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विश्लेषण: किसानों की कर्ज़ माफ़ी और मुख्यमंत्री कमलनाथ की ‘कोशिशें’

22 Dec 2018
किसान कर्ज़ माफ़ी पर ‘तक़रार’; भाजपा ने बताया धोखा, आंदोलन की दी ‘चेतावनी’
 
DEC 22 (WTN) – मध्य प्रदेश में लगातार 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में प्रचार के दौरान किसानों की कर्ज़ माफ़ी का 'वादा' किया था, कर्ज़ की मार से परेशान किसानों ने कांग्रेस के वादे पर विश्वास किया और किसानों ने कांग्रेस के पक्ष में वोटिंग की जिसके बाद एक कड़ी टक्कर में कांग्रेस ने भाजपा को शिकस्त दी। मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही कमलनाथ ने किसानों की कर्ज़ माफ़ी की फ़ाइल पर बाक़ायदा हस्ताक्षर भी कर दिये।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इसी साल सात जून को मंदसौर जिले की पिपल्या मंडी में एक रैली में घोषणा की थी कि अगर मध्य प्रदेश में उनकी सरकार आएगी, तो वह 10 दिन के अंदर किसानों का कर्ज़ माफ़ कर देगी। राहुल गांधी द्वारा कही गई किसानों की कर्ज़ माफ़ी की बात को कांग्रेस ने बाक़ायदा अपने 'वचन पत्र' में शामिल किया।

अब जबकि मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बन गई है, तो कमलनाथ सरकार की कोशिश है कि किसानों की कर्ज़ माफ़ी का वादा जल्द से जल्द पूरा किया जाए। इसलिए प्रदेश में किसानों की कर्ज़माफ़ी की तैयारी तेज़ होती दिख रही हैं। कहा जा रहा है कि कमलनाथ सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में किसानों की कर्ज़ माफ़ी की रूपरेखा रखी जाएगी। किसानों की कर्ज़ माफ़ी के इस महत्वपूर्ण काम के लिए कृषि, सहकारिता और वित्त विभाग योजना तैयार करने में रात-दिन एक किये हुए हैं।
 
जानकारी के मुताबिक़, किसानों की कर्ज़ माफ़ी के लिए डेटा एकत्रित करने के लिए बाक़ायदा एक वेब पोर्टल बनाया जाएगा। इस वेबपोर्टल को बनाने में आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए मण्डी बोर्ड के प्रबंध संचालक की अध्यक्षता में कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में आयुक्त-भू-अभिलेख, कृषि संचालक, मेपआईटी के सीईओ, राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी के समन्वयक, अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक, संयुक्त संचालक संस्थागत वित्त और आईटी अधिकारियों को रखा गया है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पंजाब राज्य में वहां की कांग्रेस सरकार ने भी किसानों की कर्ज़ माफ़ी की है, तो ऐसे में मध्य प्रदेश की एक टीम पंजाब सरकार की तैयारियों का जायजा लेकर वापस लौट आई है और उसी के आधार पर किसानों की कर्ज़ माफ़ी की योजना को फ़ाइनल किया जा सकता है। जानकारी के मुताबिक़, किसानों की कर्ज़ माफ़ी की पूरी जानकारी वेब पोर्टल में दर्ज की जाएगी। इसमें किसानों का रकबा, कर्ज़ का पूरा ब्यौरा, आधार नम्बर, बैंक खाता नम्बर समेत अन्य जानकारियां जुटाई जाएंगी।
 
इधर कमलनाथ सरकार किसानों की कर्ज़माफ़ी को योजना बनाने में लगी हुई है, तो वहीं भाजपा किसान मोर्चा ने कांग्रेस सरकार को 10 दिन का अल्टीमेटम देते हुए किसानों की कर्ज़ माफ़ी की स्थिति की समीक्षा करने और किसानों को लाभ देने की मांग की है। भाजपा ने चेतावनी दी है कि यदि कर्ज़ माफ़ी में किसानों की अनदेखी की गई, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
 
इधर कांग्रेस पर वादा ख़िलाफ़ी का आरोप लगाते हुए किसानों ने कर्ज़ माफ़ी योजना पर सवाल उठाना शुरू कर दिये हैं। किसानों का कहना है कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के पहले अपने 'वचन पत्र' में कहा था कि ‘सभी’ किसानों का ‘चालू’ और ‘कालातित’ दो लाख रुपए तक का कर्ज़ माफ़ किया जाएगा, लेकिन प्रदेश में कांग्रस सरकार बनने के बाद कर्ज़ माफ़ी में 'नियम' और 'शर्तें' लगा दी गईं हैं। किसानों का कहना है कि 31 मार्च 2018 के पहले का ‘अल्पकालीन कालातित कृषि ऋण’ ही माफ़ किया जा रहा है जबकि ‘वचन पत्र’ में किसानों के 'सभी' तरह के कर्ज़ माफ़ी की बात कही गई थी।
 
अब देखना होगा कि भाजपा और किसानों के सवालों के क्या जवाब कांग्रेस देती है। क्योंकि साफ़ है कि कांग्रेस ने अपने ‘वचन पत्र’ में 'सभी' किसानों की कर्ज़ माफ़ी का वायदा किया था, साथ ही उसमें साफ़ लिखा था कि ‘चालू’ और ‘कालातित’ दोनों तरह के कर्ज़ माफ़ किये जाएंगे। यदि कांग्रेस सरकार कर्ज़ माफ़ी में 'नियम' और 'शर्तें' लागू करती है, तो एक तरह से यह 'वचन पत्र' के ख़िलाफ़ जाने वाली बात होगी।
 
यदि कांग्रेस सभी किसानों का कर्ज़ माफ़ करने में 'असफल' रहती है, तो कहा जा रहा है कि भाजपा की योजना है कि इस मुद्दे को लोकसभा चुनाव तक जोरशोर से उठाया जाए ताकि भाजपा के मुताबिक़ कांग्रेस ने किसानों के साथ जो 'वादा ख़िलाफ़ी' की है उसे प्रचारित किया जा सके। अब देखना होगा कि भाजपा के उग्र आंदोलनों और प्रदर्शनों का जवाब कांग्रेस कैसे देती है।