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बदले बदले से राहुल गांधी!

09 Feb 2019
लोकसभा चुनाव के पहले प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ बदली राहुल गांधी की ‘बॉडी लैंग्वेज’; शब्द हुए ‘तीखे’!

FEB 09 (WTN) – जैसे-जैसे लोकसभा चुनाव नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर और भी ज्यादा आक्रामक होते जा रहे हैं। संसद से लेकर सड़क तक, राहुल गांधी कोई भी ऐसा मौका नहीं छोड़ रहे हैं जिसमें वो प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना ना साधें। यदि हाल के दिनों में राहुल गांधी के भाषणों को ध्यान से देखा जाए तो साफ़ दिखता है कि अपने भाषणों के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ बोलते समय राहुल गांधी की बॉडी लैंग्वेज और भी ज्यादा आक्रमक हो गई है। इतना ही नहीं, राहुल गांधी के भाषणों में जिन शब्दों का उपयोग किया जा रहे हैं वे भी काफ़ी तीखे और चुभने वाले हैं।

भोपाल में किसानों के सम्मेलन में राहुल गांधी का यही आक्रामक अंदाज देखने को मिला। प्रधानमंत्री मोदी पर गम्भीर आरोप लगाते हुए राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी डरपोक हैं और उन्हें डराकर कोई भी काम कराया जा सकता है। इससे पहले दिल्ली में कांग्रेस अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के कार्यक्रम में भी राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी को डोकलाम के मामले में डरपोक कहा था, इतना ही नहीं राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री समेत भाजपा और आरएसएस को भी डरने वाला कहा था। कहा जा सकता है कि जिस तरह के शब्दों का प्रयोग आमतौर पर राजनीतिक भाषणों में नहीं किया जाता है, उनका प्रयोग आजकल राहुल गांधी कर रहे हैं।
 
यदि इन दिनों राहुल गांधी के भाषणों पर गौर किया जाए तो साफ़ जाहिर होता है कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ अब तक के सबसे तीखे हमले कर रहे हैं। ऐसा इसलिए भी हो सकता है कि लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ अपनी तरकश के हर तीर को आजमाना चाहते हों। अपने हर भाषण में राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी की हर योजना का मखौल उड़ा रहे हैं, साथ ही राहुल गांधी यह भी बताने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि उनकी पार्टी सत्ता में आई तो कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार की योजनाओं में परिवर्तन करेगी।
 
राहुल गांधी इस समय राफेल मामले में प्रधानमंत्री मोदी पर सबसे ज्यादा आक्रमक हैं। राहुल गांधी ने राफेल मामले में प्रधानमंत्री मोदी पर नया आरोप लगाते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने राफेल मामले में बिना रक्षा मंत्रालय को बताए सीधे तौर पर हस्तक्षेप किया है। राहुल गांधी समय-समय पर आरोप लगाते रहते हैं कि राफेल मामले में प्रधानमंत्री मोदी ने अनिल अम्बानी की कम्पनी को फायदा पहुंचाया है।
 
लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी ने एक और दांव चला है जिससे प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ लोकसभा चुनाव में माहौल बनाया जा सके। भोपाल में एक सभा को सम्बोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यदि कांग्रेस पार्टी सत्ता में आई तो उनकी सरकार सभी लोगों की एक न्यूतनम आमदनी सुनिश्चित करेगी। मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी ने कहा कि जब बड़े-बड़े उद्योगपतियों का कर्ज़ माफ़ हो सकता है तो न्यूनतम आय की गारंटी भी दी जा सकती है।
 
जिस तरह से राहुल गांधी प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ बॉडी लैंग्वेज और शब्दों के जरिये दिनों-दिनों आक्रामक हुए जा रहे हैं उससे साफ़ जाहिर है कि राहुल गांधी जानते हैं कि यदि प्रधानमंत्री का आक्रामक तरीके से विरोध नहीं किया गया तो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी को वांछित सफलता मिलना मुश्किल है। राहुल गांधी जानते हैं कि यूपी में सपा-बसपा गठबंधन बनने के बाद वहां पर उनकी राह मुश्किल हो गई है, साथ ही राहुल गांधी जानते हैं कि कई राज्यों में कांग्रेस पार्टी की हालत खराब है और उन्हें दूसरी पार्टियों के सहारे लोकसभा चुनाव में भाजपा के ख़िलाफ़ लड़ना होगा। ऐसे में राहुल गांधी के पास एक ही विकल्प बचता है और वो है प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ ज्यादा से ज्यादा आक्रामक होना।
 
अब देखते हैं कि राहुल गांधी की आक्रामकता का उन्हें लोकसभा चुनाव में कितना लाभ होता है? लेकिन कहीं ऐसा ना हो कि ज्यादा आक्रमक होने के चक्कर में राहुल गांधी अमर्यादित हो जाएं और कुछ ऐसा प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ कह दें जिसका लाभ भाजपा को मिल जाए। क्योंकि देखा गया है कि चुनावों के समय विपक्षी नेता प्रधानमंत्री मोदी के ख़िलाफ़ अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हैं और इसी का फ़ायदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मिल जाता है। लोकसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी का अंदाज ए बयां बदलने से साफ़ जाहिर करता है कि इस बार का लोकसभा चुनाव राहुल गांधी के लिए अब तक की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने जा रहा है।