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नियंत्रित मुद्रास्फीति के कारण ‘कम’ हो सकती है रेपो रेट, चुनाव में प्रधानमंत्री मोदी को हो सकता है ‘फ़ायदा’!

05 Feb 2019
इनकम टैक्स में छूट के बाद आम आदमी को मिल सकती है सस्ते कर्ज़ की ‘सौगात’

FEB 05 (WTN) – नियंत्रित महंगाई दर यानि कि मुद्रास्फीति में कमी को देखते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक अपनी रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत तक की कटौती कर सकता है। जानकारी के मुताबिक़ सात फरवरी को आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति नई नीतिगत दरों की घोषणा कर सकती है। कहा जा रहा है कि आरबीआई अपने रुख में बदलाव कर सकता है लेकिन दरों में वृद्धि करने की सम्भावना कम ही है। नियंत्रित मुद्रास्फीति को देखते हुए कहा जा रहा है कि रिज़र्व बैंक नीतिगत दरों में पहली कटौती अप्रैल के महीने से कर सकता है और यह कटौती 0.25 प्रतिशत की हो सकती है।

फिलहाल रिज़र्व बैंक की रेपो रेट 6.50 प्रतिशत है। 1 अगस्त, 2018 को रिज़र्व बैंक ने रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की थी और इसे बढ़ाकर 6.50 प्रतिशत कर दिया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि रेपो रेट वो दर होती है जिस दर पर आरबीआई बैंकों को कर्ज़ देता है। इसी कर्ज़ से बैंक ग्राहकों को ऋण देते हैं। यदि रेपो रेट कम होना है तो इसका मतलब है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के कर्ज़ सस्ते हो जाएंगे, वहीं यदि रेपो रेट बढ़ती है तो इसका मतलब है कि बैंकों से मिलने वाले कर्ज़ महंगे हो जाएंगे।
 
कहा जा रहा है कि कई कारण हैं जिन्हें देखते हुए रिज़र्व बैंक रेपो रेट में कमी कर सकता है। जानकारों के मुताबिक़ नियंत्रित मुद्रास्फीति और उसका निचले स्तर पर रहना रेपो रेट में कमी का एक कारण बन सकता है। वहीं दूसरा कारण बताया जा रहा है कि जनवरी के दूसरे पखवाड़े में भी ऋण वृद्धि में गिरावट दर्ज की गई है। वैसे रिज़र्व बैंक ने पिछली तीन मौद्रिक समिति बैठकों में रेपो रेट में किसी भी तरह के परिवर्तन नहीं किये थे। वहीं इस वित्तीय वर्ष में रिज़र्व बैंक ने दो बार 0.25-0.25 प्रतिशत की वृद्धि रेपो रेट में की है।
 
यदि रिज़र्व बैंक रेपो रेट में कमी करता है तो स्वाभाविक है कि इससे बैंक से कर्ज़ लेना और बैंकों की ईएमआई सस्ती होगी जिसका सीधा फ़ायदा आम लोगों को मिलेगा, और यदि ऐसा होता है तो प्रधानमंत्री मोदी के लिए यह लोकसभा चुनाव में किसी वरदान से कम नहीं होगा।

इनकम टैक्स की दरों में कमी को घोषणा के बाद यदि आम जनता को कम ब्याज पर कर्ज़ का लाभ मिलता है तो इसका प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को आम चुनाव में काफ़ी लाभ मिल सकता है। क्योंकि मोदी चुनाव प्रचार के दौरान कह सकेंगे कि उनकी नीतियों के कारण ही मुदास्फीति नियंत्रित है और कर्ज़ सस्ता हो गया। यानि कि यदि रेपो रेट में कमी होती है तो यह एक तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए चुनाव में एक बड़ा दांव होगा।