HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

पूर्ण की जगह अंतरिम बजट पेश करेगी मोदी सरकार, जनता को ‘लुभाने’ की होगी कोशिश

16 Nov 2018
चुनाव से पहले अंतरिम बजट में मोदी सरकार की ‘परीक्षा’
 
NOV 16 (WTN) – भारत में अगले साल लोकसभा चुनाव होने जा रहे हैं, ऐसे में केन्द्र की मोदी सरकार अपना पूर्ण बजट पेश नहीं कर पाएगी। इसलिए अगले साल 2019 के बजट सत्र में मोदी सरकार अंतरिम बजट पेश करेगी। मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, इस बार के अंतरिम बजट में पिछले किसी भी अंतरिम बजट से ज़्यादा टैक्स के प्रस्ताव होंगे। सूत्रों के अनुसार उच्च अधिकारियों के साथ हुई बैठक में वित्तमंत्री ने इस बात पर चर्चा की है कि बजट भाषण में कौन-कौन से डायरेक्ट टैक्स प्रस्ताव हो सकते हैं।
 
सबसे पहले आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आखिर डायरेक्ट टैक्स क्या होता है। डायरेक्ट टैक्स वो टैक्स होता है जो कि जनता से सीधे वसूला जाता है। डायरेक्ट टैक्स में आयकर यानि कि इनकम टैक्स सबसे प्रमुख है। कहा जा रहा है कि अंतरिम बजट में इनकम टैक्स से जुड़े कई प्रस्तावों की घोषणा हो सकती है। जैसा कि आप जानते ही होंगे कि ज़्यादातर इनडायरेक्ट टैक्स जीएसटी में शामिल हो चुके हैं।
 
कहा जा रहा है कि वित्तमंत्री जेटली के भाषण पर अंतिम फ़ैसला जनवरी के मध्य में होगा। वहीं अंतरिम बजट 1 फरवरी 2019 के दिन पेश हो सकता है। आपका जानकारी के लिए बता दें कि इन दिनों अंतरिम बजट के नियमों पर चर्चा हो रही है। अभी तक जो परम्परा चली आ रही है उसके मुताबिक़ लोकसभा के चुनाव से एकदम पहले पेश किए गए जाने वाले बजट में पार्ट बी नहीं होता है और इसमें कुछ सीमित टैक्स प्रस्ताव ही होते हैं।
 
वित्त मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों के अनुसार ऐसा कोई कानून नहीं है जिसके चलते सरकार पूरा बजट पेश न कर सके। लेकिन राजनीतिक नैतिकता को देखते हुए सरकारें लोकसभा चुनाव के वर्ष वाले साल पूरा बजट पेश नहीं करती हैं। अगले साल होने वाले आम चुनाव को देखते हुए माना जा रहा है कि सरकार वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए अंतरिम बजट पेश करेगी। इसे लेखानुदान भी कहा जाता है। अब तक चुनावी साल के दौरान एक निश्चित अवधि के ज़रूरी सरकारी खर्चों के लिए यह लेखानुदान लाया जाता है।
 
पहले बजट को 28 फरवरी को पेश किया जाता था लेकिन मोदी सरकार ने साल 2017 से बजट को 28 फरवरी के बदले 1 फरवरी को पेश करने की परम्परा शुरू की है। इस कारण सरकार को संसद में बजट पास कराने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है और बजट के प्रावधान वित्तीय वर्ष एक अप्रैल से शुरु हो जाते हैं।
 
ऐसा नहीं है कि इस बार के अंतरिम बजट में पहली बार टैक्स प्रस्ताव दिये जा रहे हैं। इससे पहले भी अंतरिम बजट में टैक्स प्रस्ताव दिए गए हैं। साल 2014-15 के अंतरिम बजट में तत्तकालीन वित्तमंत्री पी.चिदंबरम ने विकास दर बढ़ाने के लिए एक्साइज ड्यूटी और कस्टम से जुड़े प्रस्ताव दिए थे। इसमें कई उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी घटाई गई थी।
 
2019-20 के अंतरिम बजट के लिए प्रक्रिया और तैयारी अक्टूबर से शुरू हो चुकी है। अभी वित्त मंत्रालय अलग-अलग विभाग से उनके खर्च के अनुमान पूछ रहा है। जनवरी में सरकार टैक्स प्रस्ताव, इंडस्ट्री के साथ बैठक और आय, व्यय पर पूरी चर्चा करेगी। जानकार ऐसी उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार का अंतरिम बजट पिछले सभी अंतरिम बजट से अलग होगा और चुनावी साल को देखते हुए आम जनता को राहत दी जा सकती है।