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आप भी जानिए इनकम टैक्स बचाने के कुछ उपाय

16 Jan 2019
मेडिकल इंश्योरेंस से लेकर बच्चों की स्कूल फ़ीस के जरिये आप कर सकते हैं टैक्स बचत

JAN 16 (WTN) – जैसा कि आप जानते हैं कि वित्तीय वर्ष 2018-19 की आख़िरी तिमाही शुरू हो चुकी है। ऐसे में यदि आप टैक्स सेविंग के बारे में सोच रहे हैं तो आज हम आपकी कुछ मदद करते हैं। इन उपायों को अपनाकर आप टैक्स बचत कर सकते हैं। हो सकता है कि टैक्स बचाने के इन उपायों के बारे में आप जानते ही ना हों।

टैक्स बचत के लिए सबसे पहले आपको एक मेडिकल इंश्योरेंस ज़रूर ले लेना चाहिए। यदि आपके घर में कोई बुजुर्ग हो तो मेडिकल इंश्योरेंस ज़रूर ले लें। यदि आप हेल्थ इंश्योरेंस पर प्रीमियम का पेमेंट कर रहे हैं तो आप धारा 80 (D) के तहत 50,000 रुपए तक की कटौती के लिए दावा कर सकते हैं।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यदि कोई वरिष्ठ नागरिक अपने वरिष्ठ माता-पिता के प्रीमियम का पेमेंट करता है, तो वह 50,000 रुपए तक की एक अतिरिक्त कटौती के लिए अलग से दावा कर सकता है। इतना ही नहीं, यदि आप अपने वरिष्ठ नागरिक माता-पिता की दवाइयों का खर्च उठा रहे हैं, तो आप धारा 80 (D) के तहत 50,000 रुपए तक की कटौती के लिए दावा कर सकते हैं। लेकिन आपकी जानकारी के लिए बता दें कि यह लाभ सिर्फ़ तभी मिलेगा जब आप इस तरह के ख़र्च को हेल्थ इंश्योरेंस के तहत कवर नहीं करते हैं।
 
वहीं यदि आपके माता-पिता वरिष्ठ नागरिक हैं, तो आप उनके एफ़डी अकाउंट में पैसे ट्रांसफ़र करके, उनके हर अकाउंट से एक वित्तीय वर्ष में 50,000 रुपए तक का कर मुक्त ब्याज कमा सकते हैं। साथ ही आपके माता-पिता आपके ट्रांसफ़र किए गए पैसे को आरओआई कमाने के लिए धारा 80 (C) के तहत कटौती के लिए योग्य किसी अन्य टैक्स सेविंग स्कीम्स में भी निवेश कर सकते हैं।
 
साथ ही यदि आप लोन लेकर एक घर खरीद रहे हैं और आप अपने माता-पिता से पैसे उधार लेकर घर बनाने की आंशिक या पूरी लागत को फाइनेंस कर रहे हैं, तो आप अपने माता-पिता को दिए जाने वाले ब्याज के लिए धारा 24B के तहत टैक्स कटौती लाभ के लिए दावा कर सकते हैं।
 
वहीं यदि आप अपने माता-पिता के घर में रहते हैं तो आप उन्हें किराया दे सकते हैं और अपनी टैक्स देनदारी को कम करने के लिए एचआरए कटौती के लिए दावा कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए आपको एक किरायानामा बनवाना होगा और अपने माता-पिता से किराए की रसीद लेकर रखनी होगी।
 
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पीपीएफ जैसी योजनाओं में निवेश के समय से सात साल का समय पूरा होने पर उसमें से आंशिक निकासी की जा सकती है। वहीं टैक्स बचाने वाला ईएलएसएस, तीन साल के लॉक-इन पीरियड के साथ आता है, जिसमें से भी आप आंशिक रूप से या पूरा पैसा निकालकर फिर से निवेश कर सकते हैं।
 
प्री-स्कूल यानी प्री-नर्सरी और नर्सरी की ट्यूशन फीस पर धारा 80 (C) के तहत डिडक्शन मिल सकता है। लेकिन, यह लाभ सिर्फ दो बच्चों के लिए ही मिल सकता है। इसलिए प्रत्येक माता/पिता अपने दो बच्चों की फीस पर कटौती के लिए दावा कर सकते हैं।