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यदि लगा है पेसमेकर, तो मेटल डिटेक्टर से बनाएं ‘दूरी’

03 Jan 2019
पेसमेकर: सावधानी में ही है सुरक्षा!
 

JAN 03 (WTN) – आपने पेस मेकर के बारे में सुना ही होगा। पेसमेकर एक छोटी सी डिवाइस होती है जिसका वजन क़रीब 25 से 35 ग्राम होता है। इस डिवाइस को उन मरीजों के दिल में फिट किया जाता है जिनका हार्ट रेट कम होता है, यह डिवाइस ह्दय की मांसपेशियों में इलेक्ट्रिक इम्‍पल्‍स भेजती है, जिससे आर्टिफिशियल हार्ट बीट बनती है और हार्ट रेट सामान्‍य आ जाता है।

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सामान्‍य हार्ट रेट, प्रति मिनट 60 से 100 बीट होती है। लेकिन यदि अगर हार्ट रेट 40 से कम हो जाती है, तो सम्बन्धित व्‍यक्ति को कई प्रकार की समस्‍याएं होने लगती हैं, ऐसी स्थिति में डॉक्‍टर पेसमेकर को लगवाने की सलाह देते हैं।

पेसमेकर की खास बात यह है कि अगर दिल सही तरीके से धड़कने लगता है और सामान्‍य हार्ट रेट देता है तो यह इम्‍पल्‍स भेजना बंद कर देता है, इसे डिमांड पेसिंग कहते हैं। इससे बैट्री की बचत होती है और पेसमेकर ज़्यादा समय तक चलता है।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पेसमेकर को दिल के बायीं या दायीं कॉलर बोन में त्‍वचा के नीचे फिट किया जाता है और नसों से जोड़ा जाता है। एक पेसमेकर लगभग 10 से 12 साल चलता है। इसे लगवाने के बाद व्‍यक्ति सामान्‍य जीवन जी सकता है।

पेसमेकर लगाने के बाद सावधानियां

शरीर के जिस हिस्से की तरफ़ पेसमेकर लगा होता है, उसके विपरीत वाले कान में हमेशा फ़ोन का इस्‍तेमाल करना चाहिए। यानि कि अगर पेसमेकर बाएं तरफ़ कॉलर बोन पर लगा है, तो फ़ोन का इस्‍तेमाल दाएं ओर वाले कान से करना चाहिए।
 
जिस किसी को भी पेसमेकर लगा हो, उसे हाईटेंशन वॉयर के पास से नहीं गुजरना चाहिए। वैसे बिजली के उपकरणों का इस्‍तेमाल आसानी से किया जा सकता है, लेकिन सभी की फिटिंग सुरक्षित होनी चाहिए इसका पूरा ध्यान रखें।
 
जिसको पेसमेकर लगा है वे मेटल डिटेक्टर से गुजरते समय सावधानी बरतें और उसके पास से जल्दी से गुजरें। आपको पेसमेकर लगा है, यह आप वहां की सिक्‍योरिटी को पहले ही बता दें ताकि वे आपकी जांच हाथों से कर सकें। मेटल डिटेक्टर के पास से गुजरने से पेसमेकर के सर्किट टूटने का ख़तरा रहता है।

जिन मरीजों को पेममेकर लगा है, ऐसे मरीजों का एक्‍स-रे, सीटी स्‍कैन, अल्‍ट्रासाउंड आदि किया जा सकता है, लेकिन एमआरआई नहीं कि जा सकती है। क्योंकि एमआरआई करने से पेसमेकर के सर्किट टूटने का डर रहता है। वैसे एमआरआई वाले पेसमेकर भी आ गए हैं जो मज़बूत सर्किट वाले होते हैं और उससे पेसमेकर के सर्किट टूटने का ख़तरा नहीं होता है।

अगर पेसमेकर मरीज को रेडियशन की ज़रूरत पड़ती है, तो थोड़ी मुश्किल होती है। क्‍योंकि अगर रेडियशन उस जगह होना है जहां पेसमेकर लगा है तो वह बेकार हो जाएगा।