HOME WORLD INDIA BHOPAL BUSINESS ENTERTAINMENT SCIENCE & TECHNOLOGY SPORTS HEALTH
WTN SPECIAL GOSSIP CORNER RECIPES DRINKS FUN FACTS WTN HINDI
EDUCATION LIFESTYLE TRAVEL ART & LITERATURE BIG MEMSAAB OPINION & INTERVIEW BrahMos
ABOUT US PRIVACY POLICY SITEMAP CONTACT US
BREAKING NEWS

मध्य प्रदेश में समाजवादी पार्टी के सामने हैं कई ‘चुनौतियां’!

24 Jan 2019
समाजवादी पार्टी: मध्य प्रदेश में जातिवादी राजनीति नहीं बल्कि विकास की राजनीति ही है सबसे बढ़िया विकल्प
 

JAN 24 (WTN) – मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मध्य प्रदेश में पार्टी की राज्य इकाई को भंग कर दिया है। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के नाम से पार्टी की तरफ़ से जारी लेटर में लिखा है, “समाजवादी पार्टी, मध्य प्रदेश की राज्य कार्यकारिणी प्रदेश अध्यक्ष श्री गौरी सिंह यादव सहित तत्काल प्रभाव से भंग की जाती है।”
 
जैसा कि आप जानते हैं कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन वैसा नहीं रहा जैसी कि उम्मीद लगाई जा रही थी। 15 सालों की भाजपा की सत्ता विरोधी लहर के बाद भी समाजवादी पार्टी सिर्फ़ एक ही सीट पर जीत हासिल कर सकी, इसलिए कहा जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में पार्टी के असंतोषजनक प्रदर्शन के बाद अखिलेश यादव ने राज्य की इकाई को भंग कर दिया।
 
विधानसभा चुनाव वैसे तो सपा ने अपने दम पर लड़ा था लेकिन चुनाव परिणाम के बाद किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिलने के बाद सपा ने भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस पार्टी को समर्थन देने का फ़ैसला किया था। यानि कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार को सपा के एक विधायक का समर्थन हासिल है।
 
मध्य प्रदेश के यूपी से लगे ज़िलों में समाजवादी पार्टी एक समय काफ़ी लोकप्रिय थी। 2003 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस विरोधी लहर और भाजपा के मिले प्रचण्ड बहुमत के बाद भी समाजवादी पार्टी ने 7 सीटों पर जीत हासिल की थी। लेकिन उसके बाद सपा का प्रदर्शन मध्य प्रदेश में कुछ खास नहीं रहा और पार्टी बस 1 सीट पर सिमटकर रह गई।
 
यदि मध्य प्रदेश में अखिलेश यादव को समाजवादी पार्टी को मज़बूत बनाना है, तो उन्हें जातिवादी राजनीति को छोड़कर विकास के मुद्दों पर अपनी पार्टी को आगे बढ़ाना होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि उत्तर प्रदेश की तुलना में मध्य प्रदेश में यादव वोट बैंक उतना नहीं है कि जिसके आधार पर समाजावादी पार्टी यूपी वाली जातिवादी राजनीति का दांव मध्य प्रदेश में खेल सके और सफलता हासिल कर सके।

इतना ही नहीं, भाजपा और कांग्रेस जैसी पार्टियों के बीच सपा को अपना वोट बैंक बनाने के लिए अभी कर्मठ कार्यकर्ताओं और ऊर्जावान नेताओं की काफ़ी जरूरत है। इन सभी के साथ यदि विकास की राजनीति को लेकर समाजवादी पार्टी ने लम्बे समय तक जनता की परेशानियों के लिए संघर्ष किया, तो आने वाले सालों में भाजपा और कांग्रेस के मुकाबले समाजवार्दी पार्टी एक विकल्प हो सकती है।