आप भी जानिए कि कैसे होता है डाकघरों को पिनकोड का वितरण
OCT 03 (WTN) – जब आप किसी को पोस्ट से लेटर भेजते हैं तो उसमें आपको पिनकोड लिखना होता है। लेकिन आपने कभी सोचा है कि आखिर पिनकोड नम्बर कैसे किसे गांव, कस्बे या शहर को वितरित किये जाते हैं। यदि आप नहीं जानते हैं तो हम आपको बताते हैं। पिन कोड, POSTAL INDEX NUMBER (PIN) का संक्षिप्त नाम है। यह छह अंकों का विशिष्ट कोड है जो कि भारत में डाक वितरण करने वाले सभी डाकघरों को आवंटित किया जाता है।
चूंकि एक पिनकोड केवल एक ही डाकघर से सम्बन्धित होता है इसलिए उस कोड का उपयोग इसलिए किया जाता है ताकि लेटर तेज़ी से निर्धारित डाकघर में पहुंच जाए। पिन कोड प्रणाली लागू करने के लिए पूरे देश को आठ पिन क्षेत्रों में बांटा गया है।
1 - दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर
2 - उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड
3 - राजस्थान और गुजरात
4 - छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश
5 - आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक
6 - केरल एवं तमिलनाडु
7 – पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर
8 - बिहार और झारखण्ड
पिनकोड छह अंकों की एक संख्या है। इसका पहला अंक इन क्षेत्रों में से किसी एक राज्य को दर्शाता है। दूसरा अंक उपक्षेत्र का दर्शाता है तो तीसरा उस ज़िले को दर्शाते हैं जहां वितरण करने वाला डाकघर स्थित है। अगले तीन अंक उस विशेष डाकघर को दर्शाते हैं जहां पर लेटर का वितरण होना है। यानि कि पहले तीन अंक मिलकर उस छंटाई करने वाले या राजस्व ज़िले को दर्शाते हैं जहां पर लेटर को मुख्य रूप से भेजना है। जबकि अंतिम तीन अंक उस वास्तविक डाकघर से सम्बन्धित होते हैं जहां पर आखिरकार उस लेटर को वितरित किया जाना है।
उदाहरण के तौर पर भोपाल के गोविन्दपुरा क्षेत्र का पिनकोड 462023 है। इसमें पहले अंक 4 मध्य प्रदेश ज़ोन का है। वहीं दूसरा अंक 6 उपक्षेत्र का दर्शाता है तो तीसरा अंक 2 भोपाल ज़िले के लिए हैं। पीछे के तीन अंक 023 उस वास्तविक डाकघर के लिए हैं जो कि गोविन्दपुरा क्षेत्र में स्थित है।