आप भी जानिए कि आख़िर क्या है राहुकाल?
OCT 17 (WTN) – आपने कई बार राहुकाल के बारे में तो सुना होगा, लेकिन क्या आप जानते हैं आख़िर राहुकाल होता क्या है। यदि आप नहीं जानते हैं तो हम आपको बताते हैं कि राहुकाल क्या होता है और उसकी गणना कैसे की जाती है। पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब अमृत कलश लेकर भगवान धन्वन्तरि प्रकट हुए तो देवों और दानवों में पहले अमृतपान करने को लेकर विवाद हो गया। विवाद बढ़ता देख धन्वन्तरि ने भगवान विष्णु से इस झगड़े को समाप्त करने की प्रार्थना की।
दानव अमृत पीकर कहीं अमर न हो जाएं, यह सोच कर सृष्टि की रक्षा के लिए श्रीहरि की भी चिंता बढ़ने लगी। परिस्थिति को अति संवेदनशील मानते हुए भगावन विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया तथा दानवों को मोहित करके देवों और दानवों में अमृत का बराबर-बराबर बंटवारा करने का प्रस्ताव रखा। दैत्यों ने इस प्रस्ताव को तुरंत और सहर्ष मान लिया। अमृतपान के लिए दोनों पक्ष अलग-अलग बैठ गए।
इस बीच दैत्यों का सेनापति राहु, जो कि बहुत बुद्धिमान था, वह वेश बदल कर देवताओं की पंक्ति में जा बैठा। जैसे ही राहु ने अमृतपान किया, सूर्य और चंद्र ने उसे पहचान लिया, जिसके कारण भगावन श्रीहरि ने सुदर्शन चक्र से राहु का गला काट दिया, लेकिन इससे पहले की उसकी गर्दन धड़ से अलग होती, अमृत की कुछ बूंदें राहु के गले से नीचे उतर चुकी थीं और वह अमर हो चुका था। राहु के सिर कटने के समय को ही ‘राहुकाल’ कहा गया है और इसे ही अशुभ समय माना जाता है।
ज्योतिष में मान्यता है कि राहुकाल में आरम्भ किये गए कार्य-व्यापार में काफी दिक्कतों के बाद कामयाबी मिलती है, इसलिए इस काल में कोई भी नया काम शुरू नहीं करना चाहिए। राहु के सिर कटने की घटना सायंकाल की है, जिसे पूरे दिन के घंटा, मिनट का आठवां भाग माना गया।
कालगणना के अनुसार किसी भी जगह के सूर्योदय के समय से सप्ताह के पहले दिन सोमवार को दिनमान के आठवें भाग में से दूसरा भाग, शनिवार को दिनमान के आठवें भाग में से तीसरा भाग, शुक्रवार को आठवें भाग में से चौथा भाग, बुधवार को पांचवां भाग, गुरुवार को छठा भाग, मंगलवार को सातवां तथा रविवार को दिनमान का आठवां भाग राहुकाल होता है।
किसी बड़े तथा शुभ कार्य के आरम्भ के समय उस दिन के दिनमान का पूरा मान घण्टा, मिनट में निकालें, उसे आठ बराबर भागों में बांट कर स्थानीय सूर्योदय में जोड़ दें, आपको शुद्ध राहुकाल पता चल जाएगा।