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विश्लेषण: ईरान से तेल आयात मामले में क्या अमेरिका को नाराज़ नहीं करेगा भारत

13 Oct 2018
अमेरिका की कड़ी चेतावनी! यदि ईरान से तेल आयात रखा जारी तो लगेंगे दण्डात्मक प्रतिबंध
 
OCT 13 (WTN) – जैसा कि आप जानते ही होंगे कि चार नम्बर से ईरान पर लगे अमेरिका के बाक़ी प्रतिबंध लागू होने जा रहे हैँ। इस बीच भारत के ईरान से कच्चा तेल आयात को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। अभी कुछ दिनों पहले ख़बर आई थी कि भारत ईरान से भारतीय रुपयों में तेल आयात करेगा, लेकिन अब ख़बर है कि भारत ईरान से तेल आयात का कोई भी फ़ैसला अमेरिका से बातचीत के बाद ही लेगा।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि चीन के बाद भारत ईरान का दूसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, और वहीं ईरान भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक देश है। सालों पहले भारत ने ‘तेल के बदले अनाज नीति’ के तहत ईरान से कच्चा तेल आयात किया था और उसे तेल के बदले गेहूं दिया था। ईरान पर प्रतिबंध के बाद भारत के रूख को देखते हुए कि भारत ईरान से कच्चे तेल का आयात जारी रख सकता है, तो इसे पूरी तरह से बंद कराने के सम्बन्ध में ट्रम्प प्रशासन की ओर से भारत से चर्चा करने के लिए ईरान मामलों पर अमेरिका के एक शीर्ष राजनयिक ब्रायन हुक इसी सप्ताह राजधानी दिल्ली आ रहे हैं।
 
मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, ब्रायन हुक भारत के साथ-साथ अन्य देशों की यात्रा के दौरान कोशिश करेंगे कि ईरान को ‘उसके व्यवहार’ पर ‘सबक’ सिखाने के लिए अपने 'सहयोगियों तथा साझेदारों' के साथ चर्चा की जाए। जानकारी के अनुसार भारत यात्रा के दौरान हुक और ऊर्जा संसाधन मामलों के सहायक विदेश मंत्री फ्रांसिस आर.फैनन अपने समकक्षों से मुलाकात करेंगे और अमेरिका की तरफ़ से समझाने की कोशिश करेंगे कि ईरान से तेल आयात बंद कर दिया जाए।
 
अमेरिका का कहना है कि ईरान सरकार अपने ‘मिसाइल कार्यक्रम’ को जारी रखने पर आमादा है ऐसे में उसे ‘सबक’ सिखाने के लिए उस पर ‘प्रतिबंध’ लगाना ज़रूरी था। ईरान पर प्रतिबंध लगाने के बाद अमेरिका अपने सभी सहयोगी देशों से चाहता है कि वे चार नवम्बर तक ईरान से कच्चे तेल की खरीदी बंद कर दें, और यदि उसके सहयोगी देश ऐसा नहीं करेंगे तो फिर ‘दण्डात्मक प्रतिबंधों’ के लिए इन देशों को तैयार रहना चाहिए। 
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ईरान पर अमेरिका के कुछ प्रतिबंध छह अगस्त से लागू हो गए हैं, वहीं तेल एवं बैंकिंग सेक्टर से जुड़े प्रतिबंध चार नवम्बर से प्रभावी होंगे। भारत अपने कच्चे तेल की ज़रूरत का एक बड़ा हिस्सा ईरान से आयात करता है। ऐसे में यदि ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध के बाद भारत को ईरान से कच्चे तेल का आयात बंद करना पड़ा तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर ख़राब प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में कहा जा रहा है कि अमेरिका भारत के लिए कच्चे तेल की वैकल्पिक व्यवस्था की कोशिश कर रहा है जिससे भारत को किसी भी तरह की परेशानियों का सामना ना करना पड़े।
 
इधर कुछ दिनों पहले भारत ने अमेरिकी पाबंदी के बावजूद ईरान से तेल व्यापार का पहला स्पष्ट संकेत दिया था जब भारत की सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कम्पनियों ने ईरान से 12.5 लाख टन कच्चे तेल के आयात के लिये अनुबंध किया था और इस सौदे का भुगतान डॉलर की जगह रुपये में लेने के लिए ईरान तैयार हो गया था। इस सबके बीच कहा जा रहा है कि ईरान की तरफ़ से यह प्रस्ताव भी आया है कि जिस तरह साल 2010 में अमेरिकी प्रतिबंध के बावजूद भारत और ईरान के बीच तेल सौदा जारी रहा था, वैसी ही व्यवस्था अभी भी की जा सकती है। 
 
अब देखना होगा कि आख़िर 4 नवम्बर के बाद भारत ईरान से कच्चे तेल का आयात करता है या फ़िर अमेरिका के दबाव में उसे झुकना होगा और ईरान को छोड़कर खाड़ी के बाक़ी देशों से कच्चा तेल आयात करना होगा। पहले अमेरिका ने संकेत दिया था कि वो भारत की ‘ज़रूरतों’ को समझता है और ईरान पर प्रतिबंध लगने के बाद वो भारत के लिए ‘वैकल्पिक व्यवस्था’ करेगा। 
 
लेकिन जैसा कि सभी जानते हैं कि अमेरिका एक ‘व्यापारिक देश’ है, जहां उसका फ़ायदा होता है वो वही काम करता है। अमेरिकी की सख्ती के बीच कहा जा रहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत में भारत अपने तर्क में कह सकता है कि चूंकि वह ईरान के चाबहार पोर्ट में निवेश के जरिए अफगानिस्तान में शांति स्थापित करने में मदद कर रहा है इसलिए भारत और ईरान के रिश्ते को इस नज़रिए से भी देखना चाहिए। लेकिन लगता नहीं है कि अमेरिका यह तर्क मानेगा, क्योंकि इसका तो बस एक ही उद्देश्य ईरान को ‘सबक’ सिखाना।
 
अब देखना होगा कि अमेरिकी राजनयिक के भारत आने के बाद क्या फ़ैसला निकलकर सामने आता है। लेकिन जानकारों का कहना है कि भारत अभी इस स्थिति में नहीं है कि वो अमेरिका को नाराज़ करे इसलिए भारत ईरान से कच्चा तेल आयात करने का फ़ैसला वापस ले सकता है।