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विश्लेषण: जीडीपी के ‘संशोधित’ आंकड़ों से कांग्रेस को ‘घेरने’ की प्रधानमंत्री मोदी की ‘तैयारी’!

29 Nov 2018
जीडीपी का ‘बैक सीरीज’ डेटा जारी, यूपीए कार्यकाल के जीडीपी के संशोधित आंकड़ों से कांग्रेस ‘नाराज़’

NOV 29 (WTN) – मोदी सरकार की एक चाल से यूपीए सरकार के कथित जीडीपी वृद्धि के दावों पर सवालिया निशान लगने लगे हैं और इसके बाद से कांग्रेस मोदी सरकार पर निशाना साध रही है। मोदी सरकार की नई चाल से पूर्व वित्त मंत्री पी चिदम्बरम खासे नाराज़ हैं। दरअसल केन्द्र की मोदी सरकार ने जीडीपी के बैक सीरीज डेटा को जारी किया है और इसमें ज़्यादा सेक्टर शामिल किए गए हैं। मोदी सरकार का तर्क कि इससे जीडीपी की गणना ठीक तरीके से हो और देश के सामने सही आंकड़े आएंगे। लेकिन मोदी सरकार के इस काम से कांग्रेस भड़की हुई है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मोदी सरकार ने आधार वर्ष 2004-05 के बदले जीडीपी का आधार वर्ष बदलकर 2011-2012 कर दिया है। इन आंकडों में ताजा सर्वे और सेंसस के डेटा को भी शामिल किया गया है। इसी बात को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री पी.चिदम्बरम बेहद नाराज़ हैं, और इसे लेकर उन्होंने नीति आयोग पर जमकर निशाना साधा है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार और MOSPI सेक्रेटरी प्रवीण श्रीवास्तव ने कल यानि कि बुधवार को जीडीपी का संशोधित आंकड़ा जारी किया था, जिसमें आंकड़ों को 2004- 05 के आधार वर्ष के बजाय 2011- 12 के आधार वर्ष के हिसाब से संशोधित किया गया है। इसी बात से गुस्साए पी.चिदम्बरम ने इसको लेकर एक ट्वीट किया, जिसमें उन्होंने लिखा, “नीति आयोग के संशोधित GDP आंकड़े एक मजाक हैं। वे एक बुरा मजाक हैं, असल में वे एक बुरे मजाक से भी बदतर हैं।”
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इसके अलावा इसमें नई सीरीज के रिटेल और थोक महंगाई के आंकड़े भी जोड़े गए हैं। इसमें स्टॉक ब्रोकर, म्यूचुअल फण्ड कम्पनी, सेबी, पीएफ़आरडीए और आईआरडीए को भी शामिल किया गया है। राजीव कुमार के अनुसार 2004-05 से आधार वर्ष 2011-12 करने से एक कमेटी ने जीडीपी में 3 लाख करोड़ का अंतर बताया था।
 
इस नई सीरीज के हिसाब से वित्तवर्ष 2015 के लिए जीडीपी 7.4 प्रतिशत, वित्तवर्ष 2016 के लिए 8.2 प्रतिशत और वित्तवर्ष 2017 के लिए 7.1 प्रतिशत है। वहीं वित्तवर्ष 2006 में पुरानी सीरीज के हिसाब से 9.3 प्रतिशत जीडीपी ग्रोथ थी जो नई सीरीज में 7.9 प्रतिशत है। वहीं वित्तवर्ष 2007 में पुरानी सीरीज के हिसाब से जीडीपी ग्रोथ 9.3 प्रतिशत थी वो घटकर 8.1 प्रतिशत हो गई। वित्तवर्ष 2008 में पुरानी सीरीज में जीडीपी 9.8 प्रतिशत थी जो कि नई सीरीज में 7.7 प्रतिशत हो गई।
 
वहीं वित्तवर्ष 2009 में जीडीपी की दर पुरानी सीरीज में 3.9 प्रतिथत और नई सीरीज में 3.1 प्रतिशत है तो वित्तवर्ष 2010 में पुरानी सीरीज के हिसाब से जीडीपी की दर 8.5 प्रतिशत थी तो नई सीरीज में 7.9  प्रतिशत हो गई। वहीं वित्तवर्ष 2011 में पुरानी सीरीज के हिसाब से जीडीपी की दर 10.3 प्रतिशत थी जो नई सीरीज में 8.5 प्रतिशत हो गई। इसी तरह वित्तवर्ष 2012 में जीडीपी की दर पुरानी सीरीज के हिसाब से 6.6 प्रतिशथ थी जो कि नई सीरीज के हिसाब से 5.2 प्रतिशत हो गई।
 
दरअसल पी.चिदम्बरम इसलिए नाराज़ हैं क्योंकि जीडीपी के आंकलन के लिए नए आधार वर्ष को आधार बनाने और ज़्यादा सेक्टर शामिल किये जाने से यूपीए के दस सालों के कार्यकाल के दौरान जारी जीडीपी के आंकड़ों में कमी दिखाई देती है। हो सकता है कि मोदी सरकार का इरादा यह साबित करने का हो कि जितनी जीडीपी वृद्धि के दावे यूपीए सरकार के दौरान थी, वे सभी वास्तव में कम थे जबकि नया आधार वर्ष लागू करने और ज़्यादा सेक्टर शामिल किये जाने से जीडीपी के वास्तविक आंकड़े सामने आ रहे हैं।
 
इन्हीं आंकड़ों के साथ मोदी सरकार 2019 के लोकसभा चुनाव में जाना चाहेगी ताकि जनता के सामने यह साबित कर सके कि दरअसल जीडीपी के जो बड़े-बड़े दावे यूपीए सरकार द्वारा दिखाए जा रहे थे उनमें वास्तविकता में कमी है। मोदी सरकार की इस नई आर्थिक चाल से गुस्साई कांग्रेस अब देखना है कि क्या उत्तर देती है और किस तरह से जनता के सामने अपना पक्ष रखती है।