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मध्य प्रदेश में ‘आखिरकार’ हुआ मंत्रियों को विभागों का बंटवारा; मालवा निमाड़ को मिले ‘महत्वपूर्ण’ विभाग

29 Dec 2018
गृह, वन, उच्च शिक्षा, ऊर्जा जल संसाधन, चिकित्सा और पीडब्ल्यूडी जैसे महत्वपूर्ण विभाग मालवा-निमाड़ के खाते में

DEC 29 (WTN) – मध्य प्रदेश में लगातार तीन चुनाव हारने के बाद कांग्रेस ने बाहरी समर्थन से राज्य में सरकार तो बना ली, मुख्यमंत्री और मंत्रियों ने शपथ भी ले ली, लेकिन मंत्रियों के विभागों के वितरण में मुख्यमंत्री कमलनाथ को काफ़ी मशक्कत करनी पड़ी। कहा जा रहा है था कि अपने समर्थकों के साथ-साथ दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे पर कमलनाथ को इतनी माथापच्ची करना पड़ी।

आखिरकार लम्बी खींचतान के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ ने मंत्रियों के लिए विभागों का बंटवारा कर ही दिया, लेकिन दिग्गजों की पसंद के साथ-साथ मंत्रालय के लिए खींचतान और विभागों को लेकर मंत्रियों के दावों के बाद जो सूची आई वो चौंकाने वाली रही। लेकिन इस सबके बीच सबसे खास बात यह रही कि मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फ़िर से मालवा-निमाड़ का रूतबा बढ़ता दिखाई दिया और कमलनाथ मंत्रिमण्डल में कई महत्वपूर्ण विभाग मालवा निमाड़ के खाते में आए।
 
यदि सभी 28 मंत्रियों को मिले विभागों की तरफ़ गौर किया जाए तो साफ़ कहा जा सकता है कि मंत्रियों को उनके पसंद के विभाग शायद नहीं मिले हैं। लेकिन इस सबसे बीच, राज्य में कांग्रेस की जीत का कारण बने मालवा-निमाड़ का पलड़ा मंत्रिमण्डल गठन में और उसके बाद विभागों के वितरण में साफ़ तौर पर भारी रहा। मालवा-निमाड़ के मंत्रियों को महत्वपूर्ण विभाग मिले हैं। गृह, वन, उच्च शिक्षा, ऊर्जा, जल संसाधन, चिकित्सा, पीडब्ल्यूडी, पीएचई, नगरीय प्रशासन, नर्मदा घाटी, पर्यावरण और पर्यटन जैसे बड़े मंत्रालय मालवा-निमाड़ के खाते में आए हैं।
 
जैसा कि आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश में कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और ज्योतिरादित्य सिंधिया के रूप में कांग्रेस और सत्ता में तीन खेमें कहे जा सकते हैं। कहा जा रहा था कि सत्ता के तीनों खेमों के बीच अपने-अपने समर्थक मंत्रियों को महत्वपूर्ण विभाग दिलवाने के लिए जोर-अजमाइश चल रही थी और इसी कारण मंत्रियों के विभाग वितरण में देरी हो रही थी। मुख्यमंत्री ना बन पाने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया चाह रहे थे कि उनके समर्थकों को महत्वपूर्ण विभाग मिले, तो वहीं दिग्विजय सिंह भी पूरी कोशिश में थे कि उनके समर्थक मंत्रियों की उपेक्षा ना हो।
 
कहा जा रहा है कि मंत्रियों के विभागों के वितरण की बात जब भोपाल में नहीं बनती दिखाई दी तो मामला दिल्ली पर छोड़ दिया गया। कहा जाता है कि केन्द्रीय स्तर से मिले सुझाव और निर्देश के बाद मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में जाने के निर्देश दे दिए गए जिसके बाद शुक्रवार रात अचानक सूची जारी कर दी गई।
 
हो सकता है कि विभागों के बंटवारे में भले ही मंत्रियों की पसंद को तरजीह नहीं दी गई हो, लेकिन दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में मंत्री रह चुके मंत्रियों को महत्वपूर्ण विभाग सौंपे गए हैं। जैसे शाजापुर के वरिष्ठ विधायक हुकुमसिंह कराड़ा को जल संसाधन विभाग दिया गया है। वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा ने नगरीय प्रशासन विभाग मांगा था लेकिन उन्हें लोकनिर्माण और पर्यावरण विभाग दिया गया है।
 
कहा जाता है कि तुलसी सिलावट के लिए गृह विभाग मांगा गया था, लेकिन उन्हें पीएचई और परिवार कल्याण विभाग दिया गया है। युवा मंत्री जीतू पटवारी जनसम्पर्क विभाग चाहते थे, लेकिन उन्हें खेल एवं युवा कल्याण और उच्च शिक्षा विभाग दिया गया है।
 
इसी तरह पुराने मंत्री रहे बाला बच्चन को गृह और जेल जैसे महत्वपूर्ण विभाग दिए गए हैं। गंधवानी से विधायक उमंग सिंगार को वन विभाग दिया गया है, तो महेश्वर से विधायक चुनी गईं पूर्व मंत्री विजयलक्ष्मी साधौ को चिकित्सा शिक्षा, आयुष और संस्कृति विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
 
कुक्षी विधायक सुरेंद्रसिंह बघेल हनी को नर्मदा घाटी विकास और पर्यटन विभाग का जिम्मा सौंपा गया है। इसी तरह कसरावद से विधायक सचिन यादव को किसान कल्याण तथा कृषि विकास, उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण विभाग दिया गया है।वहीं दिग्विजय सिंह के भतीजे प्रियव्रत सिंह को ऊर्जा विभाग दिया गया है तो दिग्विजय सिंह के बेटे जयवर्धन सिंह को नगरीय विकास एवं आवास मंत्रालय दिया गया है।
 
कांग्रेस की जीत में मालवा-निमाड़ का काफ़ी योगदान रहा है जिसके बाद कहा जा रहा था कि इस क्षेत्र से काफ़ी मंत्री बनाए जा सकते हैं और हुआ भी यही। मालवा-निमाड़ से ना केवल ज़्यादा मंत्री बने बल्कि कई महत्वपूर्ण विभाग भी मालवा-निमाड़ के खाते में आए। कहा जा सकता है कि आने वाले समय में राज्य की राजनीति में मालवा-निमाड़ के का रुतबा और भी बढ़ने वाला है।