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जानिए क्या है सुरक्षा परिषद में ‘वीटो पावर’?

10 Oct 2018
‘वीटो पावर’ के तहत स्थायी सदस्य देश परिषद में प्रस्तावित किसी भी प्रस्ताव को रोक या नकार सकते हैं

OCT 10 (WTN) – आपने संयुक्त राष्ट्र संघ में सुरक्षा परिषद और वीटो पावर के बारे में तो सुना ही होगा, लेकिन यदि आप इसके बारे नहीं जानते हैं तो हम आपको बताते हैं कि आखिर सुरक्षा परिषद क्या है और वीटो पावर क्या होता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं जिसमें पांच सदस्य स्थायी और दस सदस्य अस्थायी होते हैं। अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन संयुक्त राष्ट्र संघ के स्थायी सदस्यता प्राप्त देश हैं।
 
जब सुरक्षा परिषद का गठन किया गया था तो इस विशेषाधिकार प्राप्त गुट के सदस्य देशों के अलावा 10 अन्य देशों को दो-दो साल के लिए अस्थाई सदस्य के रुप में सुरक्षा परिषद में शामिल किया जाता है। स्थायी और अस्थायी सदस्य देशों के प्रतिनिधि बारी-बारी से एक-एक महीने के लिए सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष बनाए जाते हैं।
 
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्यों को सभी सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था संयुक्त राष्ट्र महासभा चुनती है। अस्थायी सदस्य देशों को चुनने का मुख्य उदेश्य सुरक्षा परिषद में क्षेत्रीय संतुलन क़ायम करना है। इन दस अस्थायी सदस्य देशों में पांच सदस्य एशिया या अफ़्रीकी देशों से, दो सदस्य दक्षिण अमरीकी से, एक पूर्वी यूरोप से और दो पश्चिमी यूरोप या अन्य क्षेत्रों से चुने जाते हैं। परिषद की अस्थाई सदस्यता के लिए सदस्य देशों के बीच काफ़ी कड़ा मुक़ाबला होता है।
 
आईये अब आपको बताते हैं कि आखिर वीटो पावर क्या होता है। वीटो लैटिन भाषा का एक शब्द है, जिसका अर्थ होता है, “मैं निषेध करता हूं।” संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों को एक विशेषाधिकार मिला हुआ है जिसे कि वीटो पावर कहते हैं। इस वीटो पावर के तहत स्थायी सदस्य देश परिषद में प्रस्तावित किसी भी प्रस्ताव को रोक सकते हैं या उसे नकार सकते हैं, भले ही उसके पक्ष में कितने भी वोट पड़े हों। सुरक्षा परिषद में किसी भी प्रस्ताव को पारित करने के लिए सभी स्थायी सदस्यों का वोट और 4 अस्थाई सदस्यों का वोट मिलना जरूरी होता हैं।