विश्लेषण: वित्तीय संकट से जूझ रही मध्य प्रदेश सरकार क्या पूरा कर पाएगी भोपाल-इन्दौर मेट्रो प्रोजेक्ट?
OCT 04 (WTN) – वित्तीय संकट से जूझ रहे मध्य प्रदेश में कुछ ही दिनों बाद विधानसभा चुनाव होना है। ऐसे में केन्द्र की मोदी सरकार ने प्रदेश की जनता को खुश करने के लिए तरह-तरह के गिफ्ट देना शुरू कर दिया है। मध्य प्रदेश में लगातार 15 सालों से सत्ता सुख भोग रही भाजपा को इस बार सत्ता विरोधी लहर का डर सता रहा है, ऐसे में जनता को लुभाने के लिए मोदी सरकार ने सौगातों का पिटारा खोलना शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट ने भोपाल और इन्दौर के लिए मेट्रो परियोजना की मंज़ूरी दे दी है। इस परियोजना को चार साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जानकारी के मुताबिक़ इस परियोजना में कुल 14, 441 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
कैबिनेट में मंज़ूर हुए प्रस्ताव के अनुसार, भोपाल में 27.87 किलोमीटर लम्बे मेट्रो रेल रूट पर कुल 6,941.40 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। वहीं इंदौर में 31.55 किलोमीटर लम्बे रूट पर मेट्रो रेल चलाई जाएगी। रिंग रोड के रूप में बनने वाली यह लाइन एक तरह से पूरे इंदौर को कवर करेगी। चार साल में पूरी होने वाली इस योजना में कुल 7,500,80 करोड़ की लागत आएगी।
चार साल में पूरे होने वाले इस मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बीस प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार तो इतनी ही राशि राज्य सरकार खर्च करेगी। जबकि बाक़ी बची साठ प्रतिशत राशि लोन के ज़रिए जुटाई जाएगी। भोपाल मेट्रो को यूरोपियन इन्वेस्टमेन्ट फायनेंस करेगी जबकि इन्दौर मेट्रो प्रोजेक्ट को एडीबी यानि कि एशियन डेवलपमेण्ट बैंक और न्यू डेवलपमेण्ट बैंक फायनेंस करेंगे। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि वित्तीय संकट से बार बार जूझ रही मध्य प्रदेश सरकार इतना बजट कहां से लाएगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भोपाल और इन्दौर में मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के लिए मध्य प्रदेश के तत्कालीन नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर इसकी पहल कर इसका ऐलान किया था। इसके लिए बाकयदा दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने भोपाल-इन्दौर मेट्रो रेल के लिए डीपीआर भी बनाई थी। लेकिन बाबूलाल गौर के नगरीय प्रशासन मंत्री पद से हटने के बाद से इस प्रोजेक्ट में देरी होती चली गई। जानकारी के मुताबिक इतने सालों में देरी के कारण मेट्रो रेल प्रोजेक्ट में प्रति किलोमीटर का औसत खर्च 150 करोड़ रुपये से बढ़कर 250 करोड़ रुपये हो गया है।
मोदी कैबिनेट द्वारा भोपाल-इन्दौर मेट्रो को मंज़ूरी मिलने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया है। कहा जा रहा है कि चुनाव से पहले भोपाल और इन्दौर के लिए मेट्रो ट्रेन की सौगात भाजपा के लिए ट्रम्प कार्ड साबित हो सकता है। एससी-एसटी एक्ट में संशोधन और प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर जिस तरह से भाजपा का रूख़ रहा है उससे ग्रामीण के साथ-साथ शहरी वर्ग भी भाजपा से नाराज़ चल रहा है। ऐसे में कम से कम इन्दौर और भोपाल जैसे शहरों में रह रहे लोगों को मनाने के लिए मेट्रो रेल प्रोजेक्ट भाजपा का एक बढ़िया दांव कहा जा सकता है।
इधर, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भोपाल-इंदौर में मेट्रो को सिर्फ़ एक चुनावी जुमला बताया है। कमलनाथ ने ट्वीट कर कहा, “हर चुनाव के पहले शिवराज इस तरह के सपने दिखाते आए हैं, जिस सरकार के जाने का समय नज़दीक है। खज़ाना खाली है, वो किस मुंह से मेट्रो के सपने दिखा रही है। हर बार की तरह यह घोषणा भी काग़ज़ी ही है।“
मोदी कैबिनेट ने भोपाल-इन्दौर मेट्रो प्रोजेक्ट को मंज़ूरी दे तो दी है, लेकिन देखना होगा कि वित्तीय संकट से जूझ रही मध्य प्रदेश सरकार क्या इस प्रोजेक्ट के लिए ज़रूरी फण्ड मुहैया करा पाएगी। क्योंकि कुछ दिनों पहले जिस तरह से तीर्थदर्शन योजना के लिए क़रीब 80 करोड़ रुपये नहीं चुकाने पर रेलवे ने रैक देने से मना कर दिया और मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार की फज़ीहत हुई थी, तो वहीं कहीं ऐसा ही इस हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट में ना हो।