त्रों के अनुसार पितरों को याद करने से और उनकी पूजा करने से घर में सुख शांति बनी रहती है। इस दौरान पितरों की संतुष्टि और प्रसन्नता के लिए कुछ नियमों का पालन करना फलदायी होता है।
 
हम आपको बताते हैं कि शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष के दौरान कौन-कौन से कामों से परहेज़ करना चाहिए।
 
शास्त्रों के अनुसार श्राद्ध पक्ष के दौरान घर में पितर सूक्ष्म रूप में उपस्थित रहते हैं। ऐसे में पुरुष और स्त्री को शारीरिक सम्बन्ध नहीं बनाना चाहिए। इस दौरान संयम से रहना का प्रयास करें।  
 
पूरी कोशिश करें कि पितृपक्ष में दाड़ी मूछें नहीं कटवाएं। वैसे यह नियम सभी पर लागू नहीं होता है, जो लोग पितरों की पूजा कर रहे हैं या फिर पिण्डदान कर रहे हैं यह नियम उनके लिए लागू होता है।
 
शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष में लोहे के बर्तनों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। सम्भव हो सके तो ब्राह्मण को पत्तल पर भोजन करवाएं और ख़ुद भी पत्तल पर भोजन करें।
 
यथासम्भव प्रयास करें कि पितृपक्ष के दौरान घर आए भिखारी या अतिथि को बिना भोजन या पानी के नहीं जाने दें। मान्यता है कि पितर किसी भी रूप में आपके द्वार आ सकते हैं और अन्न-जल मांग सकते हैं। इसलिए इन दिनों में किसी का निरादर नहीं करें।
 
पितृपक्ष के दौरान घर में शांति बनाए रखें और आपसी सामंजस्य के साथ रहें। मान्यता है कि इन दिनों में पितर सूक्ष्म रूप में घर में उपस्थित रहते हैं ऐसे में यदि वे अपनी परिजनों को लड़ाई करते देखेंगे तो उन्हें दुख होगा।
 
श्राद्धपक्ष के दौरान ब्राह्मण को दोपहर के समय ही भोजन कराना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि आधा प्रहर का समय पितरों का होता है। सुबह और शाम को देवताओं की पूजा होती है।
 
शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष में नये घर में प्रवेश नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि जिस घर में पितरों की मृत्यु होती है वे उसी घर में वापस लौटते हैं और जब वे उस घर में लौटते हैं तो अपने परिजन नहीं मिलने पर वे उदास हो जाते हैं। इस दौरान आप घर ख़रीद सकते हैं, लेकिन गृहप्रवेश निषेध माना गया है।
 
पितृपक्ष में जो लोग पितरों का पूजन करते हैं और पिण्डदान करते हैं उन्हें तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए और मांस-मदिरा के सेवन से परहेज़ करना चाहिए।