HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

विश्लेषण: मध्य प्रदेश में बसपा-कांग्रेस का गठबंधन ना होने पर आख़िर ग़लती है किसकी?

08 Oct 2018
कमलनाथ का आरोप, “गठबंधन में ज़रूरत से ज़्यादा सीटें मांग रहीं थीं मायावती”

OCT 08 (WTN) – मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए तारीख़ों का ऐलान हो चुका है। लगातार तीन बार से जीत हासिल कर रही भाजपा के लिए चौथी बार जीतना किसी ‘चुनौती’ से कम नहीं है, तो वहीं 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस जीत के लिए सभी ‘रणनीतियों’ पर काम कर रही है। भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस पार्टी बसपा और समाजवादी पार्टी से गठबंधन के ‘सपने’ देख रही थी जिससे कि भाजपा विरोधी वोटों का ‘ध्रुवीकरण’ रोका जा सके। लेकिन दोनों ही पार्टियों ने मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से ‘इनकार’ कर कांग्रेस को ‘बड़ा झटका’ दिया है।
 
बात करें बसपा की, तो बसपा प्रमुख मायावती का मध्य प्रदेश समेत तीन राज्यों में कांग्रेस के साथ गठबंधन करके चुनाव नहीं लड़ना का फ़ैसला काफ़ी चौकाने वाला है। यूपी में गोरखपुर, फूलपुर और कैराना लोकसभा उपचुनाव में विपक्ष के ‘संयुक्त प्रत्याशी’ की जीत के बाद कयास लगाए जा रहे थे कि आने वाले चुनावों में ‘सम्पूर्ण विपक्ष’ मिलकर भाजपा प्रत्याशी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ेगा। लेकिन मध्य प्रदेश में बसपा ने कांग्रेस के साथ गठबंधन करने से ‘इनकार’ कर दिया, जिसके बाद भाजपा के ख़िलाफ़ बन रहे महागठबंधन की हवा निकल गई है।
 
इधर एक टीवी चैनल को दिए इन्टरव्यू में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ का कहना है कि मध्य प्रदेश में बसपा के साथ गठबंधन नहीं होने का पूरा ‘दोष’ मायावती पर है। कमलनाथ के मुताबिक़ मायावती ने उन 50 सीटों की मांग की थी जहां उनकी पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव में सिर्फ़ 2000 से 3000 हज़ार वोट ही हासिल किए थे। आगे कमलनाथ ने कहा यदि भाजपा के ख़िलाफ़ कांग्रेस और बसपा का गठबंधन नहीं होता है तो भाजपा को ‘आसानी’ से जीत हासिल हो सकती है।
 
कमलनाथ का कहना है, “2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने मध्य प्रदेश में कुल 6.3 प्रतिशत ही वोट हासिल किये थे और वो इस विधानसभा चुनाव में गठबंधन में 50 सीटें चाहती हैं।”मायावती से सवाल पूछते हुए कमलनाथ ने कहा, “यूपी में कांग्रेस का वोट शेयर 6 प्रतिशत है, तो क्या कांग्रेस को भी इतनी ही सीटों की मांग करना चाहिए।”
 
लेकिन सभी के मन में यही ‘सवाल’ है कि आख़िर मायावती ने क्यों मध्य प्रदेश समेत तीन राज्यों में कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं किया है। इधर कुछ दिनों पहले मायावती ने बसपा का कांग्रेस पार्टी से गठबंधन नहीं होने के पीछे दिग्विजय सिंह को ‘ज़िम्मेदार’ बताया था। मायावती ने साफ़ कहा था कि कांग्रेस में दिग्विजय सिंह ‘जैसे कई नेता’ हैं जो नहीं चाहते हैं कि बसपा के साथ मध्य प्रदेश में गठबंधन हो। मायावती ने तो दिग्विजय सिंह को ‘भाजपा का एजेण्ट’ तक कह दिया था।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मायावती ने दिग्विजय सिंह पर आख़िर इसलिए निशाना साधा था क्योंकि दिग्विजय सिंह ने मायावती पर तंज कसते हुए कहा था, “मायावती सीबीआई और ईडी से डरती हैं और इसलिए सीबीआई और ईडी के डर के कारण ही वो गठबंधन करने से डर रही हैं।” एक तरह से दिग्विजय सिंह का कहना था कि मोदी सरकार सीबीआई और ईडी के ज़रिये मायावती को ‘डरा’ रही है कि वो कांग्रेस के साथ गठबंधन ना करे।
 
मध्य प्रदेश में मायावती ने कांग्रेस के साथ गठबंधन क्यों नहीं किया इसका सही जवाब तो सिर्फ़ मायावती ही दे सकती हैं। लेकिन कांग्रेस और बसपा के बीच गठबंधन ना होने का सबसे बड़ा लाभ भाजपा को मिलेगा। यदि दोनों पार्टयां एक हो जाती तो भाजपा विरोधी वोटों का धुव्रीकरण नहीं होता और इसका पूरा नुकसान भाजपा को होता। गठबंधन ना होने के पीछे कुछ ‘ग़लती’ कांग्रेस की है तो कुछ ग़लती मायावती की है। कांग्रेस को ‘बड़ा दिल’ रखते हुए कुछ ज़्यादा सीटें बसपा को दे देनी थीं तो वहीं बसपा का भी सिर्फ़ 6.3 प्रतिशत वोट शेयर के साथ क़रीब 50 सीटें मांगना ‘तर्कसंगत’ नहीं था। ख़ैर अभी भी समय है, हो सकता है कि दोनों ही पार्टियों के बीच ‘ऐन वक़्त’ पर गठबंधन हो जाए। लेकिन यदि गठबंधन नहीं होता है तो इसका पूरा ‘फ़ायदा’ भाजपा को हो रहा है।