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कमलनाथ मंत्रीमण्डल के गठन के बाद; कहीं खुशी, कहीं ग़म!

26 Dec 2018
सामने आया मंत्री ना बन पाने का ‘दर्द’, शपथग्रहण से ‘नदारद’ रहे कई विधायक

DEC 26 (WTN) – मध्य प्रदेश में कमलनाथ कैबिनेट का गठन होने के बाद से समीक्षाओं का दौर जारी है। मंत्री बनने के बाद जहां कुछ विधायक खुश हैं तो मंत्री ना बनाए जाने से कुछ विधायक नाराज़ बताए जा रहे हैं। मंगलवार को कमलनाथ मंत्रिमण्डल के 28 कैबिनेट मंत्रियों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। जैसा कि आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को खुद के दम पर बहुमत नहीं मिल सका है, जिसके बाद निर्दलियों, बसपा और सपा के समर्थन से सरकार चला रहे कमलनाथ ने अपने मंत्रिमण्डल के गठन में क्षेत्रीय, जातीय और गुटीय संतुलन बनाने की पूरी कोशिश की है, जिसमें वे काफ़ी हद तक वे सफ़ल भी रहे हैं लेकिन फ़िर भी मंत्री ना बनाए जाने से नाराज़ विधायकों की संख्या काफ़ी है।
 
यदि कमलनाथ के मंत्रिमण्डल को देखा जाए तो साफ़ ज़ाहिर होता है कि मालवा-निमाड़ और ग्वालियर-चम्बल क्षेत्र से कांग्रेस को मिले समर्थन को देखते हुए कमलनाथ ने अपने मंत्रिमण्डल में इन क्षेत्रों के विधायकों को ख़ासी तरजीह दी है। इतना ही नहीं, कमलनाथ ने जातिगत समीकरण पर भी पूरा ध्यान देते हुए मंत्रिमण्डल का गठन किया है।
 
मुख्यमंत्री कमलनाथ ने अपने मंत्रिमण्डल में पहली बार में 28 कैबिनेट मंत्रियों को शामिल करने के लिए क़रीब पांच दिनों तक मेहनत की। गुना सांसद सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से चर्चा के बाद कमलनाथ ने मंत्रियों के नाम फ़ायनल किये।
 
लेकिन कमलनाथ मंत्रिमण्डल में वरिष्ठ विधायकों को गौरमौजूदगी से कारण सवाल उठने शुरू हो गये हैं। वरिष्ठ कांग्रेस विधायक लक्ष्मण सिंह, केपी सिंह, बिसाहूलाल सिंह, विक्रम सिंह नातीराजा, घनश्याम सिंह और दीपक सक्सेना जैसे कई वरिष्ठ नेताओं को कमलनाथ ने अपने मंत्रिमण्डल में जगह नहीं दी है। मंत्रिमण्डल में शामिल नहीं किये जाने पर कुछ वरिष्ठ विधायक नाराज़ बताए जाते हैं, लेकिन वे अभी अपनी नाराज़गी 'दबाए' हुए हैं।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि मंत्री ना बनाए जाने से कथित नाराज़ कुछ विधायक शपथ ग्रहण समारोह में शामिल ही नहीं हुए। इधर मीडिया से मिली जानकारी के मुताबिक़, शपथ ग्रहण समारोह के दौरान निर्दलीय विधायकों के साथ बसपा और सपा विधायकों ने बैठक की है जिसके बाद राज्य की राजनीति में नये समीकरणों की चर्चा है। कहा जाता है कि मंत्री ना बनाए जाने से बुरहानपुर से जीते निर्दलीय विधायक ठा. सुरेंद्र सिंह शेरा भैया नाराज़ हैं।
 
जानकारी के अनुसार, कमलनाथ मंत्रिमण्डल के 28 मंत्री जब शपथ ले रहे थे, तब तीनों निर्दलीय विधायक बुरहानपुर के ठा. सुरेंद्र सिंह शेरा भैया, भगवानपुरा के केदार डाबर और सुसनेर के विक्रम सिंह राणा गुड्डू भैया, बसपा विधायक संजीव सिंह और रामबाई सिंह और समाजवादी पार्टी के विधायक राजेश शुक्ला एक होटल में बैठक कर रहे थे।
 
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कांग्रेस ने दो निर्दलियों विधायकों, प्रदीप जायसवाल और ठा. सुरेन्द्र सिंह को मंत्री पद दिये जाने की बात कही थी। कहा जा रहा है कि सिर्फ़ निर्दलीय विधायक प्रदीप जायसवाल को मंत्री बनाए जाने पर ठा. सुरेनद्र सिंह शेरा नाराज़ बताए जाते हैं।
 
इधर निर्दलीय विधायकों के साथ सपा और बसपा के विधायकों की बैठक पर सपा-बसपा विधायकों का कहना है कि वे तो सरकार को बाहर से समर्थन दे रहे हैं इसलिए मंत्रिमण्डल से उनको कोई मतलब नहीं है। वहीं कांग्रेस के कई विधायक मंत्री के दावेदार थे, लेकिन जब उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया तो वे शपथ ग्रहण समारोह में ही नहीं आए। मंत्री बनने की आस लगाए कांग्रेस विधायक बिसाहूलाल सिंह, हरदीप सिंह डंग, झूमा सोलंकी और हिना कांवरे आदि शपथ ग्रहण समारोह में दिखाई नहीं दिए।
 
मंत्री ना बनाए जाने से नाराज़ कांग्रेस विधायकों और निर्दलीय विधायकों को मनाना कमलनाथ के लिए एक बड़ी चुनौती है। क्योंकि कांग्रेस के पास पूर्ण बहुमत नहीं है और वो निर्दलियों के समर्थन पर सरकार चला रही है, ऐसे में देखना होगा कि कथित नाराज़ चल रहे बुरहानपुर से निर्दलीय विधायक ठा सुरेन्द्र सिंह के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी के विधायकों वो किस तरह से तरह से शांत रख पाते हैं। नियमनुसार कमलनाथ मंत्रिमण्डल का अभी विस्तार हो सकता है ऐसे में देखना होगा कि कितने जल्दी कमलनाथ नाराज़ विधायकों को मंत्री बनाकर उन्हें खुश रख पाते हैं।