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पाकिस्तान की करतूत: आतंकियों को ‘पनाह’, अल्पसंख्यकों पर ‘जुल्म’

18 Dec 2018
पाकिस्तान में सेना ‘दबा’ रही है लोकतंत्र की आवाज़ें

DEC 18 (WTN) – पाकिस्तान में सेना की तानाशाही कोई नई बात नहीं है। इतिहास गवाह रहा है कि पाकिस्तान में चुनी हुई सरकारों को हटाकर वहां पर सेना ने अपना शासन चलाया है। पूरी दुनिया में दिखाने के लिए तो पाकिस्तान में लोकतंत्र है, लेकिन हक़ीकत है कि पाकिस्तान में सेना की मर्जी के बिना वहां की सरकार कोई भी फ़ैसला ले नहीं सकती है। सभी जानते हैं कि पाकिस्तान में सालों से लोकतंत्र की आवाज़ को दबाया जाता रहा है। बलूचिस्तान हो या फ़िर पाक अधिकृत कश्मीर, हर कहीं पर पाकिस्तान की सेना द्वारा लोकतंत्र की कुचलने का काम किया जाता है ताक़ि उनकी तानाशाही बदस्तूर जारी रह सके।

वैसे तो पाकिस्तान पर लोकतंत्र की आवाज़ को दबाने का आरोप लगता रहता है, लेकिन अब आरोप लगाया है पाकिस्तान के पूर्व राजनयिक हुसैन हक्‍कानी ने। पाकिस्तान के लोकतंत्र पर निशाना साधते हुए अमेरिका में पाकिस्‍तान के राजदूत रह चुके हक्‍कानी ने कहा, “इस्‍लामाबाद में बस नाम का लोकतंत्र है, वास्‍तव में नहीं।” हक्कानी ने पाकिस्‍तान पर बलूच, सिंधी और अन्‍य समुदाय के लोगों की आवाज़ कुचलने और उनकी पहचान मिटाने की कोशिश का गम्भीर आरोप लगाया।
 
पूर्व राजनयिक हुसैन हक्‍कानी वॉशिंगटन में 'पाकिस्‍तान में लोकतंत्र, मानवाधिकार और आतंकवाद के खात्‍मे'  पर आयोजित एक कॉन्फ्रेस को सम्बोधित कर रहे थे, उस दौरान उन्होंने वहां पर यह बात कही कि पाकिस्‍तान में केवल नाम का लोकतंत्र है, वास्तव में नहीं। इस दौरान उन्‍होंने पाकिस्‍तान में अल्‍पसंख्‍यकों को लगातार मिल रही धमकियों और देश में मानवाधिकारों की ख़राब स्थिति को लेकर चिंता जाहिर की।
 
हक्कानी ने कहा, “पाकिस्‍तान में सिंधी और बलूच भाषाई प्रांतों में रहने वाले लोग दमन के शिकार हैं। देश में समानता के नाम पर उनकी संस्‍कृति और भाषाओं को खत्‍म करने की कोशिश की जा रही है।” पूर्व राजनियक हक्कानी ने पाकिस्‍तान को चेताया कि कोई भी देश विविधता को ख़त्‍म कर मज़बूत नहीं बन सकता, बल्कि इन्‍हें अपनाकर ही वह ताक़तवर हो सकता है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस कॉन्‍फ्रेंस में मुम्बई हमले के मास्‍टरमाइंड हाफ़िज़ सईद के संगठन जमात-उद-दावा और तहरीक-ए-लबेक जैसे चरमपंथी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की भी उठी। इस कॉन्फ्रेंस में हक्कानी ने कहा कि पाकिस्‍तान के लोगों को आतंकी संगठनों के कारण भारी क़ीमत चुकानी पड़ रही है। पेशावर के सैनिक स्‍कूल में 16 दिसम्बर, 2014 को हुए हमले का जिक्र करते हुए पूर्व राजनयिक ने कहा, “हम ऐसा देश चाहते हैं, जहां बच्‍चे बिना किसी खौफ़ के पूरी सुरक्षा के साथ स्‍कूल में पढ़ाई के लिए जा सकें।”
 
दरअसल पाकिस्तान में आतंकियों और आतंक का संरक्षण कोई नई बात नहीं है। सालों से वहां की सरकारें आतंकियों के साथ खड़ी नज़र आती है। आतंकवाद के प्रति पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान कितने गम्भीर है इसका पर्दाफाश तब हुआ, जब उनके गृह राज्यमंत्री एक वीडियो में मुम्बई आतंकी हमले के षड़यंत्रकारी हाफ़िज़ सईद और उनकी पार्टी के संरक्षण का संकल्प लेते दिखाई दिए।
 
एक लीक वीडियो में पाकिस्तान के गृह राज्यमंत्री शहरयार अफरीदी मिल्ली मुस्लिम लीग (एमएमएल) के नेताओं से बात करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इस बातचीत के दौरान जब उनका ध्यान अमेरिकी दबाव में चुनाव आयोग द्वारा हाफ़िज़ सईद की पार्टी का एक राजनीतिक दल के रूप में पंजीकरण नहीं करने और आयोग द्वारा उसे आतंकवादी संगठन घोषित करने की योजना की तरफ़ ध्यान दिलाया गया, तो पाकिस्तान के मंत्री ने साफ़ कहा, “हम ऐसा नहीं होने देंगे।”
 
अफरीदी ने कहा, “जब तक हम सरकार में हैं, हाफ़िज़ सईद सहित और वे सभी जो पाकिस्तान और उसकी भलाई के लिए आवाज़ उठा रहे हैं, हम उनके साथ हैं। यह हमारा भरोसा है। मैं आपसे नेशनल असेम्बली आकर यह देखने की गुजारिश करता हूं कि हम सही राह पर चल रहे लोगों का समर्थन कर रहे हैं या नहीं।”
 
जिस तरह से पाकिस्तान में सेना पर्दे के पीछे राजनीति करती है और आतंकियों को पनाह देती आई है उससे साफ़ ज़ाहिर होता है कि पाकिस्तान में लोकतंत्र बस दुनिया को दिखाने के लिए ही है। वास्तव में पाकिस्तान में वहां की सेना के हाथ में ही सरकार का नियंत्रण है और पाकिस्तान की सेना के दम पर ही वहां पर आतंकियों को पनाह मिली हुई है। पूरी दुनिया के सामने धीरे-धीरे पाकिस्तान की असलियत ज़ाहिर होती जा रही है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन हो रहा है और आतंकियों को पनाह दी जा रही है।