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विश्लेषण: विस्तार से जानिए कि क्या है आख़िर कम्प्यूटर की जांच का आदेश?

21 Dec 2018
कम्प्यूटर डाटा चैकिंग के सरकार के आदेश का ‘विरोध’ शुरू, विपक्ष ने जताई सर्विलांस स्टेट की ‘आशंका’!
 

DEC 21 (WTN) – केन्द्र की मोदी सरकार के एक फ़ैसले के बाद 'बवाल' शुरू हो गया है, फ़ैसले के बाद कहा जा रहा है कि सरकार निजता के अधिकार पर 'कुठाराघात' करना चाह रही है। दरअसल गृह मंत्रालय के एक आदेश के बाद से निजता के अधिकार पर सवाल खड़े होने लगे हैं ऐसा इसलिए क्योंकि गृह मंत्रालय के आदेश के तहत सरकार ने 10 सुरक्षा एजेंसियों को किसी भी कम्प्यूटर का डेटा 'खंगालने' का अधिकार दे दिया है।
 
20 दिसम्बर को जारी इस आदेश में कहा गया है कि ये सुरक्षा एवं खुफिया एजेंसियां इंटरसेप्शन, निगरानी एवं डिक्रिप्शन के मक़सद से किसी भी कम्प्यूटर के डेटा की 'जांच' कर सकती हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि गृह मंत्रालय ने यह आदेश सूचना प्रौद्योगिकी अधिनयम,2000 के सेक्शन 69 (1) के तहत जारी किया है। इसमें वो सारी बातें हैं जो कि अभिव्यक्ति की आज़ादी पर पाबंदी लगाने वाले आर्टिकल 19 (2) के तहत आती हैं।

गृह मंत्रालय ने जिन 10 एजेंसियों को यह अधिकार दिये हैं वे इस तरह से हैं;  इंटेलिजेंस ब्यूरो, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, प्रवर्तन निदेशालय, सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ डायरेक्ट टैक्सेज, डायरक्टेरेट ऑफ़ रेवन्यू इंटेलिजेंस, सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन, नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी, कैबिनेट सेक्रेटेरिएट (रॉ), डायरेक्टरेट ऑफ़ सिग्नल इंटेलिजेंस और दिल्ली पुलिस कमिश्नर। सरकार के इस आदेश में यह साफ़ कहा गया है कि जांच के समय इन एजेंसियों का पूरा सहयोग न करने पर सात साल की सज़ा और जुर्माना भी हो सकता है।
 
यानि कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आईबी और दिल्ली पुलिस कमिश्नर समेत कुल 10 एजेंसियों को किसी भी कम्प्यूटर की 'निगरानी' करने का अधिकार दिया है। इसमें कम्प्यूटर आधारित कॉल और फ़ोन का डेटा भी शामिल है। इसके लिए अब केंद्रीय गृह मंत्रालय की मंज़ूरी नहीं लेनी पड़ेगी। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पहले इसके लिए बाक़ायदा मंज़ूरी लेनी पड़ती थी।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस निगरानी की सीमा में कम्प्यूटर, इंटरनेट और फ़ोन पर आप लगभग जो भी उपयोग करते हैं वो सब हैं। फ़ोन के मामले में सर्विस प्रोवाइडर को मांगे जाने पर डेटा के इस्तेमाल की पूरी जानकारी देनी होगी। वैसे फ़ोन कॉल्स को लेकर स्थिति अभी साफ़ नहीं है। लेकिन अब सरकार और उसकी जांच एजेंसियां आपके कम्प्यूटर के डेटा, उससे होने वाले किसी तरह के सोशल मीडिया के इस्तेमाल से लेकर किसी तरह के कॉल तक आसानी से पहुंच सकती है।
 
इधर केन्द्र सरकार के इस आदेश का विरोध होना शुरू हो गया है। विपक्ष ने इसे निजता के अधिकार पर हमला करार दिया है। सरकार के इस फैसले पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आरजेडी और एआईएमआईएम ने विरोध किया है। कांग्रेस नेता आनंद शर्मा ने कहा कि सरकार भारत को सर्विलांस स्टेट बनाना चाहती है।

इस बारे में कांग्रेस नेता आनंद शर्मा का कहना है कि यह निजता के अधिकार पर हमला है। उन्होंने आगे कहा,"यह काफी गम्भीर मामला है। इस आदेश के जरिए भाजपा की सरकार सभी लोगों की निगरानी करना चाहती है। यह मौलिक एवं निजता के अधिकार पर हमला है। हम इसका विरोध करते हैं।”

वहीं एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, "किसे पता था कि घर घर मोदी का मतलब क्या था?"

केन्द्र की मोदी सरकार ने आख़िर ऐसा फ़ैसला क्यों लिया इसके पीछे ज़रूर कोई ना कोई मक़सद तो रहा ही होगा। क्योंकि मोदी सरकार जानती है कि यदि उनका यह आदेश अभिव्यक्ति की आज़ादी के ख़िलाफ़ है, तो इसे तुरन्त ही कोर्ट में चुनौती दी जाएगी। हो सकता है कि देश की सुरक्षा को मद्देनज़र रखते हुए मोदी सरकार ने यह फ़ैसला लिया हो। साथ ही यदि आपने कुछ भी ग़लत नहीं किया है, तो फ़िर आपको डरने की क्या ज़रूरत है और निजता का अधिकार देश की सुरक्षा से बढ़कर नहीं है।