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विश्लेषण: मध्य प्रदेश में विधायकों की सम्पत्ति में हुई बेतहाशा वृद्धि

26 Nov 2018
विधानसभा चुनाव 2018: भाजपा प्रत्याशियों की सम्पत्ति 84.64 प्रतिशत, तो कांग्रेस प्रत्याशियों की सम्पत्ति 49.1 प्रतिशत बढ़ी

NOV 26 (WTN) – मध्य प्रदेश में एक आम व्यवसायी की आय पांच साल में ज़्यादा से ज़्यादा 10 से 20 प्रतिशत ही बढ़ पाती है, वहीं प्रकृति की मार झेल रहे किसानों की आय पर तो हमेशा संकट के बादल छाए रहते हैं। राज्य में किसानों की आय दोगुनी करने का वादा बस वादा ही रहा हो, लेकिन इस तरह का वादा करने वाले इस राज्य के विधायकों की आय रॉकेट की गति से बढ़ी है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मध्यप्रदेश इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स की रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि राज्य के विधायकों की सम्पत्ति में पिछले पांच सालों में बेतहाशा वृद्धि हुई है।
 
पिछले विधानसभा चुनाव-2013 में चुनाव लड़ चुके 167 उम्मीदवारों के शपथ पत्र का विश्लेषण करने के बाद जो आंकड़े सामने आएं हैं, वो बताते हैं कि चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की सम्पत्ति में जिस तेजी से वृद्धि हुई है वो चौकाने वाली है। क्योंकि जिस तेज़ी से उनकी आय में वृद्धि हुई है उस तेज़ी से एक सामान्य व्यापारी और किसान की आय में वृद्धि नहीं होती है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस इलेक्शन में चुनाव लड़ रहे 2 हज़ार 889 प्रत्याशियों में से 174 प्रत्याशी फ़िर से चुनाव लड़ रहे हैं यानि कि उन्होंने साल 2013 में भी चुनाव लड़ा था। हालांकि, खुरई से भाजपा प्रत्याशी गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह समेत सात उम्मीदवारों के शपथ पत्रों का विश्लेषण नहीं किया जा सका। इस तरह जब इन 167 उम्मीदवारों द्वारा निर्वाचन पत्र के साथ दिए गए शपथ पत्र का विश्लेषण किया गया, तो उसमें जो खुलासा हुआ है वो चौकाने वाला है। क्या भाजपा, क्या कांग्रेस और क्या बसपा, सभी पार्टियों के विधायकों और प्रत्याशियों की आय में काफ़ी वृद्धि हुई है।
 
167 प्रत्याशियों की आय का विश्लेषण के बाद पता चला है कि आय में सबसे ज़्यादा वृद्धि सिरमौर से भाजपा विधायक दिव्यराज सिंह को हुई है। दूध व्यवसाय और कृषि से जुड़े विधायक दिव्यराज सिंह की सम्पत्ति पिछले पांच सालों में 1397 प्रतिशत बढ़ी है। साल 2013 के चुनाव के समय दिव्यराज सिंह ने अपनी सम्पत्ति 4 करोड़ रुपये बताई थी, जोकि अब 2018 में दिये गये शपथ पत्र के अनुसार 62 करोड़ रुपये हो गई है।
 
इधर, हाटपिपल्या से भाजपा विधायक रहे और इस बार फ़िर से भाजपा उम्मीदवार दीपक जोशी की सम्पत्ति में 596 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि दीपक जोशी का व्यवसाय भी कृषि ही दर्शाया गया है। साल 2013 के विधानसभा चुनाव के समय दीपक जोशी ने अपनी सम्पत्ति 36 लाख रुपये घोषित की थी, जो कि साल 2018 में बढ़कर 2 करोड़ रुपये हो गई है।
 
सीहोर से निर्दलीय चुनाव जीते और फ़िर भाजपा में शामिल हुए विधायक सुदेश राय की सम्पत्ति 564 प्रतिशत बढ़ी है। पिछले विधानसभा चुनाव में निर्दलीय चुनाव जीते सुदेश राय ने अपनी सम्पत्ति 10 करोड़ रुपये घोषित की थी, लेकिन इस विधानसभा चुनाव में उन्होंने अपने सम्पत्ति 67 करोड़ रुपये दर्शायी है।
 
वहीं मैहर सीट से कांग्रेस के टिकट पर साल 2013 में चुनाव जीतने वाले नारायण त्रिपाठी की सम्पत्ति उस चुनाव के दौरान 15 लाख रुपये थे, लेकिन इस चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे नारायण त्रिपाठी की सम्पत्ति 89 लाख रुपये है, यानि कि उनकी सम्पत्ति में 473 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
 
एसोसिएशन फ़ॉर डेमोक्रेटिक रिफार्म्स के अनुसार इस बार फिर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों की साल 2013 में औसत सम्पत्ति 5.15 करोड़ रुपये थी, लेकिन इस साल 2018 में इनकी औसत सम्पत्ति 8.79 करोड़ रुपये हो गई है। यानि कि पिछले पांच सालों में इनकी सम्पत्ति में 3.64 करोड़ रुपयों की वृद्धि हुई है। इसे अगर प्रतिशत में देखा जाए तो यह वृद्धि 71 प्रतिशत है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भाजपा के 7 प्रत्याशी ऐसे भी हैं जिनकी सम्पत्ति का विश्लेषण नहीं किया जा सका है। साल 2013 और 2018 में जमा किए गए शपथ पत्र का विश्लेषण करते समय इन सातों प्रत्याशियों के शपथ पत्र के कई क़ाग़ज गायब मिले, तो इस तरह से स्कैन किए गए थे, जिससे वे देखे नहीं जा सके।
 
जिन सात भाजपा प्रत्याशियों की सम्पत्ति की जानकारी नहीं मिल सकी उनके नाम हैं, खुरई से प्रत्याशी भूपेन्द्र सिंह, जबलपुर-पूर्व से अंचल सोनकर, पनागर से सुशील कुमार तिवारी, सिहोरा से नंदनी मरावी, नरसिंहपुर से जालम सिंह पटेल, भोजपुर से सुरेन्द्र पटवा, रीवा से राजेन्द्र शुक्ला।
 
इन 167 प्रत्याशियों में भाजपा के 107, कांग्रेस से 53, बसपा के 4 और एक प्रत्याशी समाजवादी पार्टी का और दो निर्दलीय है। इनमें भाजपा के 107 प्रत्याशियों की सम्पत्ति में कुल वृद्धि 84.64 प्रतिशत हुई  है, तो वहीं कांग्रेस के 53 प्रत्याशियों की सम्पत्ति में 49.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
 
वहीं बसपा के 4 प्रत्याशियों की सम्पत्ति में 139.99 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। समाजवादी पार्टी के 1 उम्मीदवार की सम्पत्ति में 311.58 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, तो वहीं दो निर्दलीय प्रत्याशियों की सम्पत्ति में सिर्फ़ 11.97 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।