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जानिए पुलिस हिरासत और न्यायिक हिरासत के बीच फ़र्क

09 Oct 2018
पुलिस हिरासत में आरोपी को पुलिस थाने में रखा जाता है, जबकि न्यायिक हिरासत के दौरान जेल में

OCT 09 (WTN) – आपने कई बार ‘पुलिस हिरासत’ और ‘न्यायिक हिरासत’ जैसे क़ानूनी शब्दों के बारे में तो सुना ही होगा। पर क्या आप इन दोनों के बीच के अंतर को जानते हैं। यदि आप इन दोनों के बीच अंतर को नहीं जानते हैं तो हम आपको बताते हैं कि पुलिस हिरासत और न्यायिक हिरासत में क्या फ़र्क होता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी आरोपी को अपराध करने से रोकने के लिए क़ानूनन रूप से पुलिस हिरासत या फ़िर न्यायिक हिरासत में रखा जा सकता है। किसी भी आरोपी को पुलिस हिरासत या न्यायिक हिरासत में ‘सीआरपीसी’ के नियमों के तहत ही रखा जा सकता है।
 
जब भी पुलिस किसी आरोपी को हिरासत में लेती है तो वह अपनी जांच के लिए सीआरपीसी की धारा 167 के तहत मजिस्ट्रेट से आरोपी को 15 दिनों तक के लिए हिरासत में रखने का समय मांग सकती है। इसके बाद मजिस्ट्रेट आरोपी को 15 दिनों तक या पुलिस हिरासत या फ़िर न्यायिक हिरासत में भेज सकते हैं।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पुलिस हिरासत में आरोपी को पुलिस थाने में रखा जाता है जबकि न्यायिक हिरासत में आरोपी को जेल में रखा जाता है। पुलिस हिरासत तब शुरू होती है जब पुलिस आरोपी को गिरफ़्तार कर लेती है जबकि न्यायिक हिरासत तब शुरू होती है जब न्यायाधीश आरोपी को पुलिस कस्टडी से जेल भेज देते हैं।
 
क़ानून के नियमों के अनुसार पुलिस हिरासत में रखे गए आरोपी को 24 घण्टे के अन्दर किसी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना पड़ता है, लेकिन वहीं न्यायिक हिरासत में रखे गए व्यक्ति को तब तक जेल में रखा जाता है जब तक कि उसके ख़िलाफ़ मामला न्यायालय में चलता है, या जब तक न्यायालय उसे जमानत पर रिहा नहीं कर देती है।
 
पुलिस हिरासत में पुलिस आरोपी व्यक्ति के साथ सख्ती से पेश आ सकती है ताकि वह अपना ज़ुर्म कबूल कर ले। लेकिन यदि किसी आरोपी को न्यायिक हिरासत से सीधे जेल भेज दिया जाता है तो वो पुलिस की सख्ती से बच जाता है। न्यायिक हिरासत में यदि आरोपी से पुलिस को किसी भी प्रकार की पूछताछ करनी हो तो उसे न्यायाधीश से इजाज़त लेना पड़ती है।
 
पुलिस हिरासत तभी तक ही रहती है जब तक कि पुलिस द्वारा चार्जशीट दाख़िल नहीं की जाती है। एक बार चार्जशीट दाख़िल हो जाने के बाद पुलिस आरोपी को हिरासत में नहीं रख सकती है।
 
पुलिस हिरासत में आरोपी की सुरक्षा पुलिस के अधीन होती है जबकि न्यायिक हिरासत में आरोपी की सुरक्षा न्यायाधीश की निगारनी में होती है। हत्या, लूट, अपहरण, धमकी, चोरी इत्यादि के लिए पुलिस हिरासत होती है जबकि इन अपराधों के अलावा कोर्ट की अवहेलना, जमानत ख़ारिज होने जैसे केसों में न्यायिक हिरासत होती है।