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विश्लेषण: देश में बढ़ी धनाढ्यों की संख्या, तो क्या नोटबंदी का नहीं रहा नकारात्मक असर?

20 Oct 2018
देश में 10 लाख डॉलर से ज़्यादा सम्पत्ति वाले अमीरों की संख्या 3.43 लाख तक पहुंची
 
OCT 20 (WTN) – नोटबंदी के बाद कहा जा रहा था कि देश में हज़ारों की संख्या में फैक्ट्रियां बंद हो गईं जिसके कारण लाखों लोग बेरोज़गार हो गये, वहीं यह बात भी सामने आई थी कि देश नोटबंदी के बाद अमीरों को भी काफ़ी नुकसान उठना पड़ा है। लेकिन वित्तीय सेवा कम्पनी क्रेडिट सुइस की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार देश में अमीरों के संख्या में वृद्धि हुई है।
 
रिपोर्ट के मुताबिक़, जून 2017 से जून 2018 के बीच देश में दस लाख डॉलर से ज़्यादा की सम्पत्ति वाले अमीरों की संख्या में 7,300 की वृद्धि हुई है। इस वृद्धि के साथ ही इस साल जून के अंत में भारत में 10 लाख डॉलर से ज़्यादा सम्पत्ति वाले अमीरों की संख्या 3.43 लाख तक पहुंच गई है। यदि इनकी कुल सम्पत्ति की गणना की जाए तो यह 6,000 अरब डॉलर के बराबर होगी। 
 
सुइस की रिपोर्ट के अनुसार भारत सबसे ज़्यादा महिला अरबपतियों (एक अरब डॉलर से अधिक की समपत्ति) का देश है। रिपोर्ट के मुताबिक़ जून 2017 से जून 2018 के बीच दुनिया की 18.6 प्रतिशत महिला अरबपति भारत में थीं। लेकिन वैश्विक समृद्धि में भारतीय महिलाओं की हिस्सेदारी अन्य देशों के योगदान (40 प्रतिशत) के मुक़ाबले सिर्फ़ 20 से 30 प्रतिशत ही रही है।
 
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 2018 तक देश में दस लाख डॉलर या उससे अधिक की सम्पत्ति वाले अमीरों की कुल संख्या क़रीब 3,43,000 रहने का अनुमान है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पिछले एक साल में इस श्रेणी के लोगों की संख्या में 7,300 की वृद्धि हुई है। इन नये अमीरों में 3,400 लोगों की सम्पत्ति पांच करोड़ डॉलर और नए 1,500 लोगों की सम्पत्ति 10 करोड़ डॉलर से ज़्यादा है। यानि कि कहा जा सकता है कि देश में धीरे-धीरे करोड़पतियों की संख्या में इज़ाफा हो रहा है।
 
रिपोर्ट के मुताबिक़ इस अवधि में देश की सम्पत्ति में 2.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई और ये 6,000 अरब डॉलर के क़रीब रही। लेकिन इतना होने के बाद भी देश में प्रति व्यस्क सम्पत्ति 7,020 डॉलर पर ही बनी रही क्योंकि डॉलर के मुक़ाबले रुपया कमज़ोर रहा। रिपोर्ट में साफ़ कहा गया है कि साल 2023 तक भारत में अमीरों की संख्या और ग़रीबी-अमीरी के अंतर और बढ़ेगा। उस समय तक, ग़रीब और अमीर के बीच असमानता 53 प्रतिशत से ऊपर बढ़ने की बात कही जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में समृद्धि बढ़ी जरूर है, लेकिन इसमें हर व्यक्ति हिस्सेदार नहीं है। भारत में अब भी ग़रीबी एक बड़ी समस्या है। देश के 91 प्रतिशत युवाओं की कुल सम्पत्ति 20 हजार डॉलर से भी कम है। 
 
आने वाले समय में देश में 10 लाख डॉलर से ज़्यादा की सम्पत्ति वाले ऐसे अमीरों की संख्या 5,26,000 होगी जिनके पास कुल 8,800 अरब डॉलर की सम्पत्ति होगी और इसके कारण ग़रीब-अमीर के बीच अंतर गहरा होता जाएगा। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत में लोगों की व्यक्तिगत सम्पत्ति ज़मीन जायदाद और अन्य अचल सम्पत्तियों के रूप में है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में व्यक्ति पूंजी में सम्पत्ति और दूसरी रीयल एस्टेट सम्पत्ति का बड़ा योगदान है। पिछले 12 माह में देश की समृद्धि में इजाफ़े के आधार पर गैर-वित्तीय सम्पत्ति में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
 
बड़ा सवाल यही है कि जिस तरह से नोटबंदी को नकारात्मक कहा जा रहा था और कहा जा रहा था कि इससे उद्योग-धंधे चौपट हो गए हैं, क्या वो सभी नकारात्मक प्रचार था? क्योंकि यदि नोटबंदी के कारण उद्योग-धंधे बंद हो गये तो फ़िर देश में इतने अमीर लोग कहां से हो गये? वहीं यदि यह सम्पत्ति ज़मीन से जुड़ी है तो फ़िर लोगों के पास ज़मीन ख़रीदने रुपया कहां से आया? अमीरों की संख्या में हुई वृद्धि यह बताता है कि नोटबंदी का कोई वैसा नकारात्मक असर नहीं रहा है जैसा कि प्रचार विपक्ष करता रहा है।