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यूपी में सपा-बसपा गठबंधन के बाद भाजपा को अब मध्य प्रदेश से ‘आशा’

14 Jan 2019
‘जातिगत समीकरणों’ को ध्यान में रखते हुए लोकसभा चुनाव – 2019 के लिए भाजपा ने की ‘प्लानिंग’

JAN 14 (WTN) – लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां ने रणनीति बनाना और उस पर अमल करना शुरू कर दिया है। मध्य प्रदेश समेत तीन राज्यों में हार के बाद जहां भाजपा बैकफुट पर है वहीं इन तीनों राज्यों में जीतकर कांग्रेस का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ है। पिछले लोकसभा चुनाव के परिणाम पर नज़र डालें तो भाजपा को मध्य प्रदेश की 29 में से 27 सीटों पर जीत हासिल हुई थी, और कांग्रेस सिर्फ़ छिन्दवाड़ा और गुना सीट पर ही जीत हासिल कर सकी थी।
 
यूपी में लोकसभा चुनाव के लिए सपा-बसपा के बीच 38-38 सीटों के गठबंधन के बाद भाजपा को अब चिंता सताने लगी है कि यूपी में वो 2014 जैसा करिश्मा शायद ना दोहरा सके। साल 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने यूपी की 80 में से 71 सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव में यूपी में सपा-बसपा के गठबंधन के बाद भाजपा मानकर चल रही है कि उसकी सीटें कम होंगी, ऐसे में भाजपा ने अन्य राज्यों खासकर मध्य प्रदेश पर फोकस करना शुरू कर दिया है क्योंकि पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस का मध्य प्रदेश में सूपड़ा साफ़ कर दिया था।

विधानसभा चुनाव के बाद अब मध्य प्रदेश में लोकसभा चुनाव के लिए राजनीतिक सरगर्मी तेज़ हो गई हैं। विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए प्लानिंग करना शुरू कर दी है। कहा जा रहा है कि भाजपा लोकसभा चुनाव में अपने दमदार प्रत्याशियों के साथ चुनाव लड़ेगी, और इसके लिए भाजपा ने संगठन की मज़बूती के लिए रणनीति बनाना शुरू कर दी है।
 
दिल्ली में सम्पन्न हुई भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के बाद पार्टी ने 2019 के चुनाव के लिए दमदार प्रत्याशियों की तलाश तेज़ कर दी है। कहा जा रहा था कि अभी तक भाजपा सिर्फ़ छिन्दवाड़ा, गुना और रतलाम-झाबुआ सीटों पर ही कांग्रेस को पटखनी देने के लिए रणनीति बना रही है, लेकिन अब भाजपा ने राज्य की 15 से 20 सीटों पर दमदार प्रत्याशियों को उतारने की रणनीति बनाई है ताकि 2019 के लोकसभा चुनाव में किसी भी तरह की कोई भी रणनीतिक भूल ना हो।
 
जानकारी के मुताबिक़ भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए जातिगत आधार पर प्लानिंग करना शुरू कर दी, इसी की देखते हुए भाजपा भोपाल, विदिशा, छिन्दवाड़ा, देवास, खरगोन, मन्दसौर, गुना, राजगढ़, धार, खजुराहो, रतलाम, ग्वालियर, होशंगाबाद, दमोह और सागर सीट पर दमदार प्रत्याशियों के साथ चुनाव लड़ने की रणनीति बना रही है।
 
विधानसभा चुनाव में हार के बाद भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने शिवराज सिंह चौहान का कहना है कि अब उनका पूरा फोकस लोकसभा चुनाव पर होगा कि किस तरह से भाजपा को जीत जिलाई जा सके। कहा जा सकता है कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने विश्लेषण किया होगा और हार के कारण पता किये होंगे, जिसके बाद लोकसभा चुनाव के लिए जीत की रणनीति बनाने में यह विश्लेषण काम आ सकते हैं कि आख़िर विधानसभा चुनाव में ग़लती कहां पर हुई।

 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा कोई भी रिस्क लेना नहीं चाहेगी, क्योंकि शीर्षस्तर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को आशा है कि इस लोकसभा चुनाव में एनडीए की जीत पक्की है बस ज़मीनी स्तर के कार्यकर्ता से लेकर लोकसभा चुनाव के प्रत्याशी तक हर किसी की मेहनत करना होगी। भाजपा भी मध्य प्रदेश में इस चुनाव को जीतने के लिए पूरा ज़ोर लगाने के मूड में है क्योंकि यूपी में सपा-बसपा में गठबंधन के बाद मध्य प्रदेश की 29 सीटों पर भाजपा की नज़रें टिकी हुईं हैं।